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Bihar: 'नई नस्लें बगावत जानती हैं', युवा शायर अक्स की नज़्म बनी छात्र आंदोलन की आवाज; राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

Mon, 27 Jul 2026 07:46 AM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Mon, 27 Jul 2026 07:46 AM IST
सार

समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड के नरहन गांव निवासी युवा शायर 'अक्स समस्तीपुरी' द्वारा करीब पांच वर्ष पहले लिखी गई एक नज़्म 'हकों की ये हिफाजत जानती हैं, नई नस्लें बगावत जानती हैं" की पंक्तियों ने उन्हें राष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान दिला दी है।

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Bihar Poet Aks Samastipuri Gains National Fame as Nazm Becomes Anthem for Student Protests
युवा शायर 'अक्स समस्तीपुरी' - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड के नरहन गांव निवासी युवा शायर 'अक्स समस्तीपुरी' द्वारा करीब पांच वर्ष पहले लिखी गई एक नज़्म 'हकों की ये हिफाजत जानती हैं, नई नस्लें बगावत जानती हैं...' की पंक्तियों ने उन्हें राष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान दिला दी है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू होकर देशभर में चले छात्र आंदोलन के दौरान यह नज़्म आंदोलनकारियों और उनके समर्थकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई। सोशल मीडिया, राजनीतिक मंचों और राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर लगातार गूंजती रही यह नज़्म न केवल आंदोलन का प्रतीक बन गई, बल्कि आंदोलनकारियों को नया संबल भी प्रदान किया।
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दिल्ली से देशभर तक गूंजी समस्तीपुर के शायर की आवाज
समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत नरहन गांव निवासी युवा शायर अक्स समस्तीपुरी की लिखी यह नज़्म छात्र आंदोलन की आवाज बन गई। हालिया देशव्यापी छात्र आंदोलनों के दौरान जब हजारों छात्र शिक्षा व्यवस्था और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे, तब कई नारों के बीच एक नज़्म सबसे अधिक चर्चा में रही-'हकों की ये हिफाजत जानती हैं, नई नस्लें बगावत जानती हैं...'। इन पंक्तियों ने आंदोलनकारी छात्रों के तेवर और भावनाओं को शब्द दिए। देखते ही देखते यह नज़्म सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श और टीवी स्टूडियो तक पहुंच गई। छात्र-युवा संगठनों ने इसे आंदोलन की पहचान बना लिया।
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राजनीतिक गलियारों और टीवी डिबेट तक पहुंची नज़्म
इस नज़्म को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने सोशल मीडिया मंच से साझा किया। समाजवादी पार्टी के विधायक इंजीनियर सचिन यादव, राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व मंत्री एवं विधायक मोहम्मद इजरायल मंसूरी तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने राष्ट्रीय समाचार चैनलों की बहस में इन पंक्तियों का उल्लेख किया। राजस्थान कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी इसे साझा किया गया। इसके बाद हजारों छात्रों, युवाओं और छात्र संगठनों ने इसे अपने पोस्टरों, भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा बनाया।
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पांच साल पहले लिखी गई थी यह नज़्म
इन चर्चित पंक्तियों के रचनाकार समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत छोटी बोरिया (नरहन) निवासी युवा शायर अक्स समस्तीपुरी हैं। उन्होंने यह नज़्म करीब पांच वर्ष पहले लिखी थी। साहित्यिक मंचों पर उनकी पहचान पहले से थी, लेकिन हालिया छात्र आंदोलन के दौरान वायरल हुई उनकी इस रचना ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला दी।

बड़े मंचों पर पहले भी बिखेर चुके हैं अपनी शायरी का जादू
अक्स समस्तीपुरी देश के कई प्रतिष्ठित कवि सम्मेलनों, मुशायरों और साहित्यिक आयोजनों में अपनी रचनाओं का पाठ कर चुके हैं। उन्होंने कई नामचीन शायरों और साहित्यकारों के साथ मंच साझा किया है। साहित्यिक जगत में उनकी पहचान पहले से थी, लेकिन छात्र आंदोलन के दौरान उनकी नज़्म ने उन्हें आम जनमानस तक पहुंचाकर नई पहचान दिला दी।

वायरल नज़्म के बाद मिली राष्ट्रीय पहचान
छात्र आंदोलन के दौरान जब यह नज़्म लगातार सोशल मीडिया, टीवी डिबेट और राजनीतिक मंचों पर सुनाई देने लगी, तो बड़ी संख्या में लोगों ने इसके रचनाकार की तलाश शुरू की। इसके बाद यह सामने आया कि इस चर्चित नज़्म के लेखक समस्तीपुर के युवा शायर अक्स समस्तीपुरी हैं। इसके बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिलने लगीं और उनकी व्यापक सराहना हुई।

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मिला नया आयाम, समस्तीपुर के लिए गौरव का क्षण
अक्स समस्तीपुरी की इस उपलब्धि पर समस्तीपुर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने खुशी जताई है। साहित्यकार शिव नारायण पाण्डेय, चांद मुसाफिर, सीताराम शेरपुरी, अश्वनी कुमार आलोक, गणेश गिरि कवि, माकपा विधायक अजय कुमार, प्रखंड प्रमुख सुनीता देवी, पूर्व प्राचार्य प्रो. राम बहादुर सिंह, डॉ. दिनेश राम, साहित्यकार राजाराम महतो, दिवाकर दिव्यंक, किसान सलाहकार प्रेमचंद सिंह, पूर्व मुखिया मनीषा देवी, समाजसेवी कृष्णदेव प्रसाद सिंह, प्रखंड मुखिया संघ अध्यक्ष रंजीत कुमार महतो सहित अनेक लोगों ने इसे समस्तीपुर के लिए गर्व का विषय बताया है।

समस्तीपुर से उठी आवाज, राष्ट्रीय विमर्श का बनी हिस्सा
विभूतिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय छात्र आंदोलन की आवाज बन जाना अक्स समस्तीपुरी की साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उनकी नज़्म ने यह साबित किया है कि प्रभावशाली शब्द केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय आने पर जनभावनाओं की अभिव्यक्ति और सामाजिक विमर्श का माध्यम भी बन जाते हैं। आज 'नई नस्लें बगावत जानती हैं' सिर्फ एक नज़्म की पंक्ति नहीं, बल्कि देशभर के छात्र आंदोलन का चर्चित प्रतीक बन चुकी है।
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