Bihar News: लालू के सांसद सुधाकर सिंह ने अब किस मुद्दे पर सीएम सम्राट चौधरी पर बोला हमला, पत्र लिखकर पूछा सवाल
Bihar Politics: राजद सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम खुला पत्र जारी कर पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना, किसानों की जमीन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। आइए जानते हैं पूरा मामला...
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राष्ट्रीय जनता दल के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने एक बार फिर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला है। रविवार को उन्होंने सुधाकर सिंह ने पत्र में दावा करते हुए लिखा कि तीन जुलाई को किसानों के साथ चंपारण दौरे के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि पूर्वी चंपारण में करीब 95 वर्षों से किसानों के कब्जे और जमाबंदी वाली जमीन को महज 85 दिनों में रद्द कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 जून को जमीन की नापी कराई गई और अगले ही दिन निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि किसानों की खेती वाली जमीन पर मनोरंजन के लिए वाटर पार्क बनवाने वाले अधिकारियों को राष्ट्रपति पुरस्कार या भारत रत्न तक देने पर विचार किया जाना चाहिए।
कृत्रिम वाटर पार्क बनाना अन्याय
राजद सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य का ठेका भले ही कागजों पर किसी कंपनी को दिया गया हो, लेकिन काम अधिकारियों के करीबी लोगों और रिश्तेदारों से कराया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही। सुधाकर सिंह ने पत्र में सरकार की विकास प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मोतिहारी में पहले से विशाल मोतीझील मौजूद है, ऐसे में किसानों की उपजाऊ जमीन पर कृत्रिम वाटर पार्क बनाना अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खेती की जमीन की कीमत पर मनोरंजन परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है।
अपने ऊपर प्राथमिकी को लेकर क्या बोले?
सांसद ने मोतिहारी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान सभा के बाद उनके और अन्य साथियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई तथ्यात्मक, व्याकरणिक और कानूनी त्रुटियां हैं। उनका आरोप है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में प्राथमिकी किसी सरकारी अधिकारी की ओर से दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन आवेदन किसी अन्य व्यक्ति के नाम से कराया गया। सुधाकर सिंह ने एफआईआर में लगाए गए 35 हजार रुपये छीनने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था, वहां यदि ऐसी घटना हुई होती तो उसका कोई वीडियो या अन्य साक्ष्य सामने आता। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया। पत्र के अंत में राजद सांसद ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले पर संज्ञान लेने, भूमि अधिग्रहण और एफआईआर की निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।