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Snow Driving Guide: गाड़ियों में क्या होता है AWD, FWD और RWD ड्राइवट्रेन? पहाड़ों में सबसे बेहतर कौन?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Thu, 29 Jan 2026 04:57 PM IST
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सार

Snow Driving Guide: पहाड़ों में बर्फबारी का मजा जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक बर्फीली सड़कों पर ड्राइव करना भी हो सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपकी कार का ड्राइवट्रेन सिस्टम यानी RWD, FWD या AWD/4x4 बर्फ में कैसे काम करता है।

Snow Driving Guide: Which Drivetrain Is Safest on Icy Roads – RWD, FWD or AWD/4x4?
RWD, FWD or AWD/4x4 - फोटो : X
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विस्तार
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पहाड़ों में हो रही खूबसूरत बर्फबारी सैलानियों को खूब पसंद आ रही है। लेकिन इसके साथ एक परेशानी भी है सड़कों पर गाड़ियों का फिसलना। बर्फीली सड़कों पर गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है, इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि आपकी कार का ड्राइवट्रेन सिस्टम ऐसी हालत में कैसे काम करता है।

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भारतीय बाजार में मिलने वाली गाड़ियों को उनकी पावर और ड्राइव सिस्टम के आधार पर अलग-अलग प्रकार में बांटा जाता है। अगर आप बर्फ वाले इलाकों में जाने की सोच रहे हैं, तो यह जानना आपके लिए फायदेमंद होगा कि ड्राइवट्रेन कितने प्रकार के होते हैं और बर्फ में कौन-सी गाड़ी ज्यादा सुरक्षित और बेहतर रहती है।

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1. रियर व्हील ड्राइव (RWD) कारें

रियर व्हील ड्राइव कारों का प्रमुख उदाहरण महिंद्रा बोलेरो, थार, स्कॉर्पियो क्लासिक, टोयोटा फॉर्च्यूनर (4x2), इनोवा क्रिस्टा, टाटा हैरियर ईवी (बेस वेरिएंट) जैसी गाड़ियां हैं। बर्फबारी के दौरान इनका ड्राइवट्रेन सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें सारी ताकत पिछले पहियों को मिलती है जो गाड़ी को तेजी से आगे धकेलने के लिए तो अच्छा है लेकिन बर्फ पर यह गाड़ी को 'फिशटेल' (पीछे से डगमगाना) करा सकता है।

फंसने पर क्या करें?

अगर आपकी गाड़ी कीचड़ या रेत में फंस जाए तो सबसे पहले यह ध्यान रखें कि फंसने पर कभी भी बहुत ज्यादा एक्सीलरेटर न दबाएं, क्योंकि हल्का थ्रॉटल देना ही बेहतर होता है। ज्यादा जोर लगाने से पहिए एक ही जगह घूमकर और गहरे फंस सकते हैं। बेहतर ट्रैक्शन पाने के लिए अपने पहियों को बिल्कुल सीधा रखें ताकि टायर जमीन पर पकड़ बना सकें।

गाड़ी की ग्रिप बढ़ाने के लिए आप एक कारगर तरीका अपना सकते हैं। पिछले हिस्से पर सामान या यात्रियों का वजन बढ़ा दें, जिससे टायरों पर दबाव पड़ेगा और वे फिसलेंगे नहीं। इसके अलावा, टायर की हवा 5-8 PSI कम कर देने से टायर का जमीन से संपर्क बढ़ जाता है, जो बाहर निकलने में काफी मदद करता है। अगर फिर भी बात न बने, तो आप देसी जुगाड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, टायर के ठीक नीचे गाड़ी का मैट, कार्डबोर्ड या सूखी टहनियां रख दें, जिससे टायर को आगे बढ़ने के लिए जरूरी घर्षण मिल जाएगा।

2. AWD और 4x4 SUVs/क्रॉसओवर

ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) और 4x4 एसयूवी/क्रॉसओवर के उदाहरण मारुति ग्रैंड विटारा, हुंडई ट्यूसॉन, महिंद्रा XUV700, टाटा हैरियर ईवी AWD आदि हैं। 4x4 के उदाहरण महिंद्रा थार, मारुति जिम्नी, फोर्स गुरखा, टोयोटा फॉर्च्यूनर 4x4, लैंड रोवर डिफेंडर हैं। AWD (ऑल-व्हील ड्राइव) बर्फ के लिए सबसे संतुलित है क्योंकि यह जरूरत पड़ने पर चारों पहियों को पावर भेजता है। वहीं 4x4 सिस्टम में 2H, 4H और 4L मोड होते हैं। भारी बर्फ के लिए '4L' (4-लो) मोड सबसे शक्तिशाली होता है।

फंसने पर क्या करें?

बर्फ में गाड़ी फंसने की स्थिति में इन तकनीकी बातों का ध्यान रखकर आप सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं। सबसे पहले अपनी गाड़ी की क्षमता के अनुसार मोड का सही चुनाव करें। अगर बर्फ हल्की है तो 4H या स्नो मोड का इस्तेमाल करें, लेकिन गहरी बर्फ में 4L मोड ही सबसे ज्यादा कारगर होता है। यदि आपकी कार में सेंटर डिफरेंशियल लॉक की सुविधा है, तो उसे तुरंत ऑन कर दें ताकि सभी पहियों को बराबर ताकत मिल सके।

गाड़ी निकालते समय सबसे जरूरी है मोमेंटम बनाए रखना, पहियों को एक ही जगह तेजी से घुमाने के बजाय नियंत्रित गति के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ें। इन सब के साथ अपनी सुरक्षा का भी ख्याल रखें और एग्जॉस्ट पाइप को जरूर चेक करें। यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि साइलेंसर बर्फ में दबा न हो, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस केबिन के अंदर आ सकती है जो जानलेवा साबित हो सकती है।

3. फ्रंट व्हील ड्राइव (FWD) SUVs और हैचबैक

फ्रंट व्हील ड्राइव (FWD) गाड़ियों के प्रमुख उदाहरण टाटा पंच, नेक्सन, हुंडई वेन्यू, मारुति ब्रेजा, फ्रोंक्स, किआ सोनेट हैं। भारत में ज्यादातर कारें FWD होती हैं। इसमें इंजन का भार अगले पहियों पर होता है, जिससे उन्हें बर्फ पर RWD के मुकाबले बेहतर पकड़ मिलती है।

फंसने पर क्या करें?

अगर गाड़ी फंस जाए, तो उसे निकालने के लिए सही तकनीक का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए पहले गियर के बजाय दूसरे गियर या मैनुअल मोड का प्रयोग करें, ऐसा करने से टॉर्क कम रहेगा और पहिए अपनी जगह पर फिसलने के बजाय ग्रिप बना पाएंगे।

साथ ही, थोड़ी मेहनत करके पहियों के आसपास खुदाई करें और अगले टायरों के आगे-पीछे से बर्फ हटाकर रास्ता साफ कर लें ताकि गाड़ी को चलने के लिए जगह मिल सके। जब आप गाड़ी को बाहर निकालने की कोशिश करें, तो स्टीयरिंग को बिल्कुल सीधा रखें। याद रखें कि मुड़े हुए पहिए ज्यादा प्रतिरोध पैदा करते हैं, जिससे गाड़ी का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए जब तक गाड़ी ठीक से चलने न लगे, पहियों को सीधा रखना ही समझदारी है।

महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स

बर्फ में सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चाहे आपके पास किसी भी तरह की कार हो, सबसे पहले प्रिवेंटिव मेजर्स के तौर पर यह देखें कि क्या ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम (TCS) इंजन की पावर को बहुत ज्यादा कम कर रहा है, अगर ऐसा है, तो उसे अस्थायी रूप से बंद कर दें ताकि पहियों को जरूरी ताकत मिल सके। इसके अलावा, पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में जाते समय अपने साथ स्नो चेन या टायर क्लैट्स जैसे उपकरण जरूर रखें, जो आपात स्थिति में जीवनरक्षक साबित होते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि यदि कोशिशों के बावजूद गाड़ी अपनी जगह से हिल भी नहीं रही है, तो जबरदस्ती एक्सीलरेटर न दबाएं। ऐसा करने से टायर और गहराई में धंस सकते हैं, जिससे स्थिति और भी बिगड़ सकती है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि आप दूसरों की मदद लें या प्रोफेशनल टो-ट्रक बुलाएं।
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