Driving Tips: सड़क पर हादसे से बचना है? आज ही अपनाएं यह तीन सेकंड का नियम, जानें चालकों के लिए क्यों जरूरी
Driving Tips: ड्राइविंग के दौरान एक छोटी सी चूक एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में सड़क सुरक्षा एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर चालक तीन सेकंड का नियम फॉलो कर ले, तो वह कई बड़े खतरों से बच सकता है। लेकिन आखिर यह नियम क्या है? कैसे काम करता है? आइए जानते हैं इस लेख में...
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3 Second Rule: भारत जैसी सड़कों पर सुरक्षित ड्राइविंग सिर्फ चालक की सही आदतों पर भी निर्भर करती है। कई बार तो सड़क हादसे इसलिए भी हो जाते हैं क्योंकि चालक आगे चल रही गाड़ी से पर्याप्त दूरी नहीं रखते हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ड्राइविंग के दौरान 3-सेकंड नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यह आसान तरीका आपको अचानक ब्रेक लगने जैसी स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए जरूरी समय देता है और दुर्घटना का जोखिम कम करता है।
3-सेकंड का नियम क्या है ?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि तीन-सेकंड का नियम सिर्फ आपकी कार की स्पीड नहीं, बल्कि आपके वाहन और आगे चल रही गाड़ी के बीच सुरक्षित समय का अंतर बनाए रखने का तरीका है। इससे ड्राइवर को खतरे की स्थिति में प्रतिक्रिया देने और गाड़ी रोकने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
3-सेकंड का नियम कैसे अपनाएं ?
इस नियम के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। इसे अपनाना बेहद आसान है।
- सबसे पहले सड़क किनारे किसी स्थिर चीज जैसे पेड़, बिजली का खंभा, ट्रैफिक साइन या चौराहे को अपना लैंडमार्क चुनें।
- जैसे ही आपके आगे चल रही गाड़ी उस स्थान को पार करे, अपने मन में गिनती शुरू करें...एक सेकंड, दो सेकंड और तीन सेकंड।
- अगर आपकी कार तीन सेकंड पूरे होने से पहले उसी स्थान तक पहुंच जाती है, तो इसका मतलब है कि आप आगे वाली गाड़ी के बहुत करीब चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत गति कम करें और सुरक्षित दूरी बना लें।
चालकों के लिए क्यों जरूरी है यह नियम?
- देखिए कार चलाते समय आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगा सकती है। ऐसे में अगर दोनों वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं होगी, तो टक्कर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
- करीब 48 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर कार को पूरी तरह रुकने के लिए लगभग 150 फीट की दूरी चाहिए होती है।
- वहीं 112 किमी/घंटा की स्पीड पर यही दूरी बढ़कर करीब 500 फीट तक पहुंच सकती है। इसलिए दूरी को मीटर या फीट में नहीं, बल्कि सेकंड में मापना ज्यादा आसान और व्यावहारिक माना जाता है।
रिएक्शन टाइम भी है जरूरी
- किसी खतरे को देखकर उसे समझने और ब्रेक लगाने में सामान्य तौर पर करीब 1.5 सेकंड का समय लग जाता है।
- यही वजह है कि एक्सपर्ट समय आधारित दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं। इससे अचानक सामने आने वाली स्थिति में वाहन नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
हर मौसम में एक जैसा नियम नहीं
यहां पर एक बात ध्यान रखना भी जरूरी है कि तीन सेकंड वाला नियम सामान्य मौसम और सामान्य ट्रैफिक के लिए उपयुक्त माना जाता है।
- अगर मौसम खराब हो या सड़क की स्थिति ठीक न हो, तो सुरक्षित दूरी और बढ़ानी चाहिए।
- बारिश, कोहरा या बर्फ में कम से कम चार सेकंड या उससे अधिक का अंतर रखें।
- थकान या तनाव की स्थिति में ज्यादा दूरी बनाकर चलें या ड्राइविंग से बचें।
- एसयूवी, ट्रक या अन्य भारी वाहनों के पीछे चलते समय अतिरिक्त दूरी बनाए रखें।
शहर और हाईवे, दोनों जगह फायदेमंद
यह नियम सिर्फ हाईवे पर ही नहीं, बल्कि शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर भी उतना ही उपयोगी है। ट्रैफिक में अचानक रुकने या ब्रेक लगने की स्थिति में यही अतिरिक्त समय दुर्घटना से बचा सकता है।