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Bihar: नालंदा विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास, एक हजार पार पहुंची छात्र संख्या; अन्य देशों के छात्र लेंगे प्रवेश

Sat, 01 Aug 2026 07:46 AM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: पटना ब्यूरो Updated Sat, 01 Aug 2026 07:46 AM IST
सार

नालंदा विश्वविद्यालय ने अपने पुनरुद्धार के बाद पहली बार 1000 से अधिक विद्यार्थियों का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रचा है। इस शैक्षणिक सत्र में 45 से अधिक देशों के छात्र 19 नए कोर्सेज में प्रवेश ले रहे हैं। कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय के सहयोग को दिया।

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Nalanda University Creates History as Student Enrolment Crosses 1000 Global Demand Soars
नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्राचीन ज्ञान और शिक्षा के वैश्विक केंद्र रहे नालंदा विश्वविद्यालय ने अपने नवजागरण के बाद शैक्षणिक क्षेत्र में एक नया और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस विश्वविद्यालय के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण और गर्व का क्षण है, क्योंकि यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों की कुल संख्या ने पहली बार 1000 का आंकड़ा पार कर लिया है। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे संस्थान की प्रगति में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।
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45 से अधिक देशों के छात्रों का बढ़ा रुझान
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर दुनिया भर के छात्रों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन रहा है। इस वर्ष के शैक्षणिक सत्र में वैश्विक स्तर पर विद्यार्थियों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप 45 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी यहां प्रवेश ले रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में शुरू किए गए 19 नए कोर्सेज में इन विद्यार्थियों का नामांकन किया जा रहा है। अलग-अलग देशों से आने वाले ये छात्र न केवल यहां उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक और अकादमिक आदान-प्रदान को भी नई ऊंचाइयां देंगे। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नालंदा विश्वविद्यालय की साख अंतरराष्ट्रीय पटल पर तेजी से मजबूत हो रही है।
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प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय के सहयोग से मिली सफलता
इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय देते हुए कुलपति ने कहा कि यह मुकाम रातों-रात हासिल नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत विजन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लगातार सहयोग और उनके दूरदर्शी मार्गदर्शन के साथ-साथ विदेश मंत्रालय की सक्रिय सहभागिता के कारण ही विश्वविद्यालय इस वर्ष यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सका है। केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के निरंतर एवं साझा प्रयासों ने विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।
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जल्द शुरू होंगे पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल के उच्च स्तरीय शोध
भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं और अनुसंधान की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय अब केवल स्नातकोत्तर स्तर तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उच्च स्तरीय शोध की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शीघ्र ही विश्वविद्यालय में पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के तहत उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा और इसके लिए बड़ी संख्या में मेधावी विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इन शोध कार्यक्रमों के शुरू होने से नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव के अनुरूप दुनिया भर में अनुसंधान और नवाचार (इनोवेशन) का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
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