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EV Registration Data: दुनिया भर में बढ़ा इलेक्ट्रिक गाड़ियों का क्रेज, जानें मई में कौन-सा देश रहा सबसे आगे

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Tue, 16 Jun 2026 01:09 PM IST
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सार

BMI Data: दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में वैश्विक स्तर पर ईवी की डिमांड में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर इस सेगमेंट में कितनी वृद्धि हुई है और क्या अब दुनिया धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल वाहनों से दूरी बनाकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है?

Electric Vehicle Demand Rises Worldwide Third Consecutive Month
वैश्चिक स्तर पर बढ़े ईवी रजिस्ट्रेशन - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

Global EV Demand May 2026: महंगे होते ईंधन के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार वैश्विक स्तार पर एक बार फिर काफी मजबूत साबित हुआ। रॉयटर्स के मुताबिक, कंसल्टेंसी फर्म बेंचमार्क्र मिनरल इंटेलिजेंस (BMI) की ओर से जारी हुए रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की ऊंची कीमतों और अलग-अलग देशों में मिल रही सरकारी सब्सिडी ने लोगों को पेट्राेल-डीजल वाली गाड़ियों से दूर जाने के लिए प्रेरित किया है। यही वजह है कि मई महीने में लगातार तीसरे महीने वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में इजाफा देखने को मिला है।  हालांकि, हर क्षेत्र में तस्वीर एक जैसी नहीं है। जहां यूरोप में ईवी बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं चीन और अमेरिका में अभी भी चुनौतियां देखने को मिल रही हैं।



मई में बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार

  • बीएमआई यानी की कंसल्टेंसी फर्म बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के आंकड़ों की माने तो मई 2026 में दुनिया भर में बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (बीईवी) और प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (पीएचईवी) की रजिस्ट्रेशन करीब 18 लाख यूनिट तक पहुंच गई। यह पिछले साल की तुलना में करीब 3 प्रतिशत अधिक है।
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  • रजिस्ट्रेशन वाहन बिक्री की ओर प्रमुख इशारा माना जा रहा है। साल 2026 के पहले पांच महीनों में कुल ईवी रजिस्ट्रेशन भी पिछले वर्ष के मुकाबले 0.9 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई।
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कहां बिकी सबसे ज्यादा गाड़ियां?

  • बीएमआई के डेटा मैनेजर चार्ल्स लेस्टर के अनुसार, फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक वृद्धि का सबसे बड़ा कारण यूरोप है। मई में यहां यानी की यूरोप में ईवी रजिस्ट्रेशन 23 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.15 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इस तेजी के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं।
  • यूरोपीय देशों में सरकारें ईवी खरीदने पर सब्सिडी दे रही हैं। इसके अलावा पेट्रोल की ऊंची कीमतों ने भी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया है। जिसका नतीजा सबसे सामने है, यूरोप में ईवी अपनाने के मामले में दुनिया के सबसे सक्रिय बाजारों में शामिल हो गया है।


किस देश में धीमी पड़ी रफ्तार?

  • चौंकानें वाली बात यह रही कि दुनिया के सबसे बड़े ईवी बाजार में से एक चीन में इस बार ईवी रजिस्ट्रेशन में गिरावट देखने को मिली। आंकड़ों की माने तो चीन में ईवी रजिस्ट्रेशन लगभग नौ प्रतिशन से घटकर 9.87 लाख यूनिट रह गई।
  • एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं में कमी इसकी एक प्रमुख वजह है। वहीं, ऑटो ट्रेड-इन सपोर्ट वापस लिए जाने और इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर मिलने वाले टैक्स ब्रेक के समाप्त होने का असर बाजार पर दिखाई दिया है।


वैश्विक बाजारों की ओर बढ़ रहीं चीनी कंपनियां
घरेलू मांग में कमजोरी के बाद कई चीनी वाहन निर्माता अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। बीएमआई के अनुसार, हाल के महीनों में यूरोप में चीनी कंपनियों की मौजूदगी बढ़ी है और वहां जॉइंट वेंचर तथा स्थानीय उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। इसका मकसद नए बाजारों में जगह बनाना और वैश्विक स्तर पर EV बिक्री को बढ़ाना है।

अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका में भी गिरावट

  • चीन ही नहीं मई 2026 में नॉर्थ अमेरिका का ईवी बाजार भी कमजोर रहा। इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री करीब 26 प्रतिशत गिरकर 1.23 लाख यूनिट रह गई।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में ईवी टैक्स क्रेडिट योजनाओं के खत्म होने और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन नियमों को लेकर प्रस्तावित नरमी का असर मांग पर पड़ा है। इसके चलते कई खरीदार दोबारा इंटरनल कम्बस्शन इंजन और हाइब्रिड वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं।


क्या बदल रही है वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री?

  • विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ईवी बाजार के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव जारी है, लेकिन इसकी गति हर क्षेत्र में अलग-अलग है। जहां यूरोप तेजी से EV अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • वहीं, चीन और अमेरिका में नीतिगत बदलाव बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि आने वाले महीनों में सरकारी नीतियां, ईंधन कीमतें और नई तकनीकें यह तय करेंगी कि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग किस रफ्तार से आगे बढ़ता है।
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