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यूएई से लौटे युवक दीपू की आपबीती: अमेरिकी बेस कैंप धमाके की गूंज से दहला अबू धाबी, मिसाइल हमलों के डर में बीते

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Fri, 10 Apr 2026 12:51 PM IST
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सार

मुजफ्फरपुर के कथैया गांव निवासी दीपू हाल ही में यूएई के अबू धाबी से लौटे हैं और उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की भयावह स्थिति साझा की है। दीपू यूरो मैकेनिकल कंपनी में काम कर रहे थे।

Muzaffarpur Bihar news : young who return home from uae said he cannot forget that blast
दीपू ने बताई आपबीती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भले ही सीजफायर की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच मुजफ्फरपुर के कथैया थाना क्षेत्र के कथैया गांव निवासी दीपू तीन दिन पहले यूएई से अपने घर लौटे। घर लौटने के बाद उन्होंने खाड़ी देशों में चल रहे हालात की आपबीती साझा की, जिसने वहां की सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को उजागर किया।

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अबू धाबी में नौकरी और अचानक बढ़ा तनाव

दीपू बताते हैं कि वे करीब छह महीने पहले यूएई के अबू धाबी गए थे और वहां यूरो मैकेनिकल कंपनी के टेक्निकल डिवीजन में काम कर रहे थे। नौकरी के शुरुआती चार महीने तक सब सामान्य था, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण हालात अचानक बदल गए। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि इतना सुरक्षित माना जाने वाला देश भी मिसाइल हमलों की चपेट में आ सकता है।
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यूएस बेस कैंप धमाके से फैला डर

दीपू के अनुसार, जिस इलाके में वे रहते थे वहां से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर अमेरिकी बेस कैंप स्थित था, जहां एक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी थी। घटना के समय वे अपने घर पर ही थे, लेकिन तेज धमाके ने सभी को दहशत में डाल दिया। इस घटना के बाद लगातार डर का माहौल बना रहा और परिवार की चिंता भी बढ़ गई।

हजारों विदेशी कर्मचारी रहते थे साथ

दीपू ने बताया कि जिस स्थान पर वे रहते थे वहां 500 से अधिक लोग विभिन्न देशों से आए हुए थे, जिनमें सबसे अधिक भारतीय थे। वर्तमान हालात को देखते हुए कंपनी ने सभी कर्मचारियों को छुट्टी देकर अपने देश भेजने का फैसला लिया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि स्थिति सामान्य होने तक सभी अपने घरों में ही रहें और परिवार के साथ समय बिताएं।

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पिता की खुशी और डर का अनुभव

दीपू के पिता पुलेंद्र सिंह ने बताया कि बेटा युद्ध जैसे हालात के बीच सुरक्षित घर लौट आया है, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि रोजाना टीवी और न्यूज में युद्ध और हमलों की खबरें देखकर डर बना रहता था। परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं, जिनमें बड़ा बेटा गुजरात में काम करता है जबकि छोटा दीपू अबू धाबी में नौकरी करता था।

मोबाइल अलर्ट सिस्टम से बढ़ती सतर्कता

दीपू ने बताया कि तनाव के दौरान वहां की सरकार और सेना लगातार मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भेजती थी। किसी भी संभावित हमले या खतरे की स्थिति में तुरंत सुरक्षा अलर्ट मिल जाता था, जिसके बाद सभी लोग सेफ रूम में चले जाते थे। स्थिति सामान्य होने पर “ऑल क्लियर” का मैसेज भेजा जाता था। वे लगातार मोबाइल पर नजर रखते थे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सतर्क हो सकें। अब घर लौटकर वे अपने परिवार के साथ समय बिताकर बेहद खुश हैं।

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