बिहार: एम्स पटना में दो महीने में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट, पहली बार मृतक दाता से किडनी प्रत्यारोपण
एम्स पटना में तीसरा लिवर और 15वां किडनी ट्रांसप्लांट सफल हुआ। ब्रेन डेड दाता का लिवर और एक किडनी संस्थान में प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी बिहार में आवंटित हुई। दोनों कॉर्निया भी दान किए गए।
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एम्स पटना ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में तीसरा लिवर ट्रांसप्लांट और पिछले दो महीनों में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। इसी बहु-अंग दान एवं प्रत्यारोपण प्रक्रिया के तहत पहली बार मृतक दाता से किडनी प्रत्यारोपण भी किया गया। इसके साथ ही एम्स पटना में अब तक हुए किडनी प्रत्यारोपण की संख्या 15 हो गई है। दाता की दूसरी किडनी को स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन, बिहार के माध्यम से राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आवंटित किया गया।
लिवर ट्रांसप्लांट 2 अक्टूबर 2026 को 29 वर्षीय पुरुष मरीज का किया गया। मरीज विल्सन डिजीज के कारण अंतिम अवस्था के लिवर रोग से पीड़ित था। करीब 12 घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर है और विशेषज्ञों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है।
लिवर प्रत्यारोपण की सर्जरी सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) उत्पल आनंद के नेतृत्व में डॉ. कुणाल परासर, डॉ. बसंत नारायण सिंह और डॉ. किसलय कांत की टीम ने की। एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन के दौरान आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय के नेतृत्व में डॉ. कुनाल सिंह और डॉ. रजनीश कुमार ने किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल में क्रिटिकल केयर यूनिट की टीम, जिसमें डॉ. अजीत कुमार शामिल रहे, की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बिहारशरीफ के व्यक्ति की ब्रेन डेथ के बाद हुआ अंगदान
इस बहु-अंग दान की शुरुआत बिहारशरीफ निवासी एक व्यक्ति की ब्रेन डेथ के बाद हुई। सीढ़ियों से गिरने के कारण उन्हें गंभीर सिर की चोट लगी थी। निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों की काउंसलिंग के बाद उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने अंग एवं ऊतक दान की सहमति दी।
दाता का लिवर, दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान किए गए। लिवर और एक किडनी का प्रत्यारोपण एम्स पटना में किया गया, जबकि दूसरी किडनी को स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन, बिहार के माध्यम से राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आवंटित किया गया। दोनों कॉर्निया भी दान किए गए।
19 वर्षीय युवती का हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
दाता की एक किडनी का प्रत्यारोपण 19 वर्षीय युवती में किया गया। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी और डायलिसिस पर थी। यह एम्स पटना का 15वां किडनी प्रत्यारोपण और संस्थान में पहली बार मृतक दाता से किया गया किडनी ट्रांसप्लांट है।
किडनी प्रत्यारोपण की सर्जरी डॉ. कमलेश गुंजन के नेतृत्व में डॉ. नवीन कुमार, डॉ. साकेत सिंह और डॉ. नितीश कुमार की टीम ने की। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अभ्युदय कुमार और डॉ. नीरज कुमार शामिल रहे। मरीज की प्रत्यारोपण से पहले की जांच, उपचार की तैयारी और प्रत्यारोपण के बाद की चिकित्सा देखभाल नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अमरेश कृष्ण के नेतृत्व में डॉ. मेघा सहगल ने की।
कई विभागों की टीम ने किया समन्वय
इस बहु-अंग प्रत्यारोपण में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर सहित कई विभागों की टीमों ने समन्वय के साथ काम किया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, नर्सिंग टीम, ब्लड बैंक, रेडियोलॉजी, लैबोरेटरी, ऑपरेशन थिएटर, अस्पताल प्रशासन और अन्य सहयोगी विभागों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूरी प्रक्रिया कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह के सहयोग से संपन्न हुई। उप निदेशक (प्रशासन) श्री नीलोत्पल बल ने अंगदान, अंगों के रिट्रीवल, आवंटन, परिवहन और प्रत्यारोपण से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स पटना ने मृतक दाता और उनके परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि परिवार के कठिन समय में लिए गए अंगदान के फैसले से कई मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद मिली है। संस्थान के अनुसार, तीसरा लिवर ट्रांसप्लांट, दो महीनों में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट और 15वां किडनी प्रत्यारोपण एम्स पटना की बढ़ती प्रत्यारोपण क्षमता को दर्शाता है।