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Bihar: अडियल रवैया छोड़ें बालेन शाह! जगद्गुरु बोले- अयोध्या-जनकपुर के दिलों को नहीं बांट सकती सीमा की दीवारें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Mon, 20 Apr 2026 09:10 PM IST
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सार
प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सीतामढ़ी में राम कथा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की नीतियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने नेपाल द्वारा सीमा पर बढ़ाई गई सख्ती को भारत-विरोधी मानसिकता करार देते हुए कहा कि इससे मिथिलांचल के सीमावर्ती जिलों में सदियों पुराने 'बेटी-रोटी' के संबंध प्रभावित हो रहे हैं।
संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने पड़ोसी देश नेपाल के नेतृत्व और वहाँ की नई राजनीतिक दिशा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सीतामढ़ी में चल रही नौ दिवसीय राम कथा के दौरान महाराज जी ने नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) की कार्यशैली को भारत-विरोधी मानसिकता से प्रेरित बताया। जनकपुर धाम में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि नेपाल ने अपना रवैया नहीं बदला, तो दोनों देशों के सदियों पुराने 'बेटी-रोटी' के संबंधों पर गहरा संकट आ सकता है।
सीमा पर सख्ती से 'बेटी-रोटी' के रिश्तों में कड़वाहट
जगद्गुरु ने नेपाल द्वारा हाल ही में लागू किए गए कठोर सीमा प्रबंधन नियमों पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का रिश्ता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत है। महाराज जी ने जोर देते हुए कहा कि सीमा पर बढ़ती सख्ती के कारण मिथिलांचल की सामाजिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो रही है। हमारे यहाँ शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक व्यापार नेपाल से इस कदर जुड़े हैं कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक दीवारें खड़ी करके लोगों के दिलों को नहीं बांटा जा सकता।
मिथिलांचल के इन जिलों पर पड़ रहा है बुरा असर
अपने संबोधन में जगद्गुरु ने बिहार के सीमावर्ती जिलों— सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण, दरभंगा और सुपौल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर सख्ती का सबसे ज्यादा नुकसान यहाँ के आम नागरिकों को हो रहा है। इससे न केवल स्थानीय छोटे व्यापारियों का काम धंधा चौपट हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों के बीच होने वाले वैवाहिक संबंधों में भी बाधाएं आ रही हैं, जिससे समाज में कड़वाहट बढ़ रही है।
अयोध्या-जनकपुर के आध्यात्मिक जुड़ाव की अनदेखी
भगवान राम और माता सीता के अटूट प्रेम का उदाहरण देते हुए महाराज जी ने कहा कि अयोध्या और जनकपुर के बीच का धार्मिक रिश्ता कभी टूट नहीं सकता। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि बालेन शाह के कुछ निर्णय यह संकेत देते हैं कि वे भारत के प्रति सकारात्मक रुख नहीं रख रहे हैं। यह स्थिति दक्षिण एशिया की शांति और आपसी सहयोग के लिए शुभ संकेत नहीं है।
महाराज जी ने अंत में दोनों देशों की सरकारों से आग्रह किया कि वे कूटनीतिक मेज पर बैठकर इन समस्याओं का तुरंत समाधान निकालें। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल सरकार भविष्य में संतुलित नीति अपनाएगी जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने साफ कहा कि भारत-नेपाल के संबंध कूटनीतिक कम और आध्यात्मिक अधिक हैं, इसलिए सरकारों को नीतियों से ऊपर उठकर जनभावनाओं और साझा संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।
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सीमा पर सख्ती से 'बेटी-रोटी' के रिश्तों में कड़वाहट
जगद्गुरु ने नेपाल द्वारा हाल ही में लागू किए गए कठोर सीमा प्रबंधन नियमों पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का रिश्ता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत है। महाराज जी ने जोर देते हुए कहा कि सीमा पर बढ़ती सख्ती के कारण मिथिलांचल की सामाजिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो रही है। हमारे यहाँ शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठान और दैनिक व्यापार नेपाल से इस कदर जुड़े हैं कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक दीवारें खड़ी करके लोगों के दिलों को नहीं बांटा जा सकता।
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मिथिलांचल के इन जिलों पर पड़ रहा है बुरा असर
अपने संबोधन में जगद्गुरु ने बिहार के सीमावर्ती जिलों— सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण, दरभंगा और सुपौल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर सख्ती का सबसे ज्यादा नुकसान यहाँ के आम नागरिकों को हो रहा है। इससे न केवल स्थानीय छोटे व्यापारियों का काम धंधा चौपट हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों के बीच होने वाले वैवाहिक संबंधों में भी बाधाएं आ रही हैं, जिससे समाज में कड़वाहट बढ़ रही है।
अयोध्या-जनकपुर के आध्यात्मिक जुड़ाव की अनदेखी
भगवान राम और माता सीता के अटूट प्रेम का उदाहरण देते हुए महाराज जी ने कहा कि अयोध्या और जनकपुर के बीच का धार्मिक रिश्ता कभी टूट नहीं सकता। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि बालेन शाह के कुछ निर्णय यह संकेत देते हैं कि वे भारत के प्रति सकारात्मक रुख नहीं रख रहे हैं। यह स्थिति दक्षिण एशिया की शांति और आपसी सहयोग के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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समाधान की अपील: कूटनीति से ज्यादा आध्यात्मिक हैं संबंधमहाराज जी ने अंत में दोनों देशों की सरकारों से आग्रह किया कि वे कूटनीतिक मेज पर बैठकर इन समस्याओं का तुरंत समाधान निकालें। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल सरकार भविष्य में संतुलित नीति अपनाएगी जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने साफ कहा कि भारत-नेपाल के संबंध कूटनीतिक कम और आध्यात्मिक अधिक हैं, इसलिए सरकारों को नीतियों से ऊपर उठकर जनभावनाओं और साझा संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।

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