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EV: क्या इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ही बनेगा 2070 तक भारत के 'नेट-जीरो' लक्ष्य का आधार? इस मंत्री ने कही बड़ी बात

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Wed, 28 Jan 2026 03:48 PM IST
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सार

Net Zero: SIAT 2026 के उद्घाटन पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भारत के 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य को हासिल करने में इलेक्ट्रिक वाहन सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2030 तक इसके तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना है।

EVs Key to India’s Net-Zero 2070 Goal, Says HD Kumaraswamy at SIAT 2026
Net Zero - फोटो : X
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को 'SIAT 2026' इवेंट की शुरुआत करते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने साफ किया कि भारत ने 2070 तक 'नेट-जीरो' (यानी प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करने) का जो सपना देखा है, उसे सच करने में इलेक्ट्रिक गाड़ियां (ईवी) सबसे अहम रोल निभाएंगी।

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दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने भारत की शानदार आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने इस बात पर गहरा विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं, जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरेगा। आंकड़ों की मानें तो साल 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो न केवल देश की बढ़ती औद्योगिक ताकत को दर्शाता है बल्कि नए भारत के बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक है।

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स्वच्छ विनिर्माण और सरकारी योजनाएं

कुमारस्वामी ने बताया कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों ने देश के एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई मजबूती दी है। खास तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कई बड़ी योजनाएं जमीन पर असर दिखा रही हैं।


इसमें सबसे पहले ₹11,500 करोड़ की FAME-II योजना ने अहम भूमिका निभाई है, जिसके जरिए 16.71 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया गया और 9,000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी मिली। इसके बाद आती है ₹10,900 करोड़ के बजट वाली पीएम ई-ड्राइव योजना, जिसके तहत अब तक 20 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर उतर चुकी हैं। वहीं, इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए ₹25,938 करोड़ की पीएलआई ऑटो योजना चलाई जा रही है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रही है।

बैटरी और महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन

ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सरकार ने भारत में 50 गीगावाट-आर (GWh) की 'एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल' (ACC) बैटरी निर्माण क्षमता स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ₹7,280 करोड़ के बजट के साथ 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' (REPM) योजना भी शुरू की गई है। यह योजना इसलिए भी खास है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइन और हमारी रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देगी।

वहीं, प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अब कमर्शियल वाहनों पर अपना फोकस बढ़ाया है, क्योंकि परिवहन प्रदूषण में इनकी हिस्सेदारी 40% से ज्यादा है। इनके विद्युतीकरण को रफ्तार देने के लिए ₹2,000 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं, जिसके तहत देशभर में 70,000 नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

वाहन उत्पादन और निर्यात में उछाल

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के शानदार प्रदर्शन पर खुशी जाहिर करते हुए केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कुछ अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि देश में वाहनों का उत्पादन, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 2.84 करोड़ यूनिट था, वह वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3.1 करोड़ यूनिट हो गया है। निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने लंबी छलांग लगाई है; इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 45 लाख यूनिट से बढ़कर 53.6 लाख यूनिट तक पहुंच गया।

इस मौके पर मंत्री ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह केवल पर्यावरण रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम करने और देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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