India-EU FTA: ऑटो सेक्टर में आएगी तकनीकी क्रांति, लेकिन इस कंपनी के कारों की कीमत में नहीं होगी कटौती
India-EU FTA: मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी और सीईओ संतोष अय्यर का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित होगा और नई तकनीक, इनोवेशन व सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इस समझौते से फिलहाल मर्सिडीज-बेंज की कारों की कीमतों में कोई बड़ी कमी नहीं आएगी।
विस्तार
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी और सीईओ संतोष अय्यर ने कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा देगा। लेकिन उन्होंने साफ किया कि इस समझौते की वजह से अभी मर्सिडीज-बेंज की कारें सस्ती नहीं होंगी।
भारत की वैश्विक पहचान मजबूत
अय्यर के मुताबिक यह समझौता भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे यह साफ होता है कि दुनिया में भारतीय अर्थव्यवस्था की अहमियत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि FTA से भविष्य की मोबिलिटी, नई तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका पूरा असर तब समझ में आएगा जब समझौते की सारी शर्तें सामने आएंगी।
कारों की कीमतें क्यों नहीं घटेंगी?
संतोष अय्यर ने इसके दो मुख्य कारण बताए हैं कि क्यों FTA का कारों की कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। पहला कारण यह है कि मर्सिडीज-बेंज इंडिया की 90% से ज्यादा कारें भारत में ही तैयार होती हैं, जबकि यूरोप से पूरी तरह बनी हुई कारों (CBU) का आयात मात्र 5% ही है। ऐसे में आयात शुल्क में बदलाव का सीधा असर कीमतों पर नहीं दिखता।
दूसरा बड़ा कारण रुपये की कमजोरी है। साल 2025 में यूरो के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 19% तक गिर गया है, जिससे आयात शुल्क में मिलने वाली किसी भी संभावित छूट का लाभ लगभग खत्म हो जाता है। इन्ही वजहों से अय्यर ने स्पष्ट किया कि कंपनी का पूरा ध्यान भारत में उत्पादन बढ़ाने और सही कीमत पर ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देने पर ही केंद्रित रहेगा।
मुक्त व्यापार के फायदे
मर्सिडीज-बेंज हमेशा से मुक्त व्यापार का समर्थन करती आई है। अय्यर के अनुसार, यह समझौता व्यापार में रुकावटें कम करेगा और भारत की आर्थिक रफ्तार बढ़ाएगा। इससे नए बाजार खुलेंगे, व्यापार बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके बनेंगे। साथ ही, देशों के बीच बेहतर तालमेल से सप्लाई चेन भी ज्यादा मजबूत और स्थिर होगी।