Bihar: बेतिया राज संपत्तियों के लिए नई नियमावली 2026 तैयार, अवैध कब्जों पर सख्ती; डिप्टी सीएम सिन्हा का एलान
बिहार सरकार ने बेतिया राज संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नई नियमावली बनाई है। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 1986 से पहले कब्जाधारियों को राहत मिलेगी, जबकि अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई कर संपत्तियों का जनहित में उपयोग किया जाएगा।
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बिहार सरकार ने ऐतिहासिक बेतिया राज की संपत्तियों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन संपत्तियों के सही प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग के लिए “बेतिया राज संपत्ति नियमावली, 2026” का ड्राफ्ट तैयार किया है। यह नियमावली “बेतिया राज संपत्ति अधिनियम, 2024” को लागू करने के लिए बनाई गई है, ताकि वर्षों से बिखरी और विवादित संपत्तियों को व्यवस्थित किया जा सके।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि बेतिया राज की सभी चल और अचल संपत्तियाँ, चाहे वे बिहार के अंदर हों या बाहर, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार के नियंत्रण में लिया जाएगा। इसका उद्देश्य इन संपत्तियों की सुरक्षा करना, उनका सही प्रबंधन सुनिश्चित करना और उन्हें जनहित में उपयोग करना है।
उन्होंने कहा कि इस नई नियमावली में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और स्पष्ट बनाया गया है। नियमावली अधिनियम की धारा-17 के तहत तैयार की गई है, जिसमें संपत्तियों से जुड़े विवादों के निपटान, कब्जा लेने की प्रक्रिया, संपत्तियों का वर्गीकरण, प्रबंधन, निपटान, अपील और पुनरीक्षण जैसी सभी महत्वपूर्ण बातें विस्तार से शामिल की गई हैं। इससे अब बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़े मामलों में कानूनी अस्पष्टता खत्म होगी और प्रक्रिया साफ-सुथरी होगी।
सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद सभी संबंधित संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति या पक्ष को कोई आपत्ति है, तो वह 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इन आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ दी जाएंगी। ये अधिकारी अधिकतम 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे, ताकि प्रक्रिया लंबित न रहे।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि यदि तय समय के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती है या दर्ज आपत्तियों को खारिज कर दिया जाता है, तो संबंधित जिले के समाहर्ता (डीएम) उन संपत्तियों पर प्रभावी कब्जा लेने की कार्रवाई करेंगे। कब्जा लेने के बाद संपत्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इनमें ऐतिहासिक और विरासत संपत्तियाँ, पहले से सरकारी उपयोग में चल रही संपत्तियाँ, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली संपत्तियाँ और बिना किसी वैध दस्तावेज के कब्जे वाली संपत्तियाँ शामिल होंगी।
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सरकार ने लंबे समय से रह रहे लोगों को भी राहत देने का प्रावधान रखा है। नियमावली के अनुसार, 40 साल या उससे अधिक समय से किसी संपत्ति पर रह रहे लोगों को विशेष छूट दी जाएगी। इसके लिए 1 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तारीख तय की गई है। जो लोग इस तारीख से पहले से कब्जे में हैं और उनके पास वैध कागजात हैं, उन्हें निर्धारित राशि देकर उस संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व हासिल करने का अवसर मिलेगा।
वहीं, 1 जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अतिक्रमणकारियों के निर्माण को जब्त (कब्जे में) किया जा सकता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी। जिन लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं होगा या लंबे समय तक कब्जे का कोई प्रमाण नहीं मिलेगा, उन्हें अवैध कब्जाधारी माना जाएगा और बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत उन्हें हटाया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बेतिया राज की कई संपत्तियाँ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन विरासत संपत्तियों को संरक्षित करने के लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की मदद ली जाएगी, ताकि उनकी मूल पहचान और महत्व को सुरक्षित रखा जा सके।
सरकार का कहना है कि इस नियमावली के लागू होने से बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, कानूनी व्यवस्था मजबूत होगी और इन बहुमूल्य संपत्तियों का उपयोग जनहित और विकास कार्यों में बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी जरूरी तैयारियाँ समय पर पूरी करें, ताकि इस नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और राज्य की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।