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FASTag: एनएचएआई की चूक, बिना टोल प्लाजा से गुजरे ही कट गया वाहन का टैक्स; लाखों मामलों में सरकार ने किया रिफंड

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Fri, 30 Jan 2026 12:26 PM IST
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सार

Fastag Toll Deduction Errors: भारतीय सड़कों पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच लाखों गलत टोल काटे गए। इसके बाद उनका रिफंड किया गया। इतना ही नहीं यहां तो करीब 35 प्रतिशत मामलों में वाहन टोल प्लाजा पर मौजूद ही नहीं थे। तो क्या ये एक चूक थी या सरकार की काेई बड़ी लापरवाही। जानिए पूरा मामला विस्तार से...
 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि जनवरी–दिसंबर 2025 के दौरान करीब 464 करोड़ फास्टैग ट्रांजेक्शन हुए। इनमें से 17.6 लाख ट्रांजेक्शन ऐसे थे, जिनमें गलत यूजर फीस कटने के बाद रिफंड करना पड़ा। हालांकि ये  कुल ट्रांजेक्शन के मुकाबले गलत कटौती का सिर्फ 0.03% है, लेकिन मंत्रालय का मानना है कि ऐसी गलती होनी ही नहीं चाहिए थी।

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मैन्युअल एंट्री बनी बड़ी वजह

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, गलत कटौती के पीछे की बड़ी वजह टोल ऑपरेटर की ओर से किया मैन्युअल वाहन नंबर है। कई बार नेटवर्क या तकनीकी समस्या के चलते अटेंडेंट गलत नंबर फीड कर देते हैं, जिससे किसी और वाहन का फास्टैग वॉलेट डेबिट हो जाता है। इसी वजह से मंत्रालय अब मैन्युअल वाहन नंबर एंट्री को पूरी तरह खत्म करने का विचार कर रहा है।

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कितना बदला टोल सिस्टम?

मंत्रालय के अनुसार फास्टटैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पार करने का औसत समय 40 सेकंड रह गया। पहले मैन्युअल टोल सिस्टम में यही समय 12.2 मिनट प्रति वाहन था। यानी फास्टैग ने ट्रैफिक जाम, ईंधन खपत और समय की बर्बादी को काफी हद तक कम किया है।

टोल से कितनी कमाई हुई?

सड़क परिवहन मंत्रालय ने बताया कि नेशनल हाईवे नेटवर्क पर टोल संग्रह में भारी उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती 9 महीनों में ही सरकार ने 50,195 करोड़ रुपये का यूजर फीस एकत्र किया है, जो पिछले पूरे साल के 61,508 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुंच रहा है। ये आंकड़े देश के नेशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़े हैं। इसके बाद सरकार का फोकस अब फास्टैग सिस्टम को और ज्यादा ऑटोमेटेड और एरर-फ्री बनाने पर है। मैन्युअल हस्तक्षेप खत्म होने से गलत कटौती रुक सकती है। इससे यात्रियों की शिकायतें भी कम होंगी और फास्टैग पर भरोसा भी मजबूत होगा। 

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