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Bihar: सिर्फ सीट भरने नहीं, जनता की लड़ाई लड़ने पहुंचे हैं विधायक'; गयाजी में सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा संदेश
Sat, 11 Jul 2026 12:17 PM IST
मगध ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: मगध ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 12:17 PM IST
सार
गया के बिपार्ड में आयोजित विधायक प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनप्रतिनिधियों से प्रश्नकाल और शून्यकाल का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सर्वोच्च मंच है। विधायक जितने अधिक सवाल पूछेंगे, सरकार को जमीनी समस्याओं की उतनी बेहतर जानकारी मिलेगी और उनके समाधान का रास्ता भी मजबूत होगा।
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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गयाजी में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधायकों को सक्रिय और जवाबदेह जनप्रतिनिधि बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल उपस्थिति दर्ज कराने का मंच नहीं, बल्कि जनता की आवाज बुलंद करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। विधायक जितने अधिक सवाल उठाएंगे, सरकार को उतनी ही बेहतर तरीके से जमीनी समस्याओं की जानकारी मिलेगी और उनके समाधान का रास्ता निकलेगा।
प्रश्नकाल और जीरो आवर को बनाएं जनता की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विधायक को प्रश्नकाल और जीरो आवर का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। यही वे संसदीय माध्यम हैं, जिनके जरिए क्षेत्र की समस्याओं को सीधे सरकार के सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विधायकों के सवालों और सुझावों से जनसमस्याओं की वास्तविक तस्वीर सामने आए, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
तैयारी के साथ सदन में रखें अपनी बात
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रभावी विधायक वही होता है जो सदन में पूरी तैयारी के साथ पहुंचे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विधेयकों, कटौती प्रस्तावों, सदन की कार्यवाही और संसदीय नियमों का गंभीर अध्ययन करने की अपील की। उनके अनुसार केवल चुनाव जीत लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विधायी प्रक्रिया की समझ ही किसी विधायक को जनता का मजबूत प्रतिनिधि बनाती है।
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जनता का विश्वास जीतना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों को लगातार यह मंथन करना चाहिए कि वे युवाओं, महिलाओं और गरीब परिवारों का विश्वास कैसे मजबूत कर सकते हैं। जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाना ही जनप्रतिनिधि का वास्तविक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को सदन तक पहुंचाना लोकतंत्र की सबसे बड़ी सेवा है।
ये भी पढ़ें- बिपार्ड में सजी लोकतंत्र की 'पाठशाला', उपराष्ट्रपति; राज्यपाल और सीएम ने संयुक्त रूप से किया उद्घाटन
वरिष्ठ विधायकों के अनुभव से सीखने की सलाह
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों 1990 से लगातार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका विधायी अनुभव नए विधायकों के लिए प्रेरणा और सीख का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने नए सदस्यों से आग्रह किया कि वे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ लेकर अपनी संसदीय भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएं।
लोकतंत्र को मजबूत करने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र वही है, जहां विधायक जनता की समस्याओं को पूरी तैयारी, तथ्य और गंभीरता के साथ सदन में उठाएं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय भागीदारी, निरंतर अध्ययन और जनसेवा की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया, ताकि विधानसभा वास्तव में जनता की उम्मीदों का मंच बन सके।
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प्रश्नकाल और जीरो आवर को बनाएं जनता की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विधायक को प्रश्नकाल और जीरो आवर का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। यही वे संसदीय माध्यम हैं, जिनके जरिए क्षेत्र की समस्याओं को सीधे सरकार के सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विधायकों के सवालों और सुझावों से जनसमस्याओं की वास्तविक तस्वीर सामने आए, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
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तैयारी के साथ सदन में रखें अपनी बात
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रभावी विधायक वही होता है जो सदन में पूरी तैयारी के साथ पहुंचे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विधेयकों, कटौती प्रस्तावों, सदन की कार्यवाही और संसदीय नियमों का गंभीर अध्ययन करने की अपील की। उनके अनुसार केवल चुनाव जीत लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विधायी प्रक्रिया की समझ ही किसी विधायक को जनता का मजबूत प्रतिनिधि बनाती है।
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जनता का विश्वास जीतना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों को लगातार यह मंथन करना चाहिए कि वे युवाओं, महिलाओं और गरीब परिवारों का विश्वास कैसे मजबूत कर सकते हैं। जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाना ही जनप्रतिनिधि का वास्तविक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को सदन तक पहुंचाना लोकतंत्र की सबसे बड़ी सेवा है।
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वरिष्ठ विधायकों के अनुभव से सीखने की सलाह
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों 1990 से लगातार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका विधायी अनुभव नए विधायकों के लिए प्रेरणा और सीख का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने नए सदस्यों से आग्रह किया कि वे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ लेकर अपनी संसदीय भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएं।
लोकतंत्र को मजबूत करने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र वही है, जहां विधायक जनता की समस्याओं को पूरी तैयारी, तथ्य और गंभीरता के साथ सदन में उठाएं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय भागीदारी, निरंतर अध्ययन और जनसेवा की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया, ताकि विधानसभा वास्तव में जनता की उम्मीदों का मंच बन सके।