GMOEA: एसोसिएशन ने सरकार से लगाई गुहार, कहा: एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने से गोवा की माइनिंग इंडस्ट्री को झटका
Low Grade Iron Ore: गोवा में माइनिंग ऑपरेशंस पर खतरा मंडरा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए गोवा मिनरल ओर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को पत्र लिख एक्सपोर्ट ड्यूटी को लेकर आपत्ति जताई है।
विस्तार
निम्न-ग्रेड आयरन ओर पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने की संभावित योजना से गोवा की माइनिंग इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। जिसके संदर्भ में गोवा मिनरल ओर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (GMOEA) ने माइंस मिनिस्ट्री के सचिव पीयूष गोयल को पत्र लिखकर अपील की है। कहा इस तरह का कदम राज्य में माइनिंग ऑपरेशंस को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, क्योंकि गोवा का अधिकांश आयरन ओर निर्यात-योग्य लो-ग्रेड श्रेणी में आता है।
जीएमओईए ने माइंस मिनिस्ट्री के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि गोवा में पाया जाने वाला आयरन ओर 58% Fe से कम ग्रेड का होता है। ये घरेलू स्टील इंडस्ट्री के लिए कम उपयोगी है। इसलिए ये पूरा निर्यात पर निर्भर रहा है। इसके बाद एसोसिएशन ने साफ कहा कि लो-ग्रेड आयरन ओर पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने से राज्य की माइनिंग गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
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क्यों खास है गोवा का आयरन ओर?
GMOEA के जॉइंट सेक्रेटरी ग्लेन कलावाम्पारा के अनुसार गोवा का औसत आयरन ओर ग्रेड करीब 54% Fe है। यानी ये लो ग्रेड आयरन ओर है। जोकि घरेलू स्टील प्लांट्स के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी वजह से गोवा की माइनिंग इंडस्ट्री का मॉडल एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड रहा है।
एक्सपोर्ट ड्यूटी से क्या नुकसान होगा?
एसोसिएशन का कहना है कि बार-बार बदली जाने वाली टैक्स नीतियां अनिश्चितता बढ़ाती हैं। निर्यात सीमित होगा तो कीमतें और गिरेंगी।इससे राज्य और केंद्र दोनों के राजस्व पर असर पड़ेगा। इतना ही नहीं नई माइंस के लिए बोली लगाने वालों का उत्साह भी घटेगा। इससे कोंकण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी झटका लग सकता है।
गोवा में 12 ऑक्शन किए गए माइनिंग ब्लॉक्स में से 5 शुरू हो चुके हैं। अब चालू वित्त वर्ष में और ब्लॉक्स शुरू होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने हाल ही में गोवा को 400 करोड़ रुपये का विशेष सहायता पैकेज भी दिया है, लेकिन ऐसे समय में नई एक्सपोर्ट ड्यूटी को इंडस्ट्री के लिए नुकसानदेह बताया जा रहा है।
क्या मांग की?
GMOEA ने सरकार से मांग की है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने के बजाय ऑक्शन की गई माइंस को तेजी से चालू किया जाए। वैधानिक मंजूरियों की प्रक्रिया आसान और तेज की जाए। इससे उत्पादन बढ़ेगा और राजस्व भी स्थायी रूप से बढ़ सकता है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगती है तो कई प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहेंगे। गोवा की माइनिंग रिकवरी प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।