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EV: ईवी क्रांति को रफ्तार देने की तैयारी; भारत में लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर मिलेगी 15% सब्सिडी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Fri, 30 Jan 2026 12:38 PM IST
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सार

India EV Subsidy: भारत सरकार देश को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और क्लीन एनर्जी का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक नई सब्सिडी योजना पर काम कर रही है। इस प्रस्तावित योजना के तहत लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने वाली कंपनियों को 15% तक की कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत हो।

India Plans Major Subsidy Scheme for Lithium and Nickel Processing to Boost EV and Clean Energy Push
Subsidy for Lithium and Nickel Processing - फोटो : X
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विस्तार
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भारत सरकार देश को इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और क्लीन एनर्जी का हब बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी सब्सिडी योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत, देश में लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने वाली कंपनियों को भारी वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्र में चीन के दबदबे को चुनौती देना और आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

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वर्तमान में, भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन की गति को बढ़ाना चाहता है, लेकिन बैटरी बनाने के लिए जरूरी लिथियम और निकेल को प्रोसेस करने की क्षमता फिलहाल हमारे पास सीमित है। चूंकि सरकार ने साल 2030 तक 30% कारों और 80% दोपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा है, इसलिए घरेलू स्तर पर इन खनिजों की प्रोसेसिंग अनिवार्य हो गई है।

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योजना का स्वरूप और शर्तें 

प्रस्तावित योजना के अनुसार, सरकार पात्र प्रोजेक्ट्स को 15% कैपिटल सब्सिडी प्रदान करेगी। यह लाभ उन प्लांट्स को मिलेगा जो 1 अप्रैल, 2026 या उसके बाद अपना परिचालन शुरू करेंगे। यह प्रोत्साहन योजना अगले 5 वर्षों तक लागू रहेगी।


हालांकि, सरकार ने इसके लिए कुछ कड़े मानक भी तय किए हैं। सब्सिडी का लाभ पाने के लिए लिथियम प्लांट की न्यूनतम क्षमता 30,000 मीट्रिक टन और निकेल प्लांट की न्यूनतम क्षमता 50,000 मीट्रिक टन होनी चाहिए। साथ ही, मिलने वाली सब्सिडी की एक अधिकतम सीमा भी तय की गई है; लिथियम के लिए यह सालाना नेट सेल्स टर्नओवर का 40% और निकेल के लिए 25% तक सीमित होगी।

भुगतान की प्रक्रिया 

खास बात यह है कि सरकार यह सब्सिडी एकमुश्त नहीं देगी। इसे अलग-अलग चरणों में जारी किया जाएगा और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्लांट का इस्तेमाल सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम स्तर तक हो रहा है या नहीं। खान मंत्रालय के इस कदम से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन को भी नई रफ्तार मिलेगी।

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