Bihar Budget 2026: उद्योग पर सरकार का बड़ा दांव, रोजगार और निवेश को गति देने की तैयारी
Bihar Budget 2026-27: बिहार बजट 2026 में उद्योग विभाग के लिए रोजगार केंद्रित नीति, नई औद्योगिक इकाइयों, टेक हब, स्टार्ट-अप समर्थन और भूमि बैंक पर जोर दिया गया है। सरकार ने निवेश बढ़ाकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा है।
विस्तार
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट रखा। विधानसभा चुनाव के बाद यह नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्ण बजट है, जिसे रोजगार, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस बजट में उद्योग विभाग को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं और अब तक की प्रगति को सामने रखा गया है।
रोजगार केंद्रित औद्योगिक नीति पर जोर
सरकार ने बजट में स्पष्ट किया कि राज्य की औद्योगिक नीति का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक रोजगार सृजन है। इसी दिशा में सूक्ष्म और लघु उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय का गठन किया है, ताकि इस क्षेत्र को संस्थागत समर्थन मिल सके। इसके साथ ही उद्यमियों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बिहार उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग का गठन भी किया गया है।
बिहार को टेक हब बनाने की दीर्घकालिक योजना
सरकार ने बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक हब के रूप में विकसित करने की योजना दोहराई है। इसके तहत डिफेन्स कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से बिहार को एक ‘वैश्विक बैंक एंड-हब’ और ‘ग्लोबल वर्कप्लेस’ के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही स्टार्ट-अप और न्यू एज इकोनॉमी क्षेत्रों में राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार सृजन के लिए सक्षम बनाने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।
नई नीतियों से निवेश माहौल बनाने की कोशिश
औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार वस्त्र एवं चमड़ा नीति (संशोधन), 2025 और बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन (संशोधन) नीति, 2025 को लागू किया गया है। इसके अलावा बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज, 2025 की घोषणा के जरिए राज्य में नए निवेश माहौल के निर्माण का दावा किया गया है।
उद्यमी योजनाएं और वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 209.88 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। गरीब परिवारों के आर्थिक विकास के उद्देश्य से बिहार लघु उद्यमी योजना के अंतर्गत 212.86 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है। कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 6,225 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 2,060 आवेदकों को रोजगार भी मिला है।
स्टार्ट-अप्स में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
स्टार्ट-अप नीति के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों से अब तक कुल 1,597 स्टार्ट-अप्स का चयन किया गया है। इनमें 235 स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा स्थापित हैं। इन सभी स्टार्ट-अप्स को कुल 84.96 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है, जिससे नवाचार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
भूमि बैंक और औद्योगिक ढांचे का विस्तार
आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार के तहत भूमि बैंक रिवॉल्विंग फंड के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1,550 करोड़ रुपये की राशि भू-अर्जन परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई गई है। गयाजी के डोभी अंचल में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड की स्थापना की गई है। इसके साथ ही औद्योगिक विकास के लिए विभिन्न जिलों में 20,767 एकड़ भूमि के भू-अर्जन का प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 693 एकड़ सरकारी भूमि का हस्तांतरण शामिल है।
निवेश और रोजगार के आंकड़े
बियाडा द्वारा वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 767 इकाइयों को 1,027 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इसमें 13,438 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 75,518 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। इसके अलावा अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर के तहत गया में आईएमसी के फेज-2 को विकसित किया जाएगा। फतुहा के पास मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और फिनटेक सिटी की स्थापना तथा सारण जिले के अमनौर में फार्मास्यूटिकल पार्क विकसित करने की योजना भी बजट में दोहराई गई है।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना बिहार में प्रभावी रूप से लागू है और राज्य इस योजना में देश में अग्रणी स्थान पर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बैंकों ने 2,053 आवेदकों को 200.11 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1.07 लाख आवेदकों को प्रशिक्षण, 17,647 को ऋण वितरण और 48,988 को टूल किट उपलब्ध कराई गई है।
आगे की कौशल विकास योजना
सरकार ने बताया कि कौशल विकास कार्यक्रम के तहत आने वाले समय में राज्य के 2,690 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
पिछले बजट में उद्योग विभाग के लिए सरकार ने कई बड़े एलान किए थे। इनमें पटना, मुजफ्फरपुर व पूर्णिया की तर्ज पर शेष प्रमंडलों में खादी मॉल का निर्माण और मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 39 हजार से अधिक लाभुकों को ₹2,900 करोड़ से अधिक की सहायता आदि शामिल हैं।
