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Bihar Election: बिहार में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- मैं मजबूरी में ऐसा कर रहा, अब रुकने वाला नहीं हूं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
Published by: आदित्य आनंद
Updated Tue, 16 Sep 2025 10:01 AM IST
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सार
Bihar News: गौ-मतदाता संकल्प यात्रा पर निकले शंकराचार्य ने कहा कि पूर्व सीएम जीतन राम मांझी मुझे गलत आदमी बताते हैं। लेकिन, मैं गलत कैसे हूं या मैंने क्या गलती की है, यह नहीं बता सकते हैं। किसी पर आक्षेप करना आसान है। मैं धर्म की रक्षा के लिए लोगों को जागृत कर रहा हूं। इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
सुपौल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस वार्ता की।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
"अगर भारत का झंडा कहीं फाड़ दिया जाता है तो उसे भारत का अपमान समझा जाता है। उसी प्रकार अगर गाय संकट में है तो भारतीय संस्कृति को खतरा है। गाय भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। आज की राजनीति गाय के विपक्ष में खड़ी है। बिहार में 2013 में 06 लाख 80 हजार शुद्ध देसी नस्ल की गाय थी। लेकिन अब 1000-1500 रह गई है। यह देसी गाय बिहार की पहचान थी, जो नष्ट हो रही है।" यह बातें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को सुपौल जिला मुख्यालय स्थित श्री राधा कृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
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शंकराचार्य ने कहा कि देश की कोई पार्टी और कोई नेता गौ-माता के पक्ष में खड़ा दिखाई नहीं दे रहा है। कोई बात भी करता है तो काम नहीं कर रहा है। इसलिए मजबूरी में गौ-मतदाता संकल्प यात्रा पर निकला हूं। बिहार के सभी विधानसभा क्षेत्र में गौ-माता के पक्ष में प्रत्याशी खड़ा करना और वोट दिलवाना ही उद्देश्य है। चुनाव के बाद यह दिखाना है कि बिहार के इतने लोग गौ माता के पक्ष में हैं। शंकराचार्य ने कहा कि उनका पूरा अभियान गौ रक्षा को लेकर है और वह सनातन परंपरा की रक्षा के लिए बिहार भ्रमण कर सभी 243 सीटों पर गौ-रक्षकों को चुनावी राजनीति में उतरने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के पूर्व वहां मौजूद लोगों को उन्होंने गौ-रक्षा के लिए मतदान का भी संकल्प दिलाया। वही एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति की रक्षा शंकराचार्य का दायित्व है। वह राजनीति के मैदान में नहीं उतर रहे हैं, बल्कि लोगों को जागृत कर रहे हैं।
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उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह मुझे गंदा आदमी कहते हैं। लेकिन मेरी गलती सामने नहीं ला सकते हैं। मेरी यात्रा को लेकर लोग इसी प्रकार कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। लेकिन मैं रुकने वाला नहीं हूं। वही पुरी के शंकराचार्य से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह मुझे शंकराचार्य नहीं मानते हैं, यह कह सकते हैं। लेकिन मैं शंकराचार्य नहीं हूं, यह नहीं कह सकते हैं। मेरे चयन में तीन में से दो शंकराचार्य ने मेरा समर्थन किया, यही सत्य है। मेरे शंकराचार्य होने को लेकर कोई सवाल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में भी जब पांच-सात जजों की बेंच बैठती है तो बहुमत का निर्णय ही मान्य होता है।
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प्रजा के माथे से चढ़ा पाप उतारना हमारा धर्म
शंकराचार्य ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं राजनीति के लिए नहीं आया हूं। न चुनाव लड़ने आया हूं। लोगों को जागृत करना उद्देश्य है कि धर्म और गाय के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ें। वोटरों को जगाना है कि वह इसके लिए वोट करें। मैं धार्मिक व्यक्ति हूं तो प्रजा के माथे पर चढ़ा पाप उतारना मेरा धर्म है। इसमें राजनीति कहां है? शंकराचार्य का काम केवल मठ में रह कर आराम करना है क्या? आक्षेप लगाना आसान है, कोई भी लगा सकता है। लेकिन, शंकराचार्य परंपरा का दायित्व हमारी पहचान को कायम रखना है और इसके लिए गौ-रक्षा जरूरी है।
हिंदू स्वाभिमान ही हमारा सबसे बड़ा मुद्दा
शंकराचार्य ने कहा कि बिहार हो या देश सबसे बड़ा मुद्दा हमारी पहचान का है। हमारी पहचान और सम्मान खो गया है। देश में 20 करोड़ लोगों की हर बात सुनी जा रही है। 90 करोड़ की अनदेखी हो रही है। कोई हिंदुओं की बात करेगा तो हमारे ही नेता उसका अपमान शुरु कर देंगे। हम खैरात में खाने वाले नहीं हैं, रोटी कमा कर खा लेंगे। अपनी समस्या से जूझ लेंगे। लेकिन हिंदू सम्मान और स्वाभिमान ही सबसे बड़ा मुद्दा है। हिंदू प्रतीकों की रक्षा की मुद्दा है।