Bihar Budget 2026: किसान, खेत और कमाई...बजट में कृषि पर बड़ा फोकस, जानें सरकार की योजनाएं
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद पेश किए गए बजट 2026 में सरकार ने कृषि, पशुपालन, सहकारिता और सिंचाई को केंद्र में रखते हुए किसानों के लिए व्यापक रोडमैप रखा है।
विस्तार
कृषि प्रधान राज्य बिहार और रिकॉर्ड उत्पादन
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां करीब 89 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और लगभग 76 प्रतिशत लोग कृषि और उससे जुड़े कार्यों से अपनी आजीविका चलाते हैं। कृषि रोडमैप के सफल क्रियान्वयन के कारण वर्ष 2005 से अब तक खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम आकलन के अनुसार राज्य में कुल 326.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक है।
वर्ष 2024-25 में देश में बिहार का स्थान मखाना और लीची उत्पादन में पहला, मक्का में दूसरा, शहद में चौथा, चावल में पांचवां और गेहूं उत्पादन में छठा रहा है। देश में उत्पादित मखाना का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार में होता है। किसानों को समर्थन देने और मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है।
डिजिटल कृषि और जलवायु अनुकूल खेती पर जोर
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के डेटा को एकीकृत करने के लिए कृषि विभाग के तहत डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन किया गया है। राज्य के सभी 38 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत 190 गांवों को जलवायु अनुकूल मॉडल कृषि गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत 3 लाख मिट्टी नमूनों का विश्लेषण कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गए हैं। इसके अलावा, चालू वित्तीय वर्ष में 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।
मशरूम, भंडारण और बाजार व्यवस्था में सुधार
बिहार देश में मशरूम उत्पादन में अग्रणी है और वर्तमान में यहां 44,000 मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए भंडारण, अनुदानित दर पर गोदाम और कोल्ड स्टोरेज, मूल्य संवर्धन, विपणन और प्रसंस्करण को प्राथमिकता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि यांत्रिकरण को और मजबूत करने के लिए एआई युक्त यांत्रिक कृषि मिशन के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन और स्टार्टअप पर फोकस
राज्य सरकार ने बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत शुरुआत में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसके तहत छंटाई और ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चैम्बर्स, गोदाम और प्रोसेसिंग सेंटर बनाए जाएंगे। सोनाचूर, मोकरी, कतरनी और मर्चा जैसी सुगंधित चावल की किस्मों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित होंगी। श्री अन्न का उत्पादन दोगुना करने और स्ट्रॉबेरी व ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों के उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा देने की भी योजना है। बिहार को कृषि स्टार्टअप का हब बनाने और GI टैग उत्पादों के लिए समर्पित बाजार देने के उद्देश्य से बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया चल रही है।
कृषि बाजार, ई-नाम और ग्रामीण हाट
राज्य के 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इनमें से 20 बाजार प्रांगण ई-नाम से जुड़ चुके हैं और 34 को जोड़ा जाना है। ग्रामीण हाटों के विकास के लिए पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
किसान सम्मान निधि और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि शुरू की जाएगी, जिसके तहत किसानों को सालाना 3,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत दलहन, तेलहन, मक्का, फल और सब्जियों के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दलहन उत्पादन को 3.93 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 11.27 लाख मीट्रिक टन, तेलहन को 1.24 से 4.81 लाख मीट्रिक टन, मक्का को लगभग दोगुना 133.05 लाख मीट्रिक टन, फलों और सब्जियों के उत्पादन को भी दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।
डेयरी, मत्स्य और पशुपालन में तेजी
राज्य में दुग्ध उत्पादन 133.98 लाख मीट्रिक टन, अंडा 378.39 करोड़, मांस 4.21 लाख मीट्रिक टन और मत्स्य उत्पादन 9.59 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। बिहार देश में अंडा उत्पादन में पहला, मत्स्य में चौथा, दुग्ध में छठा और मांस में नौवां स्थान रखता है। गोट सीमेन स्टेशन, वन हेल्थ प्लेटफॉर्म, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड मशीन और बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम 2025 जैसे कदमों से पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है।
सहकारिता और FPO से किसानों को बाजार से जोड़ने की पहल
राज्य के 38 जिलों के 534 प्रखंडों में प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियां बनाई गई हैं। सब्जी प्रसंस्करण, मेगा फूड पार्क, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और तरकारी आउटलेट्स के जरिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने की योजना है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों में 100 पंचायत स्तरीय FPO बनाए गए हैं, जिनके जरिए मखाना, मशरूम, चूड़ा और आंवला जैसे उत्पादों का व्यवसाय शुरू हो चुका है।
सिंचाई और जल संसाधन पर बड़ा फोकस
“जल-जीवन-हरियाली अभियान” के तहत भूजल संरक्षण, तालाब और आहर-पईन के विकास पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 35,000 नलकूप लगाए गए हैं। “हर खेत तक सिंचाई का पानी” योजना के तहत हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल की गई है। कोशी-मेची लिंक परियोजना, पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली, बरनार जलाशय, गंगा जल आपूर्ति योजना और सोन नदी आधारित पेयजल परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बाढ़ से सुरक्षा के लिए 2026 से पहले 216 कटाव निरोधक और तटबंध सुरक्षा योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, विश्व बैंक की सहायता से बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना (BWSIMP) के लिए 4,415 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है।
किसानों को मिला था बड़ा तोहफा
बिहार सरकार ने 2025 के बजट में किसानों के लिए कई बड़े ऐलान किए थे। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे। चतुर्थ कृषि रोडमैप के तहत बिहार मिलेट मिशन का गठन किया गया। आम, मशरूम, टमाटर, आलू और प्याज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आम, लीची, मखाना और मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया।
