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Bihar News : परीक्षा से पहले मिला प्रश्नपत्र, IGIMS के सिस्टम पर उठे सवाल; छात्रों में आक्रोश
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Fri, 10 Apr 2026 12:27 PM IST
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सार
Bihar : पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच के बाद पटना का दूसरा सबसे बड़ा प्रतिष्ठित संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ही माना जाता है, जिस पर एक गंभीर आरोप लगा है। आरोप एमबीबीएस और पीजी की फाइनल परीक्षा के परीक्षार्थियों ने लगाया है।
एम्स पटना
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
पटना के प्रतिष्ठित संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस और पीजी की फाइनल परीक्षाओं में धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक बेनाम ईमेल ने संस्थान की परीक्षा प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।
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ऐसे हुआ खुलासा
मिली जानकारी के मुताबिक़ 11 मार्च को संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार को एक गोपनीय ईमेल मिला। इस ईमेल में डीन परीक्षा कार्यालय के ही एक गैर-शिक्षण कर्मचारी पर छात्रों के साथ मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ पहुँचाने का सीधा आरोप लगाया गया था, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज डीन प्रकाश दूबे ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। हालांकि डीन डॉ. प्रकाश दूबे के त्यागपत्र देने के बाद 2 अप्रैल को डॉ. नीरू गोयल को नए डीन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद इस मामले को लेकर 7 अप्रैल को एक बैठक का आयोजन किया गया, लेकिन इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार बैठक में शामिल नहीं हुए।
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जांच में क्या मिला?
मामले की जांच होने पर 17 मार्च को डीन, एसोसिएट डीन और रजिस्ट्रार की मौजूदगी में हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें सच सामने आ गया। जाँच में स्पष्ट हुआ कि
एमबीबीएस 2025 की परीक्षा के सीलबंद पैकेट खोले गए और दस्तावेजों में हेरफेर की गई। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्तर पुस्तिकाओं, कोडेड लीफलेट्स और अटेंडेंस शीट में भारी विसंगतियां हैं, जो जालसाजी को प्रमाणित करते हैं।
छात्रों के होठों पर है चुप्पी
हालांकि इस मामले को लेकर कोई भी छात्र कुछ भी बोलने से परहेज कर रहा है। इसके पीछे का कारण उन छात्रों का डर है, जिसने उन छात्रों को कुछ भी बोलने से रोक रहा है। उन छात्रों का मन्ना है कि इस मामले पर कुछ भी बोलने पर उन छात्रों को टार्गेट किया जा सकता है। हालांकि आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने से उनमें नाराजगी भी है, लेकिन टारगेट किए जाने के डर से छात्र खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। हालांकि नाम नहीं छपने की शर्त पर कुछ छात्रों ने बताया कि सिर्फ रसूखदार और बड़े लोगों के बच्चों को बचाने के लिए मुख्य दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। बताया जाता है कि इस मामले में लगभग 40-50 छात्रों की संलिप्तता है, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई के नाम पर हर कोई खामोश है। उनका कहना है कि इस मामले की किसी बाहरी एजेंसी से जांच करवानी चाहिए, ताकि सच सबके सामने आ सके और आरोपी छात्रों के साथ साथ सफेदपोश पर भी प्रशासनिक कार्रवाई हो सके।