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Bihar Cabinet: किसके इस्तीफे से खुली थी रत्नेश की किस्मत? चौथी बार विधायक, फिर मंत्री बन रहे सादा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा Published by: कोसी ब्यूरो Updated Thu, 07 May 2026 01:04 PM IST
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सार

Bihar Cabinet: रिक्शा चलाकर पढ़ाई पूरी करने वाले रत्नेश सदा आज बिहार सरकार में मंत्री बने हैं। रत्नेश ने गरीबी से संघर्ष करते हुए उन्होंने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार चार बार विधायक बनने के बाद अब फिर कैबिनेट में जगह पाए हैं।

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रत्नेश सादा
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विस्तार

बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज अपने कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं। इस मंत्रिमंडल में कई पुराने और नए चेहरों को जगह मिल रही है, लेकिन एक नाम जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा है, वह हैं जनता दल (यू) के दिग्गज नेता रत्नेश सदा। रत्नेश सदा सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि उनका जीवन कड़े संघर्षों से तपकर कुंदन बनने की कहानी है। कभी परिवार का पेट पालने के लिए सहरसा की सड़कों पर रिक्शा चलाने वाले रत्नेश सदा आज मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। आइए जानते हैं उनके रिक्शा चालक से लेकर कैबिनेट मंत्री तक के इस प्रेरणादायक सफर के बारे में...

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मजदूर पिता के बेटे ने रिक्शा चलाकर पूरी की पढ़ाई
सहरसा जिले के महिषी प्रखंड के कुंदह गांव में जन्मे रत्नेश सदा का शुरुआती जीवन घोर आर्थिक तंगी और गरीबी में बीता। उनके पिता लक्ष्मी सदा एक दिहाड़ी मजदूर थे। घर की हालत ऐसी थी कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल होता था। ऐसे में रत्नेश ने हार नहीं मानी। परिवार का भरण-पोषण करने और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने लंबे समय तक रिक्शा चलाया और मजदूरी भी की। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रत्नेश ने शिक्षा से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने न सिर्फ ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री हासिल की, बल्कि संस्कृत में ‘आचार्य’ की उपाधि भी प्राप्त की। कबीर पंथ को मानने वाले रत्नेश सदा आज भी अपने सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं।
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लगातार चार बार बने विधायक
रत्नेश सदा ने अपने सामाजिक और राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1987 में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में की थी। उनकी मेहनत और जनता के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए जदयू ने उन्हें वर्ष 2010 में पहली बार सोनबरसा राज (सुरक्षित) विधानसभा सीट से टिकट दिया और वह जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 2010, 2015, 2020 और हालिया चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर चौथी बार विधायक बने हैं। संगठन में भी उनका मजबूत दबदबा रहा है। वे जदयू महादलित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के उपाध्यक्ष व महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद खुली थी मंत्री बनने की राह
जून 2023 में जब संतोष सुमन ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रत्नेश सदा को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बनाया गया था। अब एक बार फिर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें अपने मंत्रिमंडल में जगह देने जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें: सम्राट चौधरी सरकार में फिर मंत्री बनेंगी शीला मंडल, करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं विधायक

करोड़ों की संपत्ति, लेकिन छवि पूरी तरह बेदाग
करीब 54 वर्षीय रत्नेश सदा सहरसा जिले के कहरा कुट्टी (वार्ड नंबर-6) के निवासी हैं। चुनाव आयोग में दाखिल एफिडेविट के अनुसार, उनकी कुल चल और अचल संपत्ति लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये है। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। रत्नेश सदा की सबसे बड़ी पहचान उनकी साफ-सुथरी छवि मानी जाती है। चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उन पर कोई भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। बिहार की राजनीति में उन्हें जदयू का एक प्रमुख महादलित चेहरा माना जाता है। रिक्शा के पैडल से शुरू हुआ उनका सफर आज बिहार सरकार के वातानुकूलित कैबिनेट कक्ष तक पहुंच चुका है, जो लोकतंत्र की ताकत और मेहनत की जीत की मिसाल माना जा रहा है।

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