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NEET Re-Exam: पांच दिन जिस FIR को छिपाकर रखा, उसमें क्या छिपा था; सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड पर बड़ा खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ लखीसराय Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 26 Jun 2026 11:28 AM IST
सार

नीट यूजी पुनर्परीक्षा में पेपरलीक से भी ज्यादा बड़ी साजिश रची गई थी। लखीसराय से सॉल्वर गैंग के सदस्य पकड़ाने के बाद यह खुलासा हुआ है। डमी कैंडिडेट को मैनेज करना, उसे सेंटर तक बुलाना और परीक्षा दिलाने तक के लिए एक नेटवर्क काम कर रहा था। बिहार पुलिस की विशेष टीम अब हर एक कड़ी को जोड़ रही है। आइये जानते हैं पूरा मामला...

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NEET Re Exam Scam Solver Gang Built Network From Biometric Verification to Exam Hall Many Arrested
लखीसराय पुलिस ने सॉल्वर गैंग के सस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पर आयोजित नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा में उजागर सॉल्वर गैंग की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। केंद्र अधीक्षक अमीत कुमार की शिकायत पर किऊल थाना में दर्ज एफआईआर के अनुसार, फर्जी परीक्षार्थियों को बायोमेट्रिक सत्यापन पार कर परीक्षा कक्ष तक पहुंचाने के लिए कथित रूप से पूरा नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस अब री-सीन क्रिएशन, पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए नेटवर्क की एक-एक कड़ी जोड़ रही है। मामले में 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, कथित मास्टरमाइंड अब भी पुलिस की गिरफ्त से फरार चल रहा है।

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पुलिस की ओर से बताया गया कि 21 जून को नीट- यूजी परीक्षा के दौरान केंद्र अधीक्षक अमीत कुमार को सूचना मिली कि कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा दे रहे हैं। सूचना मिलते ही परीक्षा कक्षों का सत्यापन कराया गया। संदेह सही मिलने पर पुलिस और दंडाधिकारी को बुलाया गया। जांच के दौरान छह कथित फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा गया और पूछताछ के साथ ही पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
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दोस्तों के भरोसे नेटवर्क तक पहुंची छात्रा
पूछताछ में गिरफ्तार छात्रा ने बताया कि वह परिचितों और दोस्तों के माध्यम से इस नेटवर्क के संपर्क में आई थी। उसे भरोसा दिलाया गया था कि उसकी जगह प्रशिक्षित सॉल्वर परीक्षा देगा। छात्रा के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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बायोमेट्रिक बना जांच का सबसे अहम बिंदु
एफआईआर में आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग कर वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा भवन में प्रवेश दिलाया गया। इसी मामले में सुपरवाइजर समेत आठ बायोमेट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह केवल लापरवाही थी या पहले से रची गई साजिश।

सीन री-क्रिएशन में जुड़ रहीं कड़ियां
जांच के दौरान पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को परीक्षा केंद्र ले जाकर पूरे घटनाक्रम का सीन री-क्रिएशन करा रही है। किस रास्ते से परीक्षा केंद्र पहुंचे, बायोमेट्रिक सत्यापन कैसे हुआ और किसने परीक्षा कक्ष तक पहुंचाया, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कार्रवाई से बचने के लिए पहले से अलग-अलग स्तर पर योजना तैयार कर रखी थी। एफआईआर और पूछताछ के अनुसार, मयंक कश्यप उर्फ अश्वनी कुमार, जो एनएमसीएच के चौथे वर्ष का छात्र बताया गया है, नेटवर्क के समन्वय की अहम कड़ी था। आरोप है कि उसने बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य लेने वाले प्रमोद कुमार यादव से संपर्क स्थापित कर अपनी टीम के लोगों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। जांच में आर्यन कुमार की भूमिका अभ्यर्थियों और नेटवर्क के बीच संपर्क सूत्र के रूप में सामने आई है। वहीं रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट, सौरभ कुमार और मयंक कश्यप उर्फ अश्वनी कुमार पर कथित सॉल्वरों को तैयार कर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और पूरे ऑपरेशन के संचालन का आरोप है। राजन कुमार की भूमिका की भी पुलिस जांच कर रही है।
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मास्टर माइंड कौन है? क्या योजना बनाई थी?
सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड नालंदा ने भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज के एमबीबीएस फोर्थ ईयर का छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा है। फिलहाल वह फरार है। पुलिस को आशंका है कि इसी ने लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर नौ मेडिकल छात्रों को अभ्यर्थियों के स्थान पर बैठाकर परीक्षा दिलाने की योजना बनाई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को सौंप दी गई है। ईओयू अब गिरोह के आर्थिक लेन-देन, संपर्क सूत्रों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने पकड़े जाने की स्थिति में अपनी असली पहचान छिपाने की तैयारी कर रखी थी। आरोप है कि कई सदस्य अलग-अलग नामों और फर्जी पहचान पत्रों के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचे थे, ताकि गिरफ्तारी के बाद भी उनकी वास्तविक पहचान और पूरे नेटवर्क तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके।

अब तक 30 लोगों को बिहार पुलिस ने किया गिरफ्तार
दरअसल, पेपरलीक के आरोपों को 21 जून को बिहार के 35 शहर समेत पूरे देश में नीट पुनर्परीक्षा हुई थी। गड़बड़ी रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन त्रि-स्तरीय सुरक्षा की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद सॉल्वर गैंग ने पेपरलीक से बड़ी साजिश रची। हालांकि, पुलिस ने इनके गिरोह के सदस्यों को पकड़ लिया। अब पुलिस की जांच में सामने आया है कि सॉल्वर गैंग के सदस्यों का कनेक्शन गया, पटना, लखीसराय के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल से है। इन राज्यों के कॉलेज में सॉल्वर गैंग के सदस्य पढ़ते थे। यह लोग बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मियों की मदद से असली परीक्षार्थी की जगह बैठकर परीक्षा देने की कोशिश में थे। इसके लिए 38 से 40 लाख में डील तय हुई। बिहार पुलिस ने इस मामले में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया था। 

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