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Bihar: सहरसा सदर अस्पताल परिसर में संत की संदिग्ध मौत, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका; उठाए ये सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 08 Nov 2025 08:01 PM IST
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सार

Bihar: परिजनों के मुताबिक बौकू चौधरी 6 नवंबर को मतदान के बाद अपने गांव से निकले थे और उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं था। शनिवार को अचानक उनकी मौत की खबर आने से पूरा परिवार सदमे में है।

Bihar: A saint death under suspicious circumstances in the Saharsa Sadar Hospital premises
अस्पताल में मौजूद सभी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सहरसा सदर अस्पताल परिसर में शनिवार को 53 वर्षीय संत बौकू चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों ने हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं, क्योंकि न तो संत को अस्पताल में भर्ती किया गया और न ही उनकी मौत का कोई रिकॉर्ड अस्पताल रजिस्टर में दर्ज है।

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सोशल मीडिया से मिली मौत की जानकारी
मृतक की पहचान सहरसा जिले के महिषी थाना क्षेत्र के महसेहरो वार्ड नंबर 8 निवासी बौकू चौधरी के रूप में हुई है। बौकू चौधरी अविवाहित थे और संत के रूप में घुमंतू जीवन व्यतीत करते थे। मृतक के चचेरे भाई महादेव चौधरी ने बताया कि उन्हें शनिवार की शाम करीब पांच बजे सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली कि बौकू चौधरी की लाश सदर अस्पताल में पड़ी है। सूचना मिलते ही परिजन पुलिस के साथ अस्पताल पहुंचे।

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अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल प्रबंधन ने बेहद अमानवीय व्यवहार किया। महादेव चौधरी ने कहा कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि बौकू चौधरी को कौन और किस हालत में अस्पताल लेकर आया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के किसी भी रजिस्टर में न तो भर्ती का उल्लेख है और न ही मृत्यु का। महादेव चौधरी ने सवाल उठाया कि अगर संत को चोट लगी थी, तो इलाज क्यों नहीं किया गया? और अगर भर्ती नहीं हुए, तो उनकी मौत अस्पताल परिसर में कैसे हो गई? परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि हत्या का मामला हो सकता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।


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6 नवंबर को गांव से निकले थे संत
परिजनों के मुताबिक बौकू चौधरी 6 नवंबर को मतदान के बाद अपने गांव से निकले थे और उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं था। शनिवार को अचानक उनकी मौत की खबर आने से पूरा परिवार सदमे में है।

पुलिस ने शव भेजा पोस्टमार्टम के लिए
मामले की जानकारी मिलते ही सहरसा सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। सब इंस्पेक्टर शोएब अख्तर ने बताया कि यह संदिग्ध मौत का मामला है। पुलिस ने परिजनों के बयान पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

सिविल सर्जन ने जांच का दिया आश्वासन
अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवालों को लेकर सिविल सर्जन डॉ. रमन कुमार झा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। अगर किसी की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई तय है।

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