EV: दुनिया में मेड-इन-इंडिया ईवी का जलवा! यूरोप और अफ्रीका में तेजी से बढ़ी भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की मांग
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आ रही है। भारत में बने इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल घरेलू सड़कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। यूरोप, अफ्रीका और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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विस्तार
भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की पहचान अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही। हाल के महीनों में भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की विदेशों में मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे इनके निर्यात में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई देश स्वच्छ परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका सीधा फायदा भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को मिल रहा है और यूरोप, अफ्रीका सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत में बनी इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
निर्यात में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत से इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस दौरान हजारों अधिक इलेक्ट्रिक वाहन विदेशी बाजारों में भेजे गए। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वैश्विक बाजार में भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्वीकार्यता मिल रही है।
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह तेजी भारत को किफायती इलेक्ट्रिक वाहनों के वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
विदेशों में भारतीय EV की मांग क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं।
ईंधन की बढ़ती कीमतें:
कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे होने से लोग कम खर्च वाले विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं।
स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा:
विभिन्न देशों की सरकारें पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित कर रही हैं, जिससे ईवी की मांग को मजबूती मिल रही है।
किफायती विकल्प की तलाश:
रोजमर्रा की यात्रा के लिए बजट फ्रेंडली इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन कारणों से आने वाले समय में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है।
निर्यात में किस कंपनी का कितना दबदबा रहा?
अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के दौरान भारत से होने वाले पैसेंजर वाहन निर्यात में कुछ कंपनियों का दबदबा साफ दिखाई दिया। बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से मारुति सुजुकी सबसे आगे रही, जबकि ह्यूंदै, निसान, टोयोटा और फॉक्सवैगन ने भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
मारुति सुजुकी:
लगभग 53-55 प्रतिशत अनुमानित निर्यात बाजार हिस्सेदारी के साथ कंपनी पहले स्थान पर रही। इसके निर्यात में Fronx, Jimny, e-Vitara, Baleno और Dzire जैसे मॉडल सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे।
ह्यूंदै मोटर इंडिया:
करीब 14-16 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रही। कंपनी के Grand i10 और Verna मॉडल विदेशी बाजारों में प्रमुख निर्यात उत्पाद रहे।
निसान मोटर इंडिया:
लगभग 9-10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रही। कंपनी के निर्यात में Magnite सबसे अहम मॉडल रहा।
भारतीय निर्माताओं को मिल रहा फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता का लाभ केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है।
देश की कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब-
निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही हैं: विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए कंपनियां निर्यात का विस्तार कर रही हैं।
नए EV मॉडल तैयार कर रही हैं: अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए नए इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास पर भी काम किया जा रहा है।
रिपोर्ट का कहना है कि बेहतर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और लगातार विकसित होती तकनीक भारतीय कंपनियों की वैश्विक मौजूदगी को मजबूत कर रही है।
आने वाले समय में क्या नए मॉडल देखने को मिलेंगे?
रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में भारतीय वाहन निर्माता अपने इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो का विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं।
इस दौरान बाजार में-
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नई SUV
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नई हैचबैक
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नए क्रॉसओवर मॉडल
लॉन्च किए जाने की संभावना है।
इससे अलग-अलग बजट वाले ग्राहकों को अधिक विकल्प मिल सकेंगे और भारत की वैश्विक ईवी बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है।
भारतीय EV दुनिया का ध्यान क्यों खींच रही हैं?
रिपोर्ट में भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई अहम कारण बताए गए हैं।
प्रतिस्पर्धी कीमत:
किफायती कीमत भारतीय वाहनों की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
बेहतर निर्माण गुणवत्ता:
मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी में लगातार सुधार से विदेशी बाजारों का भरोसा बढ़ा है।
आधुनिक सुरक्षा और तकनीक:
आधुनिक सेफ्टी फीचर्स और नई तकनीक भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।
सस्टेनेबल मोबिलिटी की बढ़ती मांग:
पर्यावरण अनुकूल परिवहन की वैश्विक मांग भारतीय EV के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
बढ़ता निर्यात नेटवर्क:
कई महाद्वीपों तक फैला निर्यात नेटवर्क भारतीय कंपनियों की पहुंच को लगातार मजबूत बना रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यही विशेषताएं भारतीय ब्रांड्स को उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बना रही हैं, जहां ग्राहक किफायत और भरोसेमंद उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं।
पूरी तस्वीर क्या कहती है?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बनी इलेक्ट्रिक कारें अब घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यूरोप, अफ्रीका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ते निर्यात से यह संकेत मिल रहा है कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों पर दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
स्वच्छ परिवहन की बढ़ती वैश्विक मांग, प्रतिस्पर्धी कीमत और बेहतर निर्माण क्षमता के दम पर भारतीय वाहन निर्माता अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। साथ ही, आने वाले वर्षों में नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च होने से भारत की वैश्विक ईवी उद्योग में भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है।