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Bihar News: बेनकाब हुआ डीएसपी का करप्शन, दरोगा मित्र के नाम पर मिले 7 प्लॉट और 60 लाख का सोना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 09:24 AM IST
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सार
किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार के खिलाफ ईओयू की छापेमारी में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि उनका महिला दरोगा शगुफ्ता शमीम के साथ पिछले 10 वर्षों से करीबी संबंध था।
डीएसपी गौतम कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की छापेमारी ने न केवल भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर पिछले एक दशक से चल रहे एक खास रिश्ते को भी उजागर कर दिया है। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
10 साल पुराना था करीबी रिश्ता
ईओयू की जांच में सामने आया है कि डीएसपी गौतम कुमार और महिला दरोगा शगुफ्ता शमीम के बीच पिछले 10 वर्षों से बेहद करीबी संबंध थे। यह रिश्ता कुछ वर्षों का नहीं, बल्कि एक दशक पुराना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, शगुफ्ता के पिता स्वर्गीय शमीम ठेकेदार के साथ डीएसपी के गहरे पारिवारिक संबंध थे। पिता की मृत्यु के बाद यह संबंध और मजबूत होता गया। वर्ष 2019 में जब शगुफ्ता शमीम बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनीं, तब तक दोनों के संबंध पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन चुके थे। जांच में यह भी सामने आया है कि डीएसपी ने अपनी अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा इस रिश्ते को बनाए रखने में खर्च किया।
छापेमारी में मिला चौंकाने वाला सामान
ईओयू की टीम ने पूर्णिया के आशियाना कॉलोनी स्थित शगुफ्ता के घर पर छापेमारी की। यहां से बरामद संपत्ति ने सभी को चौंका दिया। जांच में पता चला कि डीएसपी ने शगुफ्ता के नाम पर 7 कीमती प्लॉट खरीदे थे और उनके बैंक खाते में लाखों रुपये जमा कराए थे। इसके अलावा छापेमारी में 60 लाख रुपये के सोने के जेवरात भी बरामद किए गए।
फर्जी सिम और महंगे तोहफों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया है कि डीएसपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर शगुफ्ता से संपर्क में रहते थे। साथ ही उन्हें महंगे ब्रांडेड उपहार भी देते थे। बताया जा रहा है कि इस लंबे समय से चल रहे संबंध की जानकारी विभाग के कई अधिकारियों को थी, लेकिन डीएसपी के प्रभाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आया। अब ईओयू ने साक्ष्यों के आधार पर शगुफ्ता शमीम को भी सह-अभियुक्त बना लिया है।
ये भी पढ़ें: नई सरकार के गठन से पहले किन नेताओं को मिला VIP का दर्जा; विधान सभा समितियों में ओहदा
करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
पूर्णिया के हाउसिंग कॉलोनी में डीएसपी का करीब 2.5 करोड़ रुपये का चार मंजिला बंगला और शगुफ्ता के पास मिली बेनामी संपत्तियां यह साफ संकेत दे रही हैं कि इस रिश्ते ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। साल 1994 में पुलिस सेवा में आए गौतम कुमार और 2019 बैच की दरोगा शगुफ्ता शमीम, दोनों का करियर अब इस खुलासे के बाद संकट में पड़ गया है। ईओयू ने अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेज दी है।
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10 साल पुराना था करीबी रिश्ता
ईओयू की जांच में सामने आया है कि डीएसपी गौतम कुमार और महिला दरोगा शगुफ्ता शमीम के बीच पिछले 10 वर्षों से बेहद करीबी संबंध थे। यह रिश्ता कुछ वर्षों का नहीं, बल्कि एक दशक पुराना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, शगुफ्ता के पिता स्वर्गीय शमीम ठेकेदार के साथ डीएसपी के गहरे पारिवारिक संबंध थे। पिता की मृत्यु के बाद यह संबंध और मजबूत होता गया। वर्ष 2019 में जब शगुफ्ता शमीम बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनीं, तब तक दोनों के संबंध पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन चुके थे। जांच में यह भी सामने आया है कि डीएसपी ने अपनी अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा इस रिश्ते को बनाए रखने में खर्च किया।
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छापेमारी में मिला चौंकाने वाला सामान
ईओयू की टीम ने पूर्णिया के आशियाना कॉलोनी स्थित शगुफ्ता के घर पर छापेमारी की। यहां से बरामद संपत्ति ने सभी को चौंका दिया। जांच में पता चला कि डीएसपी ने शगुफ्ता के नाम पर 7 कीमती प्लॉट खरीदे थे और उनके बैंक खाते में लाखों रुपये जमा कराए थे। इसके अलावा छापेमारी में 60 लाख रुपये के सोने के जेवरात भी बरामद किए गए।
फर्जी सिम और महंगे तोहफों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया है कि डीएसपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर शगुफ्ता से संपर्क में रहते थे। साथ ही उन्हें महंगे ब्रांडेड उपहार भी देते थे। बताया जा रहा है कि इस लंबे समय से चल रहे संबंध की जानकारी विभाग के कई अधिकारियों को थी, लेकिन डीएसपी के प्रभाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आया। अब ईओयू ने साक्ष्यों के आधार पर शगुफ्ता शमीम को भी सह-अभियुक्त बना लिया है।
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करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
पूर्णिया के हाउसिंग कॉलोनी में डीएसपी का करीब 2.5 करोड़ रुपये का चार मंजिला बंगला और शगुफ्ता के पास मिली बेनामी संपत्तियां यह साफ संकेत दे रही हैं कि इस रिश्ते ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। साल 1994 में पुलिस सेवा में आए गौतम कुमार और 2019 बैच की दरोगा शगुफ्ता शमीम, दोनों का करियर अब इस खुलासे के बाद संकट में पड़ गया है। ईओयू ने अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेज दी है।