Bihar News : रिशु श्री प्रकरण में SVU का बड़ा एक्शन, संयुक्त सचिव समेत तीन गिरफ्तार, IAS संजीव हंस की तलाश तेज
Bihar : बहुचर्चित रिशु श्री प्रकरण में जांच एजेंसियों ने संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी और दो बड़े इंजीनियरों को गिरफ्तार किया है। वहीं आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
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सरकारी ठेकों में कथित कमीशनखोरी, अकूत भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बहुचर्चित रिशु श्री प्रकरण में जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। विशेष निगरानी इकाई की ताबड़तोड़ कार्रवाई के तहत अब तक संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी और दो बड़े इंजीनियरों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं राज्य के एक बेहद रसूखदार आईएएस अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। गिरफ्तार होने वालों में वित्त विभाग की संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। वहीं इस मामले में आईएएस अधिकारी संजीव हंस फरार हैं, जबकि बीएमएसआईसीएल के प्रोजेक्ट डीजीएम पंकज कुमार जांच और कार्रवाई के दायरे में हैं।
क्या है रिशु श्री प्रकरण और कैसे होता था खेल?
जांच एजेंसियों के दावों के मुताबिक, यह पूरा खेल अधिकारी-ठेकेदार नेक्सस का एक बड़ा उदाहरण है। रसूखदार ठेकेदार रिशु श्री को केंद्र में रखकर करोड़ों रुपये के इस कथित भ्रष्टाचार तंत्र को संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रभावशाली पदों पर बैठे अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिशु श्री की कंपनियों को नियम-कानून ताक पर रखकर सरकारी ठेके आवंटित किए। इसके बदले अधिकारियों को भारी-भरकम कमीशन दिया गया, जिसे बाद में शेल कंपनियों के जरिए सफेद (मनी लॉन्ड्रिंग) किया गया।
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संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी पर क्या हैं आरोप?
एजेंसी ने वर्तमान में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात मुमुक्षु चौधरी के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने का दावा है। उनपर आरोप है कि सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त के पद पर रहते हुए मुमुक्षु चौधरी ने रिशु श्री की कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया और बदले में मोटी रकम ली। इससे पहले 27 मार्च 2025 को प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में उनके ठिकानों से करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया था।
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आईएएस अधिकारी संजीव हंस की भूमिका और फरारी
बिहार के जल संसाधन और ऊर्जा जैसे मलाईदार और महत्वपूर्ण विभागों में शीर्ष पदों पर रह चुके आईएएस संजीव हंस को इस पूरे प्रकरण के मुख्य किरदारों में से एक माना जा रहा है। आईएएस अधिकारी संजीव हंस पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव वाले विभागों में रिशु श्री की कंपनियों को करोड़ों के टेंडर दिलाए। अब संजीव हंस के खिलाफ ईडी, सीबीआई और एस वीयू तीनों एजेंसियां अलग-अलग तरीके से जांच कर रही हैं। बताया जाता है कि फिलहाल वे अपने ठिकानों से गायब हैं और एजेंसियां उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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इंजीनियरों का नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग
पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी से तकनीकी विभागों में चल रही कमीशनखोरी की परतें खुली हैं। तारिणी दास के ठिकानों पर हुई ईडी की छापेमारी में भी करोड़ों रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हो चुकी है। जांच एजेंसियों को इनपुट मिला है कि रिशु श्री से जुड़ी एक शेल कंपनी के माध्यम से इस काली कमाई को वैध बनाने यानी मनी लॉन्ड्रिंग का एक पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था।