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Bihar: प्रिंटिंग प्रेस के नाम पर लिया 19 लाख का बिजनेस लोन, दुरुपयोग और गबन के आरोप में जनसुराज नेता गिरफ्तार

Tue, 28 Jul 2026 12:30 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Tue, 28 Jul 2026 12:30 PM IST
सार

समस्तीपुर में एसबीआई की काशीपुर शाखा से वर्ष 2018 में 19.28 लाख रुपये का व्यवसायिक ऋण लेकर उसके कथित दुरुपयोग और बैंक से धोखाधड़ी के मामले में जनसुराज नेता आशुतोष कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वर्ष 2022 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हुई कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।

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Bihar Jan Suraaj Leader Arrested for 19 Lakh Loan Fraud and Misappropriation
भारतीय स्टेट बैंक काशीपुर शाखा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

समस्तीपुर जिले के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की काशीपुर शाखा से व्यवसायिक ऋण लेकर उसके कथित दुरुपयोग और बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में समस्तीपुर पुलिस ने जनसुराज नेता आशुतोष कुमार को गिरफ्तार किया है। करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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2018 में प्रिंटिंग प्रेस के नाम पर लिया था व्यवसायिक ऋण
गिरफ्तार आरोपी की पहचान समस्तीपुर नगर थाना क्षेत्र के मुसापुर वार्ड-6 निवासी विश्वनाथ ठाकुर के पुत्र आशुतोष कुमार के रूप में हुई है। वह जनसुराज से जुड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, आशुतोष कुमार ने वर्ष 2018 में ओंकार प्रिंटिंग प्रेस के नाम पर एसबीआई की काशीपुर शाखा से 19 लाख 28 हजार 500 रुपये का व्यवसायिक ऋण लिया था।
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किस्तों का भुगतान नहीं, ऋण खाता एनपीए घोषित
बैंक का आरोप है कि ऋण लेने के बाद राशि का उपयोग स्वीकृत व्यवसायिक उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया। साथ ही समय पर किस्तों का भुगतान भी नहीं किया गया, जिसके कारण ऋण खाता एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित हो गया।
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बैंक के निरीक्षण में खुला पूरा मामला
एसबीआई काशीपुर शाखा के तत्कालीन उप प्रबंधक द्वारा वर्ष 2022 में नगर थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा गया था कि बैंक की ओर से किए गए स्थल निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि जिस उद्देश्य के लिए ऋण स्वीकृत किया गया था, उस कार्य में राशि का उपयोग नहीं किया गया। बैंक ने इसे धोखाधड़ी और ऋण राशि के गबन का मामला मानते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी।

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19.28 लाख का लोन, बकाया पहुंचा 20.06 लाख से अधिक
बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2018 में स्वीकृत 19,28,500 रुपये का व्यवसायिक ऋण अब बढ़कर 20,06,361 रुपये हो चुका है। बैंक का कहना है कि लगातार भुगतान नहीं होने से खाते को एनपीए घोषित करना पड़ा, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

थानाध्यक्ष बोले- कानून के मुताबिक होगी आगे की कार्रवाई
नगर थानाध्यक्ष अजित कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। मामले में पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
 
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