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Bihar: 40 साल पुराने आशियाने पर संकट! दबंगों ने तोड़ीं परिवारों की झोपड़ियां, मारपीट के बाद थाने पहुंचे पीड़ित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: पटना ब्यूरो Updated Tue, 16 Jun 2026 09:06 AM IST
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सार

पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र के नौआचक गांव में करीब 50 दलित परिवारों ने दबंगों पर घर तोड़ने, मारपीट करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। 40 वर्षों से सरकारी जमीन पर रह रहे परिवारों ने पुलिस से सुरक्षा, पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

40 Year Old Settlement Attacked Goons Destroy Huts Assault Dalit Families
दलितों से मारपीट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र स्थित इब्राहिमपुर पंचायत के नौआचक गांव से दलित परिवारों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। करीब चार दशक से सरकारी जमीन पर रह रहे लगभग 50 दलित परिवारों ने स्थानीय दबंगों पर मारपीट, घर तोड़ने और लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने पुलिस से सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से सरकारी जमीन पर झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। हाल के दिनों में कुछ लोगों ने उनके घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और विरोध करने पर मारपीट भी की। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर बाढ़ थाना पहुंचे।
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सरकारी जमीन को बनाया था आशियाना
जानकारी के अनुसार, ये परिवार मूल रूप से दियारा क्षेत्र के निवासी हैं। समय के साथ विस्थापन और जमीन की कमी के कारण वे नौआचक इलाके में आकर बस गए। निजी भूमि नहीं होने की वजह से उन्होंने सरकारी जमीन पर अपना आशियाना बनाया और पिछले लगभग 40 वर्षों से वहीं जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि, आसपास की कृषि भूमि के मालिक इन परिवारों के वहां रहने का विरोध करते रहे हैं। इसी को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
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घर उजाड़ने और धमकाने का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें इलाके से हटाने के उद्देश्य से समय-समय पर दबाव बनाया जाता है। कई बार उनके घरों को नुकसान पहुंचाया गया और विरोध करने पर मारपीट की गई। उनका कहना है कि इस बार भी झोपड़ियों को तोड़ दिया गया, जिससे कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

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वर्षों से भूमि आवंटन का इंतजार
स्थानीय निवासी धर्मवीर मांझी ने बताया कि पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सरकारी जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि रहने के लिए न तो जमीन मिली और न ही बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।


मिट्टी भरने पर भी रोकने का आरोप
पीड़िता तिलका देवी ने बताया कि जब भी वे अपने रहने वाले स्थान पर मिट्टी भरकर जमीन को समतल करने का प्रयास करती हैं, कुछ लोग मिट्टी हटाकर ले जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार उनके घर भी तोड़े गए और विरोध करने पर मारपीट की गई।

फिलहाल पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षा, स्थायी पुनर्वास और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
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