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Bihar: शराबबंदी वाले बिहार में 'मिनी फैक्ट्री'! दियारा में चल रही थीं 60 से अधिक अवैध भट्ठियां, कैसे खुला राज?
Tue, 28 Jul 2026 01:30 PM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 01:30 PM IST
सार
समस्तीपुर के मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के चापर-हरैल दियारा में एंटी लिकर टास्क फोर्स (एएलटीएफ) और स्थानीय पुलिस ने पांच घंटे तक चले मेगा ऑपरेशन में 60 से अधिक अवैध शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया।
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एंटी लिकर टास्क फोर्स की कार्रवाई
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के चापर-हरैल दियारांचल इलाके में शराब की मिनी फैक्ट्री के जखीरे पर सोमवार को एंटी लिकर टास्क फोर्स (एएलटीएफ) और स्थानीय पुलिस ने करीब पांच घंटे तक चले मेगा ऑपरेशन में 60 से अधिक अवैध शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया। बड़ी मात्रा में कच्चा जावा, ड्रम, चूल्हे और शराब बनाने के उपकरण नष्ट किए गए। पुलिस की इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही इलाके में 60 से अधिक अवैध भट्ठियां संचालित हो रही थीं, तब यह कारोबार आखिर किसकी नजरों से ओझल था? क्या यह अवैध नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था या हाल के दिनों में तेजी से फैला? पुलिस की इस कार्रवाई ने शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान शराब माफिया पुलिस की भनक लगते ही दियारा के दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर फरार हो गए।
दियारा बना था अवैध शराब का 'प्रोडक्शन हब'
जिला प्रशासन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर एएलटीएफ प्रभारी अफरोज अहमद के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चापर-हरैल दियारा की घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस के होश उड़ गए। दियारा का यह क्षेत्र अवैध शराब निर्माण का प्रोडक्शन हब बना हुआ था। झाड़ियों के बीच छिपाकर एक साथ दर्जनों शराब निर्माण की भट्ठियां बनाई गई थीं। लगभग पांच घंटे तक चले अभियान में एक-एक कर 60 से अधिक अवैध भट्ठियों को ध्वस्त किया गया। मौके पर मिले कच्चे जावा, ड्रम, चूल्हे और शराब निर्माण में प्रयुक्त अन्य उपकरणों को भी नष्ट कर दिया गया, ताकि दोबारा उत्पादन शुरू न हो सके।
एक दिन में 60 से अधिक भट्ठियों का मिलना खड़े कर रहा कई सवाल
समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर थाना से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित दियारांचल में एक साथ 60 से अधिक भट्ठियों का मिलना यह संकेत देता है कि अवैध शराब का कारोबार किसी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शराबबंदी वाले बिहार राज्य में इतना बड़ा नेटवर्क आखिर कब से सक्रिय था और इसकी भनक संबंधित पुलिस-प्रशासन को पहले क्यों नहीं लगी? पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई है और आगे भी अभियान लगातार जारी रहेगा।
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दियारा इलाके में वर्षों से संचालित थी शराब की मिनी फैक्ट्री
ग्रामीण हलकों में यह चर्चा लंबे समय से होती रही है कि मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चापर-हरैल सहित अन्य दियारा इलाकों में वर्षों से शराब निर्माण का धंधा फल-फूल रहा है। इन इलाकों में शराब की मिनी फैक्ट्री बड़े पैमाने पर संचालित होती रही है। दुर्गम रास्तों और झाड़ियों के बीच शराब का निर्माण और उसकी तस्करी पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से जारी रही। बावजूद इसके, इतनी बड़ी गतिविधि पर पुलिस की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी? यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही इलाके में 60 से अधिक अवैध भट्ठियां संचालित हो रही थीं, तब यह कारोबार आखिर किसकी नजरों से ओझल था? क्या यह अवैध नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था या हाल के दिनों में तेजी से फैला? पुलिस की इस कार्रवाई ने शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर नई बहस छेड़ दी है।
ये भी पढ़ें- सदर अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद बवाल, परिजनों का गुस्सा फूटा; अस्पताल में हुई जमकर तोड़फोड़
