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Bihar News: दर्द से कराहती रही महिला, अस्पताल में नहीं मिला स्ट्रेचर; चादर में लपेटकर पहुंचाया एम्बुलेंस तक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 10:35 AM IST
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सार
पटना जिले के बख्तियारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सड़क हादसे में घायल महिलाओं को अस्पताल में स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हो सका। एक गंभीर रूप से घायल महिला को बेडशीट में लपेटकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया, जबकि दूसरी घायल महिला को दर्द की हालत में पैदल चलाकर वाहन तक ले जाया गया।
बख्तियारपुर अस्पताल की तस्वीर ने चौंकाया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित बख्तियारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सामने आई है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को अस्पताल में बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल सकी। हालात इतने खराब थे कि एक घायल महिला को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर अस्पताल की बेडशीट में लपेटकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया। वहीं दूसरी घायल महिला को घायल अवस्था में ही पैदल चलाकर एम्बुलेंस तक ले जाया गया। इस दौरान दोनों महिलाएं दर्द से कराहती रहीं।
चादर में लपेटकर पहुंचाया गया एम्बुलेंस तक
मंगलवार को हुए एक सड़क हादसे में एक अधेड़ महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इलाज के बाद जब उसे बेहतर उपचार के लिए पटना रेफर किया गया तो अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने महिला को बेड पर बिछी चादर में लपेटा और उसी सहारे उठाकर किसी तरह एम्बुलेंस तक पहुंचाया। इस दौरान महिला दर्द से लगातार कराहती रही, लेकिन उसे राहत पहुंचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आई।
दूसरी घायल महिला को पैदल चलाकर पहुंचाया गया
इसी सड़क हादसे में घायल एक अन्य महिला के साथ भी लापरवाही देखने को मिली। महिला की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। इसके बावजूद उसे स्ट्रेचर पर ले जाने के बजाय सहारा देकर एम्बुलेंस तक पैदल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला बार-बार दर्द की वजह से चलने से मना कर रही थी, लेकिन किसी तरह उसे एम्बुलेंस तक पहुंचाकर वाहन में बैठा दिया गया।
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घायल बच्चों के साथ उसी एम्बुलेंस में भेजा गया एनएमसीएच
बताया गया कि जिस एम्बुलेंस से महिला को पटना भेजा गया, उसमें पहले से ही उसके तीन घायल बच्चे दोनों सीटों पर लेटे हुए थे। इसके बावजूद गंभीर रूप से घायल महिला को उसी एम्बुलेंस में किसी तरह बैठाकर इलाज के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) भेज दिया गया।
स्ट्रेचर तक नहीं, फिर मरीजों की सुरक्षा कैसे?
इस घटना ने बख्तियारपुर सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अस्पताल में घायलों को ले जाने के लिए एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हो, वहां मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्राथमिक सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तब मरीजों को सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सेवा देने के दावे खोखले साबित होते हैं।
ये भी पढ़ें: दहेज में नहीं मिली कार तो ली जान? पूर्णिया में विवाहिता की मौत; शरीर पर मिले चोट के निशान, पति गिरफ्तार
स्वास्थ्य मंत्री का गृह क्षेत्र, फिर भी बदहाल व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि बख्तियारपुर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का गृह क्षेत्र माना जाता है और वह यहां नियमित रूप से आते-जाते भी रहते हैं। इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
हाल ही में विधायक के निरीक्षण में भी मिली थीं कई खामियां
कुछ समय पहले स्थानीय विधायक अरुण कुमार साह ने भी बख्तियारपुर सीएचसी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। विधायक ने पाया था कि कुछ डॉक्टर अपने कमरों में सो रहे थे और मोबाइल फोन चलाने में व्यस्त थे। उस दौरान भी अस्पताल की कार्यशैली और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे थे।
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सीएचसी प्रभारी ने दी सफाई
मामले पर सीएचसी प्रभारी डॉ. अमरेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि घायल महिला के शरीर में कई जगह गंभीर चोटें थीं। उनके अनुसार महिला को मल्टीपल इंजरी थी और शरीर के कई हिस्सों में चोट होने के कारण उसे बेडशीट के सहारे ले जाया गया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेचर पर उठाकर रखने से मरीज को अधिक दर्द और परेशानी हो सकती थी, इसलिए यह व्यवस्था की गई।
चादर में लपेटकर पहुंचाया गया एम्बुलेंस तक
मंगलवार को हुए एक सड़क हादसे में एक अधेड़ महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इलाज के बाद जब उसे बेहतर उपचार के लिए पटना रेफर किया गया तो अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने महिला को बेड पर बिछी चादर में लपेटा और उसी सहारे उठाकर किसी तरह एम्बुलेंस तक पहुंचाया। इस दौरान महिला दर्द से लगातार कराहती रही, लेकिन उसे राहत पहुंचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आई।
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दूसरी घायल महिला को पैदल चलाकर पहुंचाया गया
इसी सड़क हादसे में घायल एक अन्य महिला के साथ भी लापरवाही देखने को मिली। महिला की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। इसके बावजूद उसे स्ट्रेचर पर ले जाने के बजाय सहारा देकर एम्बुलेंस तक पैदल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला बार-बार दर्द की वजह से चलने से मना कर रही थी, लेकिन किसी तरह उसे एम्बुलेंस तक पहुंचाकर वाहन में बैठा दिया गया।
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घायल बच्चों के साथ उसी एम्बुलेंस में भेजा गया एनएमसीएच
बताया गया कि जिस एम्बुलेंस से महिला को पटना भेजा गया, उसमें पहले से ही उसके तीन घायल बच्चे दोनों सीटों पर लेटे हुए थे। इसके बावजूद गंभीर रूप से घायल महिला को उसी एम्बुलेंस में किसी तरह बैठाकर इलाज के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) भेज दिया गया।
स्ट्रेचर तक नहीं, फिर मरीजों की सुरक्षा कैसे?
इस घटना ने बख्तियारपुर सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अस्पताल में घायलों को ले जाने के लिए एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हो, वहां मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्राथमिक सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तब मरीजों को सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सेवा देने के दावे खोखले साबित होते हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री का गृह क्षेत्र, फिर भी बदहाल व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि बख्तियारपुर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का गृह क्षेत्र माना जाता है और वह यहां नियमित रूप से आते-जाते भी रहते हैं। इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
हाल ही में विधायक के निरीक्षण में भी मिली थीं कई खामियां
कुछ समय पहले स्थानीय विधायक अरुण कुमार साह ने भी बख्तियारपुर सीएचसी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। विधायक ने पाया था कि कुछ डॉक्टर अपने कमरों में सो रहे थे और मोबाइल फोन चलाने में व्यस्त थे। उस दौरान भी अस्पताल की कार्यशैली और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे थे।
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सीएचसी प्रभारी ने दी सफाई
मामले पर सीएचसी प्रभारी डॉ. अमरेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि घायल महिला के शरीर में कई जगह गंभीर चोटें थीं। उनके अनुसार महिला को मल्टीपल इंजरी थी और शरीर के कई हिस्सों में चोट होने के कारण उसे बेडशीट के सहारे ले जाया गया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेचर पर उठाकर रखने से मरीज को अधिक दर्द और परेशानी हो सकती थी, इसलिए यह व्यवस्था की गई।