फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   700-Year-Old Banyan Tree to Become India's First Natural Heritage Tree, Giving Munger a New Identity

Bihar: 1934 के भूकंप और तूफानों को झेलकर भी अडिग है 700 साल पुराना वट वृक्ष, अब मिलेगा हेरिटेज ट्री का दर्जा

Fri, 05 Jun 2026 10:23 AM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Fri, 05 Jun 2026 10:23 AM IST
सार

बिहार के मुंगेर स्थित आईटीसी पार्क परिसर का लगभग 700 वर्ष पुराना विशाल वट वृक्ष अब ‘हेरिटेज ट्री’ का दर्जा पाने की ओर बढ़ रहा है। बिहार जैव विविधता बोर्ड के वर्ष 2022 के सर्वेक्षण और वैज्ञानिक कार्बन डेटिंग जांच में इसकी आयु करीब सात शताब्दी पाई गई है।

विज्ञापन
700-Year-Old Banyan Tree to Become India's First Natural Heritage Tree, Giving Munger a New Identity
मुंगेर का वट वृक्ष बनेगा देश की प्राकृतिक धरोहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विज्ञापन

बिहार के मुंगेर जिले में स्थित आईटीसी पार्क परिसर का 700 वर्ष पुराना विशाल वट वृक्ष अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिक जांच में इसकी आयु लगभग सात शताब्दी प्रमाणित होने के बाद इसे ‘हेरिटेज ट्री’ यानी प्राकृतिक धरोहर वृक्ष घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो यह देश के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर वृक्षों में शामिल हो सकता है।

सर्वेक्षण में सामने आई ऐतिहासिक पहचान

इस ऐतिहासिक वट वृक्ष की विशेष पहचान वर्ष 2022 में बिहार जैव विविधता बोर्ड द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के दौरान हुई थी। सर्वेक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग किया। जांच में यह सामने आया कि वृक्ष की आयु करीब 700 वर्ष है।

विज्ञापन

100 मीटर क्षेत्र में फैला है विशाल वट वृक्ष

यह विशाल वट वृक्ष लगभग 100 मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी ऊंचाई करीब 60 फीट है। इसकी सैकड़ों हवाई जड़ें समय के साथ नए तनों का रूप ले चुकी हैं, जिससे यह पूरा क्षेत्र एक छोटे जंगल जैसा दिखाई देता है। यही विशेषता इसे अन्य वृक्षों से अलग और बेहद खास बनाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

भूकंप और तूफानों के बावजूद अडिग रहा वृक्ष

स्थानीय लोगों के अनुसार यह वट वृक्ष वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप सहित कई भीषण आंधी-तूफानों का सामना कर चुका है। प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद यह आज भी मजबूती से खड़ा है और मुंगेर की ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

संरक्षण के लिए बनाई जा रही विशेष योजना

वन प्रमंडल पदाधिकारी अमरीश कुमार मल्ल ने बताया कि इस ऐतिहासिक वृक्ष के संरक्षण और वैज्ञानिक देखरेख के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत वृक्ष की नियमित निगरानी और संरक्षण के उपाय किए जाएंगे।

विशेषज्ञों ने बताई नियमित निगरानी की जरूरत

वानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस दुर्लभ वट वृक्ष की हवाई जड़ों, शाखाओं और मुख्य तने की समय-समय पर वैज्ञानिक जांच और निगरानी जरूरी है। इससे इसकी सेहत बेहतर बनी रहेगी और आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक धरोहर को देख सकेंगी।

मुंगेर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक

यह 700 वर्ष पुराना वट वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मुंगेर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। हेरिटेज ट्री का दर्जा मिलने से इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed