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Bihar: वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवा! मगध मेडिकल कॉलेज में चार दिन से ओपीडी ठप, मरीज हुए परेशान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 08 Jun 2026 12:18 PM IST
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सार

गयाजी के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। ओपीडी सेवा बंद होने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इमरजेंसी सेवा बहाल होने के बावजूद सामान्य मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

Gaya Magadh Medical College Crisis OPD Closed for fourth Day as Junior Doctors Strike Continues
एएनएमएमसीएच के ओपीडी में मरीजों की भीड़ - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों और प्रशासन के बीच जारी विवाद का असर अब सीधे मरीजों पर दिखाई देने लगा है। जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसके कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाएं ठप हैं और इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे, लौटे निराश
सोमवार सुबह अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचे। किसी को चिकित्सकीय परामर्श लेना था तो किसी को जांच करानी थी, लेकिन ओपीडी बंद होने के कारण लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। दूर-दराज के गांवों से आए कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह-सुबह लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मरीजों का कहना है कि बीमारी और दर्द किसी का इंतजार नहीं करते। ऐसे में सरकारी अस्पताल की सेवाएं प्रभावित होने से उन्हें मजबूरी में निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च उनकी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मगध क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल इस संस्थान में प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कई दिनों तक ओपीडी सेवा बंद रहने से स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों की मांगें अपनी जगह हो सकती हैं, लेकिन उनका समाधान निकालना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोगों का मानना है कि लंबे समय तक चिकित्सा सेवाएं बाधित रहने का सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिनके पास निजी अस्पतालों में इलाज कराने का विकल्प नहीं होता।
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इमरजेंसी सेवा बहाल, लेकिन परेशानी बरकरार
रविवार देर शाम हुई वार्ता के बाद अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं, जिससे गंभीर मरीजों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण सामान्य मरीजों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। नियमित जांच, परामर्श और उपचार से जुड़ी सेवाएं अभी भी प्रभावित हैं।

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मरीजों और परिजनों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार बढ़ती परेशानियों के कारण मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। हालात को देखते हुए अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है और पुलिस बल की तैनाती की गई है।

समाधान की राह पर टिकी निगाहें
फिलहाल जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि प्रशासन बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक हजारों मरीजों की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर छाया यह संकट अब केवल डॉक्टरों और प्रशासन के बीच का विवाद नहीं, बल्कि आम जनता की चिंता का विषय बन गया है।

 

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