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Bihar News : राजस्व वसूली में सुस्ती पर विभाग सख्त, पटना समेत 14 जिलों के खनन अधिकारियों को मिला अल्टीमेटम
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Tue, 06 Jan 2026 11:28 PM IST
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सार
Bihar : खान एवं भूतत्व विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। पटना सहित 14 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों और खनन निरीक्षकों से जवाब-तलब किया गया है, जिससे अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में राजस्व संग्रहण के लक्ष्य को लेकर खान एवं भूतत्व विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने मंगलवार को एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक के दौरान राजस्व वसूली में लापरवाही बरतने वाले जिलों पर कड़ा रुख अपनाया। लक्ष्य से पीछे चल रहे पटना सहित 14 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों और खनन निरीक्षकों से जवाब-तलब किया है।
इन 14 जिलों के प्रदर्शन पर गिरी गाज
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण जिलों में राजस्व वसूली की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। खान एवं भूतत्व विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने निम्नलिखित जिलों के अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन प्रमुख जिलों में राजधानी पटना समेत गया, मुंगेर, लखीसराय, जहानाबाद और रोहतास शामिल हैं। अन्य जिलों में भागलपुर, कटिहार, मधेपुरा, बेगूसराय, मधुबनी, वैशाली, शिवहर और सारण शामिल हैं।
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बालू घाटों की नीलामी और अवैध खनन पर सर्जिकल स्ट्राइक
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में निदेशक ने केवल राजस्व ही नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र से जुड़ी अन्य जटिलताओं पर भी कड़े निर्देश दिए। सफेद और पीले बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आदेश दिया गया है। अवैध खनन के दौरान जब्त किए गए बालू और वाहनों की नीलामी प्रक्रिया को जनवरी माह के अंत तक हर हाल में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रवर्तन की कार्रवाइयों में तेजी लाने और दंड मद से होने वाली वसूली में ठोस प्रगति दिखाने को कहा गया है।
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एक सप्ताह का समय, फिर होगी समीक्षा
खान निदेशक मनेश कुमार मीणा ने बैठक में दो-टूक कहा कि विभागीय कार्यों की प्रगति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्रीय स्तर पर जाकर बालू घाटों की स्थिति का जायजा लें और नीलामी की बाधाओं को दूर करें। आगामी एक सप्ताह के भीतर जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने चाहिए। विभाग का मुख्य फोकस अब उन जिलों पर है जहाँ से राजस्व की प्राप्ति अधिक होती है, लेकिन वर्तमान में वे पिछड़ रहे हैं। विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा है कि एक सप्ताह बाद इन जिलों के प्रयासों की पुनः गहन समीक्षा की जाएगी। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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इन 14 जिलों के प्रदर्शन पर गिरी गाज
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण जिलों में राजस्व वसूली की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। खान एवं भूतत्व विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने निम्नलिखित जिलों के अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन प्रमुख जिलों में राजधानी पटना समेत गया, मुंगेर, लखीसराय, जहानाबाद और रोहतास शामिल हैं। अन्य जिलों में भागलपुर, कटिहार, मधेपुरा, बेगूसराय, मधुबनी, वैशाली, शिवहर और सारण शामिल हैं।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में निदेशक ने केवल राजस्व ही नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र से जुड़ी अन्य जटिलताओं पर भी कड़े निर्देश दिए। सफेद और पीले बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आदेश दिया गया है। अवैध खनन के दौरान जब्त किए गए बालू और वाहनों की नीलामी प्रक्रिया को जनवरी माह के अंत तक हर हाल में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रवर्तन की कार्रवाइयों में तेजी लाने और दंड मद से होने वाली वसूली में ठोस प्रगति दिखाने को कहा गया है।
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एक सप्ताह का समय, फिर होगी समीक्षा
खान निदेशक मनेश कुमार मीणा ने बैठक में दो-टूक कहा कि विभागीय कार्यों की प्रगति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्रीय स्तर पर जाकर बालू घाटों की स्थिति का जायजा लें और नीलामी की बाधाओं को दूर करें। आगामी एक सप्ताह के भीतर जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने चाहिए। विभाग का मुख्य फोकस अब उन जिलों पर है जहाँ से राजस्व की प्राप्ति अधिक होती है, लेकिन वर्तमान में वे पिछड़ रहे हैं। विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा है कि एक सप्ताह बाद इन जिलों के प्रयासों की पुनः गहन समीक्षा की जाएगी। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।