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Bihar: मुजफ्फरपुर में मुहर्रम पर निकला मातमी जुलूस, या हुसैन के नारे गूंजे; चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 12:26 PM IST
सार
मुजफ्फरपुर में आशूरा पर शिया समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी जुलूस निकाला। हजारों अज़ादार 'या हुसैन' की सदाओं के साथ मातम करते नजर आए। जिले में डीजे पर प्रतिबंध है और सुरक्षा के लिए ड्रोन, सीसीटीवी व भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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मुहर्रम पर निकला मातमी जुलूस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मुजफ्फरपुर में मुहर्रम की 10वीं तारीख (आशूरा) पर बिहार के मुजफ्फरपुर में शिया समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में गम और मातम का जुलूस निकाला। 'या हुसैन' की सदाओं के बीच अज़ादारों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मान्यता के अनुसार, 10 वीं तारीख को मुहर्रम को कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने यज़ीद के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। उनकी कुर्बानी की याद में हर वर्ष आशूरा के दिन मातमी जुलूस निकाले जाते हैं।
हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए
मुजफ्फरपुर शहर के चंदवारा स्थित शिया बहुल कमरा मोहल्ले से पहला मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। अज़ादार नंगे पांव चलकर मातम करते रहे और 'या हुसैन' के नारों के साथ कर्बला के शहीदों को याद किया।
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अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है
इस मौके पर शिया धर्मगुरु मौलाना काज़िम शब्बीर ने कहा कि मुहर्रम बुराई, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत हमें हर दौर में अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने और मानवता की रक्षा करने की प्रेरणा देती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुहर्रम को लेकर मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जिले में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने संयुक्त आदेश जारी कर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। जिले के संवेदनशील इलाकों में पुलिस, एसएपी, बीएसएपी तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
ये भी पढ़ें- Bihar: कोलकाता गोदाम हादसे ने छीनी घर की खुशियां, जवान बेटे का शव पहुंचते ही फूट-फूटकर रो पड़ा परिवार
पर्व से पहले प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में फ्लैग मार्च भी निकाला था, ताकि लोगों को शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में मुहर्रम मनाने का संदेश दिया जा सके। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से जुलूसों और अखाड़ों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मान्यता के अनुसार, 10 वीं तारीख को मुहर्रम को कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने यज़ीद के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। उनकी कुर्बानी की याद में हर वर्ष आशूरा के दिन मातमी जुलूस निकाले जाते हैं।
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हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए
मुजफ्फरपुर शहर के चंदवारा स्थित शिया बहुल कमरा मोहल्ले से पहला मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। अज़ादार नंगे पांव चलकर मातम करते रहे और 'या हुसैन' के नारों के साथ कर्बला के शहीदों को याद किया।
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अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है
इस मौके पर शिया धर्मगुरु मौलाना काज़िम शब्बीर ने कहा कि मुहर्रम बुराई, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत हमें हर दौर में अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने और मानवता की रक्षा करने की प्रेरणा देती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुहर्रम को लेकर मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जिले में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने संयुक्त आदेश जारी कर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। जिले के संवेदनशील इलाकों में पुलिस, एसएपी, बीएसएपी तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
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पर्व से पहले प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में फ्लैग मार्च भी निकाला था, ताकि लोगों को शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में मुहर्रम मनाने का संदेश दिया जा सके। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से जुलूसों और अखाड़ों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।