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Bihar Vidhan Sabha: विधानसभा में सांख्यिकी कर्मियों के मामले पर घिरी नीतीश सरकार, भाजपा और माले ने क्या पूछा?

Aditya Anand आदित्य आनंद
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:11 PM IST
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सार

Bihar News: बिहार सरकार से वेतन पा चुके सांख्यिकी स्वयंसेवक पिछले कई वर्षों से फिर से बहाली की मांग कर रहे हैं। इन कहना है कि नौकरी जाने के बाद आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। सरकार ध्यान दें। आज उनका मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। आइए जानते हैं किसने क्या कहा?

Bihar Vidhan Sabha: Questions to the government on the issue of statistical personnel BJP and CPI(ML)  ASV
बिहार विधानसभा में उठा सांख्यिकी कर्मियों की नौकरी का मुद्दा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार में सांख्यिकी स्वयंसेवक (एएसवी) की नियुक्ति और नियमितीकरण को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। विधानसभा में इस मामले पर भाजापा और माले के विधायकों ने सांख्यिकी कर्मियों का मुद्दा उठाया। दोनों विधायकों ने नीतीश सरकार ने इस मुद्दे पर सवाल पूछा। कहा कि 2016 के बाद हजारों सांख्यिकी कर्मी बेरोजगार हो गए। सरकार एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की बात कह रही है। बेरोजगार सांख्यिकीकर्मियों पर सरकार ध्यान दें। इसके बाद वित्त विभाग के मंत्री विजेंद्र यादव ने इस मुद्दे पर जवाब दिया। विधानसभा में इस मुद्दे पर क्या-क्या जिरह हुआ, आइए 'अमर उजाला' आपको जस के तस पढ़ा रहा...

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भाजपा विधायक ने क्या सवाल पूछा?
भाजपा विधायक कृष्णनंदन पासवान ने सांख्यिकी स्वयंसेवकों को नौकरी से हटाने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि सैकड़ों सांख्यिकी स्वयंसेवक आज बेरोजगार हो चुके हैं। यह बेरोजगारी की बात है। सांख्यिकी स्वयंसेवकों से सरकार ने काम लिया है। इसके बाद इन्हें हटा दिया गया। सरकार भी एक करोड़ रोजगार और नौकरी के लक्ष्य पर काम कर रही है। क्या सरकार इनलोगों को रोजगार देगी? ऊर्जा विभाग के मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि इनकी बात पर समुचित विचार करने की जरूरत है। सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है। 
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माले विधायक की बात पर मंत्री ने क्या कहा?
माले विधायक संदीप सौरभ ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांख्यिकी कर्मियों की बहाली की थी। सरकार ने जवाब दिया है कि हमने बहाली के वक्त ही कह दिया था कि कभी भी आपलोगों को हटाया जा सकता है। इसके बाद वित्त विभाग ने वैकेंसी निकालकर सांख्यिकी कर्मियों 2012-13 बहाल किया। इन्हें प्रशिक्षण दिया गया। पैनल तैयार हुआ। दो साल काम लेने के बाद 2014 से इनसे काम नहीं लिया गया। इसके बाद 2016 में पैनल ही रद्द कर दिया गया। इनके काम के आधार पर सीएम नीतीश कुमार को गणना संबंधित कार्य के लिए पुरस्कार भी दिया गया। सवाल यह है कि जिस काम के लिए सांख्यिकी कर्मियों को नियुक्त किया गया, क्या अब गणना के काम राज्य में नहीं होते हैं? अगर होते हैं तो उसी काम को कार्यपालक सहायक और शिक्षकों से क्यों लिए जाते हैं? इस पर मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार नीतिगत फैसले लेते हैं। इस पर विचार किया जा रहा है।  
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क्या है सांख्यिकी स्वयंसेवकों की मांग?
जानकारी के अनुसार, बेरोज़गार सांख्यिकी कर्मियों की संख्या 72 हजार है। सांख्यिकी स्वयंसेवकों ने हाल में ही डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को एक ज्ञापन भी सौंपा था। इसमें कहा गया कि वर्ष 2012 और 2013 में सांख्यिकी स्वयंसेवकों (ASV) की बहाली की गई थी। चयन के बाद उन्हें प्रपत्रों का वितरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आर्थिक गणना तथा सांख्यिकी निदेशालय से जुड़े विभिन्न कार्यों में लगाया गया। वर्ष 2016 तक सरकार द्वारा उन्हें मानदेय का भुगतान भी किया गया, लेकिन बाद में सेवा समाप्त कर दी गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर स्वयंसेवकों से कार्य लिया जाता रहा, जबकि उन्हें नियमित दर्जा नहीं मिला। सांख्यिकी स्वयंसेवकों का कहना है कि राज्यभर में बड़ी संख्या में एएसवी बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें नियमित नियुक्ति दी जाए या स्थायी समाधान निकालकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। सांख्यिकी स्वयंसेवकों ने कहा कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। एएसवी कर्मियों ने सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई है।

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