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Bihar Budget 2026: महिला से साइबर सुरक्षा तक, गृह विभाग के लिए मेगा बजट; 20,132.87 करोड़ का रुपये आवंटित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 03 Feb 2026 04:30 PM IST
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सार

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस बार दौरान कई बड़ी योजानाओं का एलान  किया।

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बिहार बजट 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना आम बजट पेश किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार का चुनाव के बाद पहला पूर्ण बजट है, जिस पर राज्य की जनता, विपक्ष और सभी वर्गों की निगाहें टिकी हुई थीं। इस बजट में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खास फोकस देखने को मिला है। इस बजट में गृह विभाग (पुलिस–प्रशासन) के लिए कुल ₹20,132.87 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
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भर्ती, नए थाने और सुरक्षा ढांचे का विस्तार

गृह विभाग के तहत चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न पदों पर 37,931 नियुक्तियों की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 26,859 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। वहीं, आगामी वित्तीय वर्ष में 25,134 नए पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है। अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 260 ओपी को थाना के रूप में और 24 रेल पीपी को रेल थाना के रूप में उत्क्रमित किया गया है। इसके अलावा 44 नए साइबर थाना और 28 यातायात थानों का भी सृजन किया गया है।
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पुलिस भवन और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर

वर्तमान वित्तीय वर्ष में थाना भवनों, एससी/एसटी थाना, नक्सल थाना, मॉडल थाना, पुलिस अधीक्षक कार्यालय-सह-आवास, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय-सह-आवास, महिला-पुरुष बैरक और आवासीय भवनों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। पटना में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) भवन, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय, साइबर अपराध इकाई, विशेष शाखा और आईपीएस मेस के भवन निर्माण की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। गर्दनीबाग में बिहार मानवाधिकार आयोग के G+4 भवन के लिए 22.98 करोड़ रुपये और लोदीपुर, पटना में STF मुख्यालय भवन के लिए 63.11 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

सीसीटीएनएस और क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर से डिजिटल पुलिसिंग मजबूत

राज्य के 968 पुलिस थाना और चौक अब सीसीटीएनएस से जुड़े हैं, जबकि बाकी 343 थानों को एनसीआरबी के कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर से जोड़ने का काम चल रहा है। नागरिक सेवाओं के पोर्टल के जरिए लोगों को पुलिस से जुड़ी 15 अलग-अलग सेवाओं की जानकारी आसानी से मिल रही है। क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर पोर्टल भी लागू किया गया है, जिससे जीरो एफआईआर सीधे संबंधित राज्यों को भेजी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर भाषा बदलने की सुविधा भी उपलब्ध है।

RSS और डायल 112: त्वरित मदद से अपराध में कमी

आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) के जरिए अब तक 51 लाख से अधिक लोगों को सेवाएं दी जा चुकी हैं और रोजाना करीब 6,000 लोगों को मदद मिल रही है। 15 दिसंबर 2025 तक 20.59 लाख से अधिक लोगों को सहायता दी गई, जिनमें महिला हिंसा, अपराध, आगजनी, सड़क दुर्घटना, ट्रैफिक और मद्य निषेध से जुड़े मामले शामिल हैं। सितंबर 2024 से शुरू “सुरक्षित सफर सुविधा” के तहत अकेली यात्रा करने वाली महिलाओं को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यह सुविधा शुरू करने वाला बिहार देश का तीसरा राज्य बना है।

डायल 112 के जरिए घरेलू हिंसा, महिला अपराध और बच्चों से जुड़े 4.30 लाख से अधिक मामलों, स्थानीय विवाद और मारपीट के 26.39 लाख मामलों, सड़क दुर्घटना के 2.18 लाख मामलों और आगलगी के 1.22 लाख मामलों में त्वरित सहायता दी गई। इसके अलावा 16.89 लाख अन्य मामलों में भी मदद पहुंचाई गई। इसके असर से वर्ष 2025 में डकैती, महिलाओं के खिलाफ अपराध, चोरी और दंगों के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

