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Bihar: 81,730 एकड़ में बसने जा रही 'नई पाटलिपुत्र नगरी', ग्रीनफील्ड टाउनशिप बनेगा बिहार का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
Sun, 02 Aug 2026 02:50 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:50 PM IST
सार
बिहार सरकार ने 81,730 एकड़ में 130 सेक्टर वाला पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना जारी की है। इसमें आवास, उद्योग, शहरी कृषि, परिवहन और हरित क्षेत्र शामिल होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सफलता का आधार रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।
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विस्तार
बिहार सरकार ने राज्य के सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास परियोजनाओं में शामिल पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की रूपरेखा सार्वजनिक कर दी है। करीब 81,730 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह टाउनशिप 130 सेक्टरों में विकसित की जाएगी। प्रस्तावित क्षेत्रफल के लिहाज से यह मौजूदा पटना शहर से लगभग डेढ़ गुना बड़ा होगा।
विकास मॉडल के रूप में विकसित होगी टाउनशिप
सरकार की योजना के अनुसार यह टाउनशिप केवल आवासीय कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे आवास, उद्योग, परिवहन, हरित क्षेत्र, शहरी कृषि और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं से लैस एक समेकित शहरी विकास मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
आवासीय क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता
प्रस्तावित भूमि उपयोग योजना में सबसे अधिक 28,723 एकड़ (35.18%) भूमि आवासीय विकास के लिए निर्धारित की गई है। इसके अलावा 17,616 एकड़ (21.57%) क्षेत्र शहरी कृषि के लिए प्रस्तावित है, ताकि विकास के साथ कृषि गतिविधियों का भी संतुलन बना रहे। परिवहन एवं संचार के लिए 6,237 एकड़ (7.64%), जबकि ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के लिए 5,406 एकड़ (6.62%) भूमि चिन्हित की गई है।
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उद्योग, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी जोर
योजना में 4,651 एकड़ (5.70%) भूमि औद्योगिक गतिविधियों के लिए प्रस्तावित है। वहीं 4,774 एकड़ (5.85%) क्षेत्र मनोरंजन और सार्वजनिक खुले स्थानों के लिए तथा 3,606 एकड़ (4.42%) भूमि ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित की जाएगी। इसके अलावा सार्वजनिक उपयोग के लिए 3,319 एकड़, वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए 3,246 एकड़, नहरों एवं जल निकासी के लिए 1,898 एकड़, जलाशयों के लिए 1,814 एकड़ तथा सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए 359 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है।
ये भी पढ़ें- अंधाधुंध फायरिंग, 32 साल के युवक की हत्या; दूध लेकर शहर जाते समय अपराधियों ने बनाया निशाना
रोजगार होगा सफलता की सबसे बड़ी कसौटी
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की सफलता केवल बड़े क्षेत्रफल या आधुनिक बुनियादी ढांचे से तय नहीं होगी। सबसे महत्वपूर्ण पहलू रोजगार के पर्याप्त अवसर तैयार करना होगा। यदि इस टाउनशिप में उद्योग, कारोबार और सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार होता है, तो यह बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए नया विकास केंद्र बन सकता है। लेकिन यदि विकास केवल रियल एस्टेट तक सीमित रह गया और रोजगार सृजन अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ, तो इतनी बड़ी परियोजना का पूरा लाभ मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती 10 से 15 वर्षों में इस टाउनशिप की वास्तविक सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि यहां कितने स्थायी रोजगार, उद्योग, व्यवसाय और निवासी आकर्षित हो पाते हैं।
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विकास मॉडल के रूप में विकसित होगी टाउनशिप
सरकार की योजना के अनुसार यह टाउनशिप केवल आवासीय कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे आवास, उद्योग, परिवहन, हरित क्षेत्र, शहरी कृषि और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं से लैस एक समेकित शहरी विकास मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
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आवासीय क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता
प्रस्तावित भूमि उपयोग योजना में सबसे अधिक 28,723 एकड़ (35.18%) भूमि आवासीय विकास के लिए निर्धारित की गई है। इसके अलावा 17,616 एकड़ (21.57%) क्षेत्र शहरी कृषि के लिए प्रस्तावित है, ताकि विकास के साथ कृषि गतिविधियों का भी संतुलन बना रहे। परिवहन एवं संचार के लिए 6,237 एकड़ (7.64%), जबकि ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के लिए 5,406 एकड़ (6.62%) भूमि चिन्हित की गई है।
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उद्योग, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी जोर
योजना में 4,651 एकड़ (5.70%) भूमि औद्योगिक गतिविधियों के लिए प्रस्तावित है। वहीं 4,774 एकड़ (5.85%) क्षेत्र मनोरंजन और सार्वजनिक खुले स्थानों के लिए तथा 3,606 एकड़ (4.42%) भूमि ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित की जाएगी। इसके अलावा सार्वजनिक उपयोग के लिए 3,319 एकड़, वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए 3,246 एकड़, नहरों एवं जल निकासी के लिए 1,898 एकड़, जलाशयों के लिए 1,814 एकड़ तथा सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए 359 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है।
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रोजगार होगा सफलता की सबसे बड़ी कसौटी
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की सफलता केवल बड़े क्षेत्रफल या आधुनिक बुनियादी ढांचे से तय नहीं होगी। सबसे महत्वपूर्ण पहलू रोजगार के पर्याप्त अवसर तैयार करना होगा। यदि इस टाउनशिप में उद्योग, कारोबार और सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार होता है, तो यह बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए नया विकास केंद्र बन सकता है। लेकिन यदि विकास केवल रियल एस्टेट तक सीमित रह गया और रोजगार सृजन अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ, तो इतनी बड़ी परियोजना का पूरा लाभ मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती 10 से 15 वर्षों में इस टाउनशिप की वास्तविक सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि यहां कितने स्थायी रोजगार, उद्योग, व्यवसाय और निवासी आकर्षित हो पाते हैं।