शराबबंदी की निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे ऑपरेशन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि शराबबंदी वाले राज्य में इतने बड़े पैमाने पर अवैध शराब का उत्पादन आखिर कैसे चलता रहा? यदि एक ही अभियान में 60 से अधिक भट्ठियां मिल सकती हैं, तो क्या यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय नहीं था? और यदि था, तो इसकी जानकारी संबंधित तंत्र तक पहले क्यों नहीं पहुंची? यही कारण है कि यह कार्रवाई केवल भट्ठियां ध्वस्त करने तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि शराबबंदी कानून की निगरानी व्यवस्था और उसके जमीनी क्रियान्वयन पर भी गंभीर बहस छेड़ गई है।
'शराब माफियाओं को किसी कीमत पर नहीं बख्शेंगे'
एएलटीएफ प्रभारी अफरोज अहमद ने कहा कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अवैध शराब के कारोबार की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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दियारा बना था अवैध शराब का 'प्रोडक्शन हब'
जिला प्रशासन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर एएलटीएफ प्रभारी अफरोज अहमद के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चापर-हरैल दियारा की घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस के होश उड़ गए। दियारा का यह क्षेत्र अवैध शराब निर्माण का प्रोडक्शन हब बना हुआ था। झाड़ियों के बीच छिपाकर एक साथ दर्जनों शराब निर्माण की भट्ठियां बनाई गई थीं। लगभग पांच घंटे तक चले अभियान में एक-एक कर 60 से अधिक अवैध भट्ठियों को ध्वस्त किया गया। मौके पर मिले कच्चे जावा, ड्रम, चूल्हे और शराब निर्माण में प्रयुक्त अन्य उपकरणों को भी नष्ट कर दिया गया, ताकि दोबारा उत्पादन शुरू न हो सके।
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एक दिन में 60 से अधिक भट्ठियों का मिलना खड़े कर रहा कई सवाल
समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर थाना से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित दियारांचल में एक साथ 60 से अधिक भट्ठियों का मिलना यह संकेत देता है कि अवैध शराब का कारोबार किसी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शराबबंदी वाले बिहार राज्य में इतना बड़ा नेटवर्क आखिर कब से सक्रिय था और इसकी भनक संबंधित पुलिस-प्रशासन को पहले क्यों नहीं लगी? पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई है और आगे भी अभियान लगातार जारी रहेगा।
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दियारा इलाके में वर्षों से संचालित थी शराब की मिनी फैक्ट्री
ग्रामीण हलकों में यह चर्चा लंबे समय से होती रही है कि मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चापर-हरैल सहित अन्य दियारा इलाकों में वर्षों से शराब निर्माण का धंधा फल-फूल रहा है। इन इलाकों में शराब की मिनी फैक्ट्री बड़े पैमाने पर संचालित होती रही है। दुर्गम रास्तों और झाड़ियों के बीच शराब का निर्माण और उसकी तस्करी पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से जारी रही। बावजूद इसके, इतनी बड़ी गतिविधि पर पुलिस की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी? यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही इलाके में 60 से अधिक अवैध भट्ठियां संचालित हो रही थीं, तब यह कारोबार आखिर किसकी नजरों से ओझल था? क्या यह अवैध नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था या हाल के दिनों में तेजी से फैला? पुलिस की इस कार्रवाई ने शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर नई बहस छेड़ दी है।
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शराबबंदी की निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे ऑपरेशन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि शराबबंदी वाले राज्य में इतने बड़े पैमाने पर अवैध शराब का उत्पादन आखिर कैसे चलता रहा? यदि एक ही अभियान में 60 से अधिक भट्ठियां मिल सकती हैं, तो क्या यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय नहीं था? और यदि था, तो इसकी जानकारी संबंधित तंत्र तक पहले क्यों नहीं पहुंची? यही कारण है कि यह कार्रवाई केवल भट्ठियां ध्वस्त करने तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि शराबबंदी कानून की निगरानी व्यवस्था और उसके जमीनी क्रियान्वयन पर भी गंभीर बहस छेड़ गई है।
'शराब माफियाओं को किसी कीमत पर नहीं बख्शेंगे'
एएलटीएफ प्रभारी अफरोज अहमद ने कहा कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अवैध शराब के कारोबार की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।