Bihar: नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले गया, जबरन की शादी, एक साल में आया फैसला, आरोपी को 20 साल की सजा
बिहार के औरंगाबाद में नाबालिग लड़की का अपहरण कर उससे जबरन शादी करने वाले आरोपी को स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने 20 साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को एक लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
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बिहार के औरंगाबाद में नाबालिग लड़की का अपहरण कर उससे जबरन शादी करने वाले आरोपी को स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। घटना के करीब एक साल बाद अदालत ने आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास और कुल 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। साथ ही पीड़िता को बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत एक लाख रुपये मुआवजा दिलाने का भी आदेश दिया गया है।
पोक्सो कोर्ट का फैसला, 20 साल की सश्रम कैद
स्पेशल पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश लक्ष्मीकांत मिश्र की अदालत ने पोक्सो केस नंबर-79/25 और कासमा थाना कांड संख्या-87/25 में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। स्पेशल पीपी शिवलाल मेहता ने बताया कि अदालत ने बंदेया निवासी गुंजन सिंह को पहले 6 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पोक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था।
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सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पोक्सो एक्ट की धारा 4(2) और बीएनएस की धारा 65(1) के तहत 20 साल के सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं बीएनएस की धारा 87 के तहत 7 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी पहले जेल में बिताए 4 माह 22 दिन की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
पीड़िता को मिलेगा एक लाख रुपये का मुआवजा
अदालत ने बिहार पीड़ित प्रतिकर संशोधन योजना-2019 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद को पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिलाने में सहयोग करने का निर्देश दिया है। जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि पीड़िता को उपलब्ध कराई जाएगी।
अल्ट्रासाउंड कराने गई थी, अगवा कर अगले दिन करा दी शादी
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 28 जून 2025 को कासमा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी अल्ट्रासाउंड कराने रफीगंज गई थी। लौटते समय आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और अगले दिन देवकुंड में जबरन शादी कर ली।
बाद में पीड़िता ने रोते हुए अपने पिता को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में उसे जमानत मिली, लेकिन पुलिस की चार्जशीट और ट्रायल के बाद अदालत ने 31 अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए और सुनवाई पूरी कर आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए, जिनकी गवाही के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया।