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Bihar News: 21 लाख नहीं, बहू ही बेटे की सबसे बड़ी निशानी, शहीद शुभम के परिवार की बदली सोच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2026 09:37 PM IST
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सार
Bihar News: जहानाबाद के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिजनों ने 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर विवाद समाप्त करते हुए बहू श्रेया राय को बेटे की आखिरी निशानी बताकर स्वीकार कर लिया।
शहीद शुभम के परिवार की बदली सोच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार में पिछले दो दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। राज्य सरकार की 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर सवाल उठाने वाले परिजनों ने अब अपना रुख बदल लिया है। परिवार का कहना है कि पैसे से बढ़कर उनके लिए शुभम की आखिरी निशानी उनकी बहू श्रेया है, जिसका वे अब पूरे सम्मान के साथ अपने घर में स्वागत करेंगे।
दो दिन पहले था विवाद, अब खत्म हुई गलतफहमी
जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड के वनवरिया गांव निवासी शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के पिता ने दो दिन पहले आरोप लगाया था कि प्रशासनिक अधिकारियों और शुभम की पत्नी ने उन्हें बिना जानकारी दिए राज्य सरकार की 21 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त कर ली। इस बयान के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया था।हालांकि अब परिजनों का कहना है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद उनकी गलतफहमी दूर हो गई है और अब इस मामले में कोई विवाद नहीं है।
'बहू ही बेटे की आखिरी निशानी है'
शहीद के पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें शुभम की कोर्ट मैरिज की जानकारी पहले नहीं थी। इसी कारण सहायता राशि श्रेया राय को मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। लेकिन बहू से बातचीत के बाद उन्हें एहसास हुआ कि श्रेया ही उनके बेटे की अंतिम याद और परिवार की सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि 21 लाख रुपये उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। उनके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि शुभम की हर निशानी उनके परिवार के साथ जुड़ी रहे।
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नवंबर में होनी थी शादी
परिजनों के अनुसार, शुभम कुमार की शादी इसी वर्ष नवंबर में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी श्रेया राय के साथ तय हुई थी। लेकिन शादी से पहले ही असम के जोरहाट में हुए विमान हादसे में वह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। बाद में परिवार को यह जानकारी मिली कि दोनों ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिसकी जानकारी घरवालों को नहीं थी।
अब बहू के स्वागत का इंतजार
गलतफहमी दूर होने के बाद शहीद का पूरा परिवार श्रेया राय को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर चुका है। पिता ने कहा कि अब वे पलक-पावड़े बिछाकर अपनी बहू के घर आने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार उसे पूरा सम्मान, अपनापन और अधिकार देगा।
यह भी पढ़ें: 39 दिन में वादा पूरा! रेल मंत्री ने दिखाई छपरा-दिल्ली एक्सप्रेस को हरी झंडी; नई ट्रेनों रोडमैप भी बताया
भावनाओं ने खत्म किया विवाद
दो दिनों तक जिस सहायता राशि को लेकर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, वह अब परिवार के भीतर संवाद और भावनात्मक समझ के बाद समाप्त हो गया है। शहीद शुभम कुमार के परिजनों का कहना है कि किसी भी आर्थिक सहायता से बढ़कर उनके लिए अपने बेटे की यादें और उससे जुड़ा हर रिश्ता है। अब पूरा परिवार अपनी बहू के साथ मिलकर शहीद शुभम की स्मृतियों को संजोए रखने की बात कह रहा है।
दो दिन पहले था विवाद, अब खत्म हुई गलतफहमी
जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड के वनवरिया गांव निवासी शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के पिता ने दो दिन पहले आरोप लगाया था कि प्रशासनिक अधिकारियों और शुभम की पत्नी ने उन्हें बिना जानकारी दिए राज्य सरकार की 21 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त कर ली। इस बयान के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया था।हालांकि अब परिजनों का कहना है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद उनकी गलतफहमी दूर हो गई है और अब इस मामले में कोई विवाद नहीं है।
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'बहू ही बेटे की आखिरी निशानी है'
शहीद के पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें शुभम की कोर्ट मैरिज की जानकारी पहले नहीं थी। इसी कारण सहायता राशि श्रेया राय को मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। लेकिन बहू से बातचीत के बाद उन्हें एहसास हुआ कि श्रेया ही उनके बेटे की अंतिम याद और परिवार की सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि 21 लाख रुपये उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। उनके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि शुभम की हर निशानी उनके परिवार के साथ जुड़ी रहे।
नवंबर में होनी थी शादी
परिजनों के अनुसार, शुभम कुमार की शादी इसी वर्ष नवंबर में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी श्रेया राय के साथ तय हुई थी। लेकिन शादी से पहले ही असम के जोरहाट में हुए विमान हादसे में वह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। बाद में परिवार को यह जानकारी मिली कि दोनों ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिसकी जानकारी घरवालों को नहीं थी।
अब बहू के स्वागत का इंतजार
गलतफहमी दूर होने के बाद शहीद का पूरा परिवार श्रेया राय को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर चुका है। पिता ने कहा कि अब वे पलक-पावड़े बिछाकर अपनी बहू के घर आने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार उसे पूरा सम्मान, अपनापन और अधिकार देगा।
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भावनाओं ने खत्म किया विवाद
दो दिनों तक जिस सहायता राशि को लेकर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, वह अब परिवार के भीतर संवाद और भावनात्मक समझ के बाद समाप्त हो गया है। शहीद शुभम कुमार के परिजनों का कहना है कि किसी भी आर्थिक सहायता से बढ़कर उनके लिए अपने बेटे की यादें और उससे जुड़ा हर रिश्ता है। अब पूरा परिवार अपनी बहू के साथ मिलकर शहीद शुभम की स्मृतियों को संजोए रखने की बात कह रहा है।