Bihar: सारंडा में नक्सलियों के दांत खट्टे कर लौट रहे CRPF जवान की मौत, बेटे ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि
सीआरपीएफ में तैनात बिहार के औरंगाबाद जिले के एक और वीर सपूत राकेश कुमार नक्सल विरोधी अभियान में देश की रक्षा करते हुए झारखंड के सारंडा जंगल में शहीद हो गए। पार्थिव शरीर के पैतृक गांव आते ही अंतिम विदाई के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी।
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बिहार के औरंगाबाद जिले के एक और वीर सपूत राकेश कुमार नक्सल विरोधी अभियान के दौरान देश की रक्षा करते हुए झारखंड के सारंडा जंगल में शहीद हो गए। वे सीआरपीएफ की 210 कोबरा बटालियन में तैनात थे।
तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जैसे ही पैतृक गांव हसपुरा थाना क्षेत्र के धमनी टोले शाम्भो गांव पहुंचा, वैसे ही हजारों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। सिर्फ गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से वीर जवान को श्रद्धांजलि दी। पूरा वातावरण “वीर शहीद अमर रहे”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से गूंज उठा।
4 साल के बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि, भावुक हुआ माहौल
मौत को लेकर परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
शहीद की मौत को लेकर परिजनों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पत्नी पिंकी कुमारी ने बताया कि पहले उन्हें फोन पर बताया गया कि पेड़ गिरने से राकेश घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। लेकिन बाद में उनकी मौत की खबर मिली। अधिकारियों के अनुसार, झारखंड के चाईबासा स्थित सारंडा जंगल में बाबू डेरा कैंप के पास नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आए आंधी-तूफान में पेड़ गिरने से वे घायल हुए थे, जिसके बाद रांची के एक निजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
वहीं, शहीद के भाई विक्रम कुमार ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि राकेश की मौत गोली लगने से हुई है। उन्होंने कहा कि शरीर पर अन्य चोट के निशान नहीं हैं, जबकि सिर पर गहरा घाव है, जिससे गोली लगने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि, मौत पर अलग-अलग दावे
गोह के विधायक अमरेंद्र कुशवाहा ने शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश ने एक बहादुर जवान खो दिया है और उनकी शहादत पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। वहीं, पूर्व विधायक और भाजपा नेता डॉ. रणविजय कुमार ने दावा किया कि राकेश की मौत नक्सलियों की गोली से हुई है और सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि नक्सली भले कमजोर हुए हों, लेकिन अब भी छिपकर जवानों को निशाना बना रहे हैं।
कर्तव्यनिष्ठ और बहादुर जवान थे राकेश कुमार
राकेश कुमार सीआरपीएफ की 210 कोबरा बटालियन के जांबाज जवान थे। वे करीब एक महीने पहले होली की छुट्टी बिताकर 5 मार्च को ड्यूटी पर लौटे थे। हाल ही में उन्होंने नक्सल विरोधी अभियान में तीन नक्सलियों को मार गिराया था, जिसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया था और उनका प्रमोशन भी हुआ था। उन्होंने वर्ष 2012 में सीआरपीएफ जॉइन किया था और 2014 में उनकी शादी पिंकी कुमारी से हुई थी। परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां और एक बेटा हैं। उनके शहीद होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इलाके में शोक, लेकिन शहादत पर गर्व
एक ओर पूरे इलाके में शोक की लहर है, वहीं लोगों के दिलों में अपने इस वीर सपूत की शहादत पर गर्व भी है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीआरपीएफ की टुकड़ी ने शहीद को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। बच्चों द्वारा पिता को मुखाग्नि देने का दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।