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Bihar: भागलपुर में कला का अद्भुत संगम, कोयले की राख से उकेरी गई मां सरस्वती की छवि, बनी आकर्षण का केंद्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sat, 24 Jan 2026 11:43 AM IST
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सार

एक पारंपरिक पर्व के अवसर पर रचनात्मक अभिव्यक्ति का ऐसा रूप देखने को मिला, जिसने लोगों को चकित कर दिया। अनोखे माध्यम और विशाल आकार में तैयार की गई कलाकृति ने श्रद्धा, नवाचार और सामाजिक संदेश को एक साथ प्रस्तुत किया।

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कोयले की राख से उकेरी गई मां सरस्वती की छवि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को पूरे देश में सरस्वती पूजा का पर्व बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित एकचारी क्षेत्र में कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां भारत के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने कोयले की राख से मां शारदा भवानी की दिव्य और भव्य कलाकृति का निर्माण किया। यह अनोखी रचना पूरे दिन लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही।

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समुद्र तट से लेकर पीपल के हरे पत्तों तक अपनी अनोखी कलाकारी से देश-विदेश में पहचान बना चुके अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने इस बार सरस्वती पूजा के अवसर पर एक अनूठा प्रयोग किया। उन्होंने करीब 20 टन यानी 20,000 किलोग्राम कोयले की राख का उपयोग कर लगभग 15 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य आकृति तैयार की। यह कलाकृति इतनी सजीव प्रतीत हो रही थी कि मानो कोयले की राख में मां शारदा भवानी स्वयं प्रकट हो गई हों। इस कलाकृति के माध्यम से कलाकार ने “हैप्पी सरस्वती पूजा” का संदेश भी अंकित किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कला प्रेमी पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी इस अद्भुत रचना की खूब चर्चा हो रही है, जहां लोग तस्वीरें और वीडियो साझा कर सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार को बधाई दे रहे हैं।

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सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार - फोटो : अमर उजाला

वीणा, हंस और मोर के साथ मां सरस्वती की सजीव छवि

इस अनोखी रचना में मां सरस्वती को वीणा धारण किए हुए हंस की सवारी करते हुए दर्शाया गया है, वहीं पास में मोर की मनोहारी आकृति भी उकेरी गई है। कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने बताया कि वे अपनी इस कलाकृति के माध्यम से ज्ञान, रचनात्मकता और विश्व शांति का संदेश देना चाहते हैं।

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सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार - फोटो : अमर उजाला

रेतकला के जादूगर, देश-विदेश में पहचान

रेतकला के जादूगर के रूप में विख्यात मधुरेंद्र कुमार प्राकृतिक आपदाओं, समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत सामाजिक विषयों पर अपनी कला के माध्यम से सकारात्मक संदेश देने के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। अपनी विशिष्ट और नवाचारी कला के दम पर वे अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। मधुरेंद्र कुमार ऐसे पहले भारतीय कलाकार हैं जिन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। इसके अलावा हाल ही में बौद्ध महोत्सव के अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 रेत प्रतिमाओं के निर्माण के लिए उन्हें यूनाइटेड नेशन (यूएन) बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

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