Bihar: वैशाली में SHO समेत पांच पुलिसकर्मियों पर SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज, लगा थाने में अत्याचार का आरोप
Bihar: वैशाली जिले के राघोपुर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मेथुर भगत ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने दबाव बनाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया और 20 हजार रुपये लेने के बाद जमानत दी।
विस्तार
वैशाली जिले के राघोपुर थाना प्रभारी और थाने के कई अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ हाजीपुर स्थित एससी/एसटी कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। परिवाद में कहा गया है कि मेथुर भगत, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, के परिवार के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। परिवाद के अनुसार, घटना के दिन पीड़ित के बेटे सुबोध भगत की पत्नी और पड़ोसी मनु भगत के बीच किसी बात को लेकर अनबन हो गई, जो बाद में झगड़े में बदल गई। उस समय पीड़ित घर पर मौजूद नहीं था। घर लौटने पर वह दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच सुबोध भगत ने राघोपुर थाना को फोन कर दिया।
पुलिस पर क्या हैं आरोप?
कैसे दर्ज हुआ मामला?
थाने में क्या हुआ?
पीड़ित ने पुलिस से अनुरोध किया कि यह एक घरेलू मामला है और इसे आपसी समझ से सुलझा लिया जाएगा, लेकिन इस पर नाराज होकर दरोगा अवधेश कुमार ने थाना से लाठी मंगवाकर पीड़ित की पिटाई की। परिवाद में आरोप है कि उसे करीब 20 लाठियां मारी गईं और जातिसूचक गालियां दी गईं। यहां तक कि पुलिसकर्मियों ने उसकी मूंछ पर आपत्ति जताते हुए उसे अपमानित किया और मूंछ उखाड़ने का भी प्रयास किया।
लॉकअप और धमकी का आरोप
आरोप है कि थाना में मौजूद मो. परवेज एवं अन्य पुलिसकर्मियों ने भी मारपीट की और बाद में पीड़ित को लॉकअप में बंद कर दिया। साथ ही धमकी दी गई कि पैसे का इंतजाम नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
रिश्वत लेकर मिली जमानत?
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि पीड़ित की पत्नी से 20 हजार रुपये की मांग की गई। बाद में उसने किसी तरह पैसे का इंतजाम कर थाना पहुंचाया, जिसके बाद थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने राशि लेकर बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत जमानत की सुविधा देते हुए पीड़ित को लॉकअप से बाहर निकाला।
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अब आगे क्या होगा?
मामले में एससी/एसटी कोर्ट में परिवाद दायर होने के बाद अब न्यायालय द्वारा आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।
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