भारत में सड़क हादसों की स्थिति बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गई है। वर्ष 2025 में देश भर में सड़क दुर्घटनाओं में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिनमें कुल 1,83,382 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। आंकड़ों के भयावह विश्लेषण को देखें तो भारत में 2025 के दौरान हर घंटे औसतन 21 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। जबकि रोजाना औसतन 502 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
Road Accidents: 2025 में भारत में सड़क हादसों ने ली 1.83 लाख से ज्यादा जानें, हर घंटे 21 लोगों की मौत
भारत में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। 2025 में देशभर में 5.13 लाख से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,83,382 लोगों की जान चली गई। यानी औसतन हर घंटे 21 लोगों और हर दिन 502 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई।
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सड़क हादसों के इन खौफनाक आंकड़ों का खुलासा किसने और कहां किया?
सड़क हादसों और मौतों से जुड़े इन बेहद गंभीर आंकड़ों की जानकारी आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार द्वारा पेश की गई है:
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संसद में लिखित जवाब: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान इन आंकड़ों का खुलासा किया।
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तमिलनाडु में सबसे ज्यादा हादसे: आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में सबसे अधिक 71,387 सड़क दुर्घटनाएं तमिलनाडु राज्य में दर्ज की गईं।
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उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें: दूसरी ओर, सड़क हादसों के कारण सबसे अधिक 27,550 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं।
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दोपहिया वाहनों की बड़ी हिस्सेदारी: भारत उन देशों में शामिल है जहां सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या चिंताजनक रूप से बहुत अधिक है। इन दुर्घटनाओं में अधिकांश मामले दोपहिया वाहनों से जुड़े होते हैं। हालांकि हादसों के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं।
सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए सरकार ने किस '4E' रणनीति का खुलासा किया?
संसद में इन आंकड़ों को साझा करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा की समस्या से निपटने के लिए चार स्तंभों पर आधारित एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसे '4E' का नाम दिया गया है:
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1. एजुकेशन (Education - शिक्षा व जागरूकता): वाहन चालकों और नागरिकों को यातायात नियमों व सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
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2. इंजीनियरिंग (Engineering - सड़कों व वाहनों की डिजाइन): इसके अंतर्गत सड़कों के बुनियादी ढांचे और वाहनों दोनों की इंजीनियरिंग व डिजाइन में सुधार करना शामिल है।
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3. एनफोर्समेंट (Enforcement - नियमों का कड़ाई से पालन): ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्ती से कार्रवाई करना और कानून का पालन सुनिश्चित कराना।
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4. इमरजेंसी केयर (Emergency Care - आपातकालीन देखभाल): हादसों के शिकार लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत करना।
पिछले वर्षों (2023 से 2025) में सड़क हादसों के आंकड़े कैसे बढ़ते गए?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर ही चढ़ा है:
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वर्ष 2023 के आंकड़े:
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कुल हादसे: भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,80,583 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं।
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मौतें और घायल: इन हादसों में 1,72,890 लोगों की मौत हुई थी और 4,62,825 लोग घायल हुए थे (जो कि 2022 की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि थी)।
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वर्ष 2024 के आंकड़े:
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कुल हादसे: 2023 की तुलना में 2024 में मामूली वार्षिक बढ़ोतरी के साथ कुल 4,87,707 सड़क हादसे दर्ज किए गए।
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मौतें और घायल: इन हादसों ने 1,77,175 लोगों की जान ली और 4,71,441 लोगों को घायल किया।
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वर्ष 2025 के आंकड़े (वर्तमान स्थिति):
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अब 2025 में, सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या (5,13,563 हादसे और 1,83,382 मौतें) 2024 के मुकाबले और भी अधिक बढ़ गई है।
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