Bihar Budget : बिहार बजट में क्या बदलेगी नीतीश कुमार सरकार? पेश होने से पहले जानें इसका प्रारूप
Bihar News : बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव मंगलवार को 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इसमें विभागों का बजट बहुत बदलने की उम्मीद नहीं है। जिन कारणों से बजट आवंटन पर असर पड़ेगा, वह सीएम नीतीश कुमार ने डेढ़ महीने पहले बता दिया था।
विस्तार
दिसंबर से ही बजट की तैयारी शुरू हुई थी
सीएम नीतीश कुमार बिहार के विकास की योजनाएं एक पैकेज के रूप में जारी करते रहे हैं। सात निश्चय एक और दो के तहत आधारभूत संरचनाओं के विकास पर फोकस किया गया था तो जब दिसंबर 2025 में नीतीश ने सात निश्चय-3 की घोषणा की तो उसमें रोजगार, उद्योग-उद्यम, उत्पादन, सुविधा और राज्य की छवि पर फोकस किया। बिहार विधानसभा में पेश होने जा रहा बजट इसी पर केंद्रित होगा। इसकी तैयारी राज्य में नई सरकार के गठन के एक महीने बाद तब ही शुरू हो गई थी, जब सीएम नीतीश कुमार ने सात निश्चय- 3 का एलान किया था।
बजट का पहला आधार, सात निश्चयों में पहला- रोजगार
सात निश्चय-3 का पहला निश्चय ‘दोगुना रोजगार- दोगुनी आय’ रखा गया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार सृजन ही रहा। लोगों के बीच चर्चा में यही था और सरकार को इसी पर घिरने का डर भी लग रहा था। 202 सीटों के साथ मजबूत सरकार में आते ही नीतीश कुमार ने राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना करने के लिए कई कार्यक्रमों एवं योजनाओं को लागू करने की जानकारी दी। साथ ही, बता दिया कि सात निश्चय-3 का पहला निश्चय ‘दोगुना रोजगार- दोगुनी आय’ रखा जाएगा। इसलिए, विभागों में नौकरियां और रोजगार सृजन के नाम पर इस बार का बजट आवंटन प्रमुख रूप से निर्भर होगा। महिलाओं को स्वरोजगार के लिए दिए 10-10 हजार और उसके बाद अब दो लाख रुपए की सहायता अगले चरण में देना इस बजट में पहली बार जुड़ा हुआ दिखेगा। रोजगार और स्वरोजगार के लिए बजट आवंटन स्पष्ट तौर पर दिखेगा।
बजट आवंटन का दूसरा आधार- उद्योग विस्तार
'अमर उजाला' से विशेष बातचीत में चुनाव से पहले जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि नई सरकार बिहार में उद्योगों पर बहुत बड़ा काम करेगी, जिसकी घोषणा जीत के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 के एलान में इसे दूसरे नंबर पर रखा था। उन्होंने ‘समृद्ध उद्योग- सशक्त बिहार’ का प्रण लेते हुए बिहार को पूर्वी भारत का नया प्रौद्योगिकी केंद्र (Tech Hub) बनाने, राज्य में विश्वस्तरीय कार्य स्थल (Work Place) तैयार करने और प्रतिष्ठित उद्यमियों व प्रतिभाशाली युवाओं को राज्य के अंदर उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही थी। इस दिशा में काम शुरू भी कर दिया गया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है। बजट में इस काम के लिए किन विभागों को क्या-क्या बजट मिलता है, यह देखना होगा। राज्य में गन्ना एवं कृषि प्रसंस्करण उद्योग पर सरकार अपना पूरा जोर पहले ही बता चुकी है। कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार को ध्यान में रखते हुए चौथे कृषि रोड मैप पर भी बजट आवंटन होगा। सात निश्चय में तीसरा नंबर कृषि को ही सीएम ने रखा था और इसकी योजनाएं भी बताई थीं।
शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर क्या संभावनाएं?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’ और ‘सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन’ को सात निश्चय-3 में प्रमुखता से जगह दी थी। यही कारण है कि इस बार उच्च और व्यावसायिक शिक्षा को लेकर बजट पर सभी का ध्यान है। इसके अलावा, प्रखंड स्तर पर विशिष्ट चिकित्सा केंद्रों तथा जिला स्तर पर अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (Super Speciality Hospital) के विकास के लिए बजट प्रावधान के आसार हैं।
सुविधाओं के लिए इस बजट में किसपर जोर
पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आमजन से सीधा सवाल किया था कि उन्हें सुचारू जीवन के लिए क्या सुविधाएं चाहिए। ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living) भले ही सात निश्चय में सातवें स्थान पर रखा गया है, लेकिन छठे निश्चय ‘मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार’ का उद्देश्य भी कुल मिलाकर वही है। सरकार इस बजट में शहरी क्षेत्रों के विस्तार एवं नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए योजनाबद्ध आवासन से लेकर एक्सप्रेस-वे तक के लिए बजट आवंटन करेगी। खेल और पर्यटन जैसे मनोरंजन के अलावा आम जनजीवन को आसान करने वाले उपायों पर भी बजट प्रावधान के आसार हैं।
किन दलों के पास क्या है मौजूदा बजट, यह देखें
बजट 2026-27 का आवंटन आज आएगा। इसके पहले यह जानना रोचक है कि 2024 में लौटी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के विभागों को बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नवंबर 2025 में नए मंत्रिपरिषद् में बांटा गया तो बहुत कुछ बदल गया। भारतीय जनता पार्टी और जदयू ने 20-20 विभाग अपने पास रखे। जदयू के विभागों का कुल बजट 138919 करोड़ है। भाजपा ने गृह विभाग लेकर वित्त विभाग जदयू के पास जाने दिया। इस कारण भी, उसका बजट कम है। भाजपा के 20 विभागों का कुल बजट अभी 81518 करोड़ के करीब है। मंत्रिपरिषद् में एक विभाग लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 11302 करोड़ का बजट मिल गया था। एक विभाग वाले हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के एक विभाग का बजट महज 1839 करोड़ है। लोजपा (रामविलास) के दो विभागों का बजट 2895 करोड़ है। बजट 2026-27 में बजट भले इधर-उधर हो, लेकिन बहुत अंतर नहीं आने की उम्मीद है क्योंकि विभागों में बदलाव नहीं हो रहा है।