भावी सुरक्षा योजनाएं और फॉरेंसिक ढांचा

पटना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बिहार राज्य औद्योगिक सुरक्षा बटालियन (SISF-3 और SISF-4) की स्थापना हेतु भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस की नई इकाइयों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए भी जमीन हस्तांतरण की कार्रवाई जारी है।
राज्य में 9 अतिरिक्त क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के भवनों में से 5 का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही, बिहार में राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) का ऑफ-कैंपस स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है।

सैनिक कल्याण, कब्रिस्तान घेराबंदी और मंदिर चहारदीवारी

शहीद जवानों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 11 लाख से बढ़ाकर 21 लाख रुपये कर दी गई है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वालों के आश्रितों को 50 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है। राज्य के 9,273 चयनित कब्रिस्तानों में से 8,921 की घेराबंदी पूरी हो चुकी है और 63 पर काम जारी है। वहीं, 708 स्वीकृत योजनाओं में से 551 मंदिरों की चहारदीवारी का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

सामान्य प्रशासन: महिला आरक्षण, नियुक्तियां और युवा आयोग

महिला सरकारी कर्मियों को पदस्थापन स्थल के पास आवास सुविधा देने की स्वीकृति दी गई है। सभी सरकारी सेवाओं में सीधी नियुक्ति में राज्य की मूल निवासी महिलाओं को 35% क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना को IIM बोधगया के सहयोग से लागू किया गया है और बिहार युवा आयोग का गठन किया गया है। अप्रैल 2025 से अब तक विभिन्न आयोगों को कुल 1,41,975 पदों की अधियाचना भेजी गई है और 44,088 सरकारी नौकरियों का सृजन किया गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 2025 में ट्रैप, आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार दुरुपयोग से जुड़े कुल 108 मामले दर्ज किए हैं। विशेष निगरानी इकाई ने भी 23 मामलों में कार्रवाई की है।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण: हर घर नल का जल

‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत हजारों छूटे हुए टोलों में जलापूर्ति योजनाओं पर काम चल रहा है। लाखों परिवारों को नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है।  जीरो ऑफिस डे और मोबाइल पेयजल के जरिए योजनाओं की निगरानी की जा रही है और बंद योजनाओं को फिर से चालू किया गया है। आने वाले समय में 16.14 लाख घरों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

न्यायिक ढांचे का विस्तार

पटना हाईकोर्ट परिसर में प्रशासनिक, आईटी भवन, ऑडिटोरियम, ADR भवन, मल्टी लेवल पार्किंग और आवासीय भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। विभिन्न न्यायालय परिसरों और जज आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है या प्रगति पर है। साथ ही, बिहार के अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए समग्र नीति को मंजूरी दी गई है।

जानें पिछली बार क्या था खास बजट में

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पिछली बार गृह विभाग से संबंधित कई बड़े एलान किए गए थे - फोटो : अमर उजाला

बिहार सरकार ने 2025 के बजट में गृह विभाग से संबंधित कई बड़े ऐलान किए थे। आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए 260 ओपी को थाना में बदला गया और 24 रेल ओपी को रेल थाना में तब्दील किया गया। इसके साथ ही 44 नए साइबर थाना और 28 यातायात थानों का सृजन किया गया। पुलिस थानों, कार्यालयों और आवासीय भवनों के निर्माण की प्रक्रिया भी उस समय जारी थी। डायल 112 को स्वास्थ्य, अग्निशमन, महिला बाल सुरक्षा और हाईवे पेट्रोलिंग सेवाओं के साथ एकीकृत किया गया। वर्ष 2024 में घरेलू हिंसा के 1,43,620 मामलों में डायल 112 द्वारा त्वरित सहायता प्रदान की गई और महिलाओं के लिए ‘सुरक्षित सफर सुविधा’ को राज्य के सभी जिलों में लागू किया गया।

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