Bihar News : एक साथ 8 लोगों को उम्रकैद; क्यों चर्चित हुआ था बिहार में यह हत्याकांड?
जहानाबाद व्यवहार न्यायालय ने मंटू यादव हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता-पुत्र समेत आठ अभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार सिन्हा की अदालत ने सभी दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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व्यवहार न्यायालय, जहानाबाद ने हत्या के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता-पुत्र समेत आठ अभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला जहानाबाद जिले के कड़ौना थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 25 वर्षीय युवक मंटू यादव की हत्या कर दी गई थी। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार सिन्हा के न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इन आठ अभियुक्तों को ठहराया गया दोषी
न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए अभियुक्तों में लतुफुलाह चक, थाना कड़ौना निवासी सूरज कुमार, मनोज कुमार, सीताराम यादव, सुदामा यादव, प्रमोद यादव, राम पूजन यादव, चांद कुमार और श्याम कुमार शामिल हैं। सभी को मंटू यादव की हत्या के मामले में दोषी पाया गया।
कैसे हुआ था मंटू यादव का अपहरण और हत्या
सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अपर लोक अभियोजक बिंदु भूषण प्रसाद ने बताया कि इस मामले में सूचक सूर्य देव सिंह, ग्राम लतुफुलाह चक, थाना कड़ौना, जिला जहानाबाद निवासी द्वारा कड़ौना थाना कांड संख्या 634/21 दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी के अनुसार, 5 अक्टूबर 2021 की रात करीब नौ बजे सूचक अपने पुत्र मंटू कुमार के साथ दालान पर बैठा था। इसी दौरान सभी अभियुक्त वहां पहुंचे और मंटू कुमार को मछली मारने के बहाने अपने साथ लेकर चले गए। रात में मंटू कुमार के वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने अभियुक्तों के घर जाकर पूछताछ की, लेकिन सभी अभियुक्त घर से फरार पाए गए। इसके बाद दो दिनों के पश्चात मंटू कुमार का शव अन्यत्र स्थान से बरामद किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
पुरानी रंजिश बना हत्या की वजह
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या का कारण पुरानी रंजिश था। मृतक मंटू कुमार ने पहले कुछ अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिसे वापस लेने के लिए अभियुक्त उस पर लगातार दबाव बना रहे थे। इसी रंजिश में उसकी हत्या कर दी गई।
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नौ गवाहों की गवाही और सबूतों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चिकित्सक, अनुसंधानकर्ता (आईओ) समेत कुल नौ गवाहों का साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
फैसले से पीड़ित परिवार संतुष्ट
न्यायालय के इस फैसले से पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त किया है, वहीं क्षेत्र में भी इस न्यायिक निर्णय की सराहना की जा रही है।