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Bihar News: आर्म्स लाइसेंस फर्जीवाड़ा में चौकीदार गिरफ्तार, कुख्यात अपराधी अभी फरार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 10:26 PM IST
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सार
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में आर्म्स लाइसेंस को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पुलिस ने चौकीदार मनोज सिंह को गिरफ्तार किया है, जिस पर थानेदार और इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर कुख्यात अपराधी नाज अहमद खान को लाइसेंस दिलाने का आरोप है।
फरार प्रमुख पति, एवं फर्जी हस्ताक्षर किए हुए पत्र
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विस्तार
पूर्वी चंपारण जिले में आर्म्स लाइसेंस को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में पुलिस ने चौकीदार मनोज सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने थानेदार और इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर कुख्यात अपराधी नाज अहमद खान को शस्त्र लाइसेंस दिलाने की साजिश रची। मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर आरोपी मनोज सिंह के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामला केसरिया प्रखंड के आर्म्स लाइसेंस आवेदन से जुड़ा
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला केसरिया प्रखंड की प्रमुख के पति नाज अहमद खान के दूसरे आर्म्स लाइसेंस आवेदन से जुड़ा है। पुलिस रिकॉर्ड में नाज अहमद खान पर एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बावजूद इसके, लाइसेंस हासिल करने के लिए उसने चौकीदार मनोज सिंह के साथ मिलकर फर्जी साजिश रची।
चौकीदार ने अपने पद का किया दुरुपयोग
आरोप है कि चौकीदार मनोज सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए थानेदार और इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए और रिपोर्ट में आरोपी का आपराधिक इतिहास पूरी तरह साफ दर्शाते हुए फाइल जिला मुख्यालय भेज दी।
जिलाधिकारी की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर
मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जब जांच कराई गई, तो हस्ताक्षरों में गड़बड़ी सामने आई और पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष रामशरण पासवान के आवेदन पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मनोज सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
मुख्य आरोपी नाज अहमद खान अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसपी ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है और उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति। इस घटना के बाद पूरे मोतिहारी जिले में मामला चर्चा का विषय बन गया है। आम लोग प्रशासन की सक्रियता की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि समय रहते एक गंभीर अपराधी को लाइसेंस मिलने से रोक दिया गया। वहीं पुलिस इस बात की भी जांच में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं।
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मामला केसरिया प्रखंड के आर्म्स लाइसेंस आवेदन से जुड़ा
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला केसरिया प्रखंड की प्रमुख के पति नाज अहमद खान के दूसरे आर्म्स लाइसेंस आवेदन से जुड़ा है। पुलिस रिकॉर्ड में नाज अहमद खान पर एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बावजूद इसके, लाइसेंस हासिल करने के लिए उसने चौकीदार मनोज सिंह के साथ मिलकर फर्जी साजिश रची।
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चौकीदार ने अपने पद का किया दुरुपयोग
आरोप है कि चौकीदार मनोज सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए थानेदार और इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए और रिपोर्ट में आरोपी का आपराधिक इतिहास पूरी तरह साफ दर्शाते हुए फाइल जिला मुख्यालय भेज दी।
जिलाधिकारी की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर
मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जब जांच कराई गई, तो हस्ताक्षरों में गड़बड़ी सामने आई और पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष रामशरण पासवान के आवेदन पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मनोज सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
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मुख्य आरोपी अभी फरार, SIT गठितमुख्य आरोपी नाज अहमद खान अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसपी ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है और उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति। इस घटना के बाद पूरे मोतिहारी जिले में मामला चर्चा का विषय बन गया है। आम लोग प्रशासन की सक्रियता की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि समय रहते एक गंभीर अपराधी को लाइसेंस मिलने से रोक दिया गया। वहीं पुलिस इस बात की भी जांच में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं।