Bihar: उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री नहीं रहेंगे? विधान परिषद् में इस बार नहीं तो क्या बचा विकल्प
Bihar MLC Election : बिहार विधान परिषद् की नौ सीटों पर चुनाव और एक पर उप चुनाव के लिए आज नामांकन का अंतिम दिन है। एनडीए के नौ पहले से घोषित प्रत्याशियों के नामांकन की तैयारी है। मतलब, दीपक प्रकाश विधान परिषद् नहीं जा रहे। तो क्या मंत्री की कुर्सी छिनेगी?
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बिहार में राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र एक बार फिर उपेंद्र कुशवाहा बनने वाले हैं। वह एनडीए की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहते हुए इस्तीफा देकर निकले थे। इसी तरह का संबंध नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड के साथ भी बनता-बिगड़ता-बनता रहा है। अब एक बार फिर वैसी परिस्थिति बनने की आशंका है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने उनके बेटे और बिहार सरकार में छह महीने के अंदर दूसरी बार मंत्री बने दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद् का रास्ता नहीं खोला। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को तब चर्चा में आए थे, जब विधानसभा चुनाव में जीते राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायकों में से किसी को मौका नहीं देकर दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
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दीपक प्रकाश के पास अब कितना वक्त बचा?
दीपक प्रकाश पहली बार मंत्री बने 20 नवंबर 2025 को। वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में छह महीने के अंदर उन्हें कम-से-कम विधान परिषद् की सदस्यता तो हासिल करनी ही थी। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही 14 अप्रैल को मंत्रिपरिषद् विघटित हो गई। इस हिसाब से देखा जाए तो 20 मई तक उन्हें सदस्य बनना था। इसके पहले सरकार गिर गई। फिर जब नई सरकार 15 अप्रैल को बनी तो 20 मई का वक्त निकल चुका है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कुछ होना था तो 20 मई तक हो गया रहता, इसका मतलब है कि 15 अप्रैल 2026 से दीपक प्रकाश के लिए छह महीने की गणना होगी। इस हिसाब से उनके पास अब भी करीब साढ़े चार महीने का वक्त है।
'छह महीने का कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता'
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अरविंद कुमार के अनुसार एसपी चौधरी बनाम पंजाब सरकार के 2001 के एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने व्याख्या दी है कि किसी भी कीमत पर छह महीने का कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता है। चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि अगर सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले पर चला जाए तो मंत्री पद की शपथ के छह महीने के पहले सरकार ही गिर गई, इसलिए वह नियम लागू होकर रह गया। अब वही नियम नए मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद दीपक प्रकाश के लिए लागू हुआ है और उस हिसाब से सात मई को शपथ लेने वाले दीपक प्रकाश छह महीने का अब भी वक्त है। अगर यह वक्त नहीं होता तो 20 मई को उनसे इस्तीफा ले लिया गया होता।
ऊहापोह की स्थिति में उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली निकल रहे हैं
इधर बिहार में बेटे दीपक प्रकाश को लेकर मीडिया के अंदर ऊहापोह की स्थिति बन रही है और उधर उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली निकल रहे हैं। 'अमर उजाला' ने आज जब कुशवाहा के पास संपर्क किया तो इस संबंध में बात नहीं हुई। पता चला कि वह दिल्ली जा रहे हैं और दीपक प्रकाश को लेकर निश्चिंत हैं। कुशवाहा के करीबियों ने कहा कि पांच महीने के अंदर बिहार विधान परिषद् का विकल्प है या फिर पटना की बांकीपुर सीट पर भी भाजपा को फैसला करना बाकी है।