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बिहार दरोगा भर्ती: परीक्षा शुरू होने के बाद पूर्णिया से लीक हुआ प्रश्नपत्र, केंद्राधीक्षक और कर्मी की मिलीभगत

Wed, 28 Oct 2026 07:06 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 28 Oct 2026 07:06 AM IST
सार

बिहार दरोगा भर्ती परीक्षा में धांधली की जांच के दौरान आर्थिक अपराध इकाई ने पूर्णिया के परीक्षा केंद्र से प्रश्नपुस्तिकाएं बाहर भेजे जाने का खुलासा किया है। रिपोर्ट में केंद्राधीक्षक और कार्यालय कर्मी की कथित मिलीभगत सामने आई। दो अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने की बात भी सामने आई है। मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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पेपर लीक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित दरोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक करने और सॉल्वर गिरोह से हल कराने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई की विशेष जांच टीम ने पाया है कि परीक्षा शुरू होने के बाद पूर्णिया के एक केंद्र से अनधिकृत रूप से प्रश्नपुस्तिकाएं बाहर भेजी गईं। इन प्रश्नपत्रों के उत्तर तैयार करा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए, जिससे वे परीक्षा में सफल भी हो गए।
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प्राथमिकी दर्ज और जांच प्रक्रिया
इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने मंगलवार को भारतीय न्याय संहिता, 2023 और बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रथम पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 51212241 और द्वितीय पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 52212038 को परीक्षा केंद्र से अनधिकृत रूप से बाहर भेजा गया। यह धांधली पूर्णिया सिटी स्थित 2 आरपीसी हाई स्कूल केंद्र पर परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दी गई।
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केंद्राधीक्षक और कर्मी की मिलीभगत
विशेष जांच टीम ने पड़ताल में केंद्राधीक्षक मो. मुज्ज़फर आलम और उनके सहयोगी कार्यालय कर्मी विवेक कुमार की संलिप्तता पाई है। धांधली को अंजाम देने के लिए वास्तविक सीटिंग प्लान से छेड़छाड़ कर नया सीटिंग प्लान तैयार किया गया था। इसके साथ ही साक्ष्य छिपाने और आयोग को गलत प्रतिवेदन भेजने के प्रमाण मिले हैं। केंद्र पर निर्धारित नियमों की अनदेखी कर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से बैठाया गया, वीक्षकों की मनमाने ढंग से नियुक्ति की गई और ड्यूटी चार्ट पर गलत हस्ताक्षर कराए गए। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, अभिलेखों और वीक्षकों के लिखित बयानों की गहन जांच से इस पूरे मामले की पुष्टि हुई है।

परीक्षा शुरू होने के बाद हुआ लीक
जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्रों की सुरक्षा शृंखला टूटने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। दोनों प्रश्नपुस्तिकाएं परीक्षा आरंभ होने के उपरांत ही केंद्र से बाहर निकाली गई थीं। इस धांधली से अनुचित लाभ उठाने वाले अभ्यर्थी रूपेश कुमार और नरेश कुमार प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे, जिनमें से रूपेश ने मुख्य परीक्षा भी पास कर ली थी। दोनों अभ्यर्थियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई के लिए आयोग को अनुशंसा भेजी जा रही है। गौरतलब है कि 2 सितंबर को गठित एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा को पहले ही रद्द किया जा चुका है।
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