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Bihar: नागपंचमी से पहले प्रशासन का बड़ा एक्शन, सपेरों के ठिकानों पर छापेमारी; कैद से मुक्त हुए दर्जनों सांप
Mon, 27 Jul 2026 09:20 AM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 09:20 AM IST
सार
समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड में नागपंचमी से पहले सांपों के अवैध प्रदर्शन की आशंका पर जिला प्रशासन ने रविवार को विशेष अभियान चलाया। वन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सपेरों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर लवनी, घड़ों और अन्य बर्तनों में कथित तौर पर कैद दर्जनों सांपों को मुक्त कराया।
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प्रशासन का बड़ा प्रहार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नागपंचमी से पहले समस्तीपुर के विभूतिपुर प्रखंड में कथित तौर पर सांपों को पकड़कर कैद किए जाने की शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने रविवार को बड़ा अभियान चलाया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा के निर्देश पर वन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सपेरों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर लवनी, मिट्टी के घड़ों और अन्य बर्तनों में कथित रूप से कैद दर्जनों सांपों को मुक्त कराया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आस्था की आड़ में संरक्षित वन्यजीवों को पकड़ना, कैद करना या उनका प्रदर्शन करना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नागपंचमी से पहले 'नागों की कैद' की शिकायतों पर कार्रवाई
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि नागपंचमी पर प्रदर्शन के लिए विभूतिपुर क्षेत्र में कई जगहों पर पहले से ही सांपों को पकड़कर कैद किया जा रहा है। इन शिकायतों के बाद मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित खबरों पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने अभियान चलाया। विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर कई जगहों पर छापेमारी की गई और दर्जनों सांपों को कथित कैद से मुक्त कराया गया।
इन इलाकों में होता रहा है सांपों का प्रदर्शन
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, माधोपुर, महावीर गाछी, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया, खदियाही, गंगौली पुल और देसरी समेत बूढ़ी गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में नागपंचमी के अवसर पर वर्षों से सांपों के प्रदर्शन की परंपरा रही है। इसी को देखते हुए इस बार इन संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी और छापेमारी अभियान चलाया गया।
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लवनी और घड़ों में कथित रूप से कैद रखे गए थे सांप
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप था कि नागपंचमी से कई दिन पहले कोबरा, करैत, धामन समेत अन्य प्रजातियों के सांपों को खेतों और झाड़ियों से पकड़ लिया जाता है। इसके बाद उन्हें लवनी, मिट्टी के घड़ों, टीन या प्लास्टिक के डिब्बों तथा बोरों में बंद कर रखा जाता है, ताकि नागपंचमी के दिन मेलों और धार्मिक आयोजनों में उनका प्रदर्शन किया जा सके।
'करतब' के नाम पर क्रूरता नहीं होगी बर्दाश्त
छापेमारी अभियान के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सांपों के दांत तोड़ना, विष ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाना, उनका मुंह सिलना या जबरन दूध पिलाना अमानवीय कृत्य है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था की आड़ में वन्यजीवों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन की निगरानी में एक दर्जन सपेरे
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के करीब एक दर्जन सपेरों की पहचान कर उन्हें निगरानी सूची में रखा गया है। नागपंचमी तक इन पर विशेष नजर रखी जाएगी। किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
सात साल तक की सजा, सीधे होगी एफआईआर
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सांपों को पकड़ना, कैद करना, खरीदना-बेचना या सार्वजनिक प्रदर्शन कराना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। ऐसे मामलों में सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
ये भी पढ़ें- सड़क नहीं तो खेत सही, डिप्टी CM के क्षेत्र में जर्जर रोड पर ग्रामीणों ने रोपी धान, पूरे बिहार में चर्चा
आस्था के नाम पर वन्यजीवों के शोषण को न दें बढ़ावा
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे आस्था के नाम पर वन्यजीवों के शोषण को बढ़ावा न दें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो सपेरों को बुलाने के बजाय वन विभाग, स्थानीय पुलिस या डायल-112 पर सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से सांप का बचाव कर सके।
पिछले वर्ष भी दर्ज हुई थी प्राथमिकी
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी विभूतिपुर क्षेत्र में इसी तरह की कार्रवाई के दौरान भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत कई लोगों के खिलाफ गैर-जमानती प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आस्था का सम्मान, कानून से समझौता नहीं
छापेमारी अभियान के जरिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नागपंचमी पर आस्था का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून और वन्यजीव संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
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नागपंचमी से पहले 'नागों की कैद' की शिकायतों पर कार्रवाई
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि नागपंचमी पर प्रदर्शन के लिए विभूतिपुर क्षेत्र में कई जगहों पर पहले से ही सांपों को पकड़कर कैद किया जा रहा है। इन शिकायतों के बाद मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित खबरों पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने अभियान चलाया। विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर कई जगहों पर छापेमारी की गई और दर्जनों सांपों को कथित कैद से मुक्त कराया गया।
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इन इलाकों में होता रहा है सांपों का प्रदर्शन
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, माधोपुर, महावीर गाछी, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया, खदियाही, गंगौली पुल और देसरी समेत बूढ़ी गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में नागपंचमी के अवसर पर वर्षों से सांपों के प्रदर्शन की परंपरा रही है। इसी को देखते हुए इस बार इन संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी और छापेमारी अभियान चलाया गया।
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लवनी और घड़ों में कथित रूप से कैद रखे गए थे सांप
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप था कि नागपंचमी से कई दिन पहले कोबरा, करैत, धामन समेत अन्य प्रजातियों के सांपों को खेतों और झाड़ियों से पकड़ लिया जाता है। इसके बाद उन्हें लवनी, मिट्टी के घड़ों, टीन या प्लास्टिक के डिब्बों तथा बोरों में बंद कर रखा जाता है, ताकि नागपंचमी के दिन मेलों और धार्मिक आयोजनों में उनका प्रदर्शन किया जा सके।
'करतब' के नाम पर क्रूरता नहीं होगी बर्दाश्त
छापेमारी अभियान के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सांपों के दांत तोड़ना, विष ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाना, उनका मुंह सिलना या जबरन दूध पिलाना अमानवीय कृत्य है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था की आड़ में वन्यजीवों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन की निगरानी में एक दर्जन सपेरे
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के करीब एक दर्जन सपेरों की पहचान कर उन्हें निगरानी सूची में रखा गया है। नागपंचमी तक इन पर विशेष नजर रखी जाएगी। किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
सात साल तक की सजा, सीधे होगी एफआईआर
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सांपों को पकड़ना, कैद करना, खरीदना-बेचना या सार्वजनिक प्रदर्शन कराना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। ऐसे मामलों में सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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आस्था के नाम पर वन्यजीवों के शोषण को न दें बढ़ावा
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे आस्था के नाम पर वन्यजीवों के शोषण को बढ़ावा न दें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो सपेरों को बुलाने के बजाय वन विभाग, स्थानीय पुलिस या डायल-112 पर सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से सांप का बचाव कर सके।
पिछले वर्ष भी दर्ज हुई थी प्राथमिकी
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी विभूतिपुर क्षेत्र में इसी तरह की कार्रवाई के दौरान भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत कई लोगों के खिलाफ गैर-जमानती प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आस्था का सम्मान, कानून से समझौता नहीं
छापेमारी अभियान के जरिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नागपंचमी पर आस्था का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून और वन्यजीव संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।