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होली की पार्टी में बिहार के युवक से हैवानियत: दोस्तों ने शरीर में घुसाया स्टील का ग्लास, ऑपरेशन के बाद बची जान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Thu, 12 Mar 2026 07:54 AM IST
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सार

महाराष्ट्र में आपसी विवाद के दौरान नशे में धुत दोस्तों ने एक युवक के रेक्टम में स्टील का ग्लास डाल दिया। सात दिनों की असहनीय पीड़ा और लंबी ट्रेन यात्रा के बाद, पूर्णिया के डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर युवक की जान बचाई।

Medical Marvel in Purnia: Doctors Extract Steel Glass from Youth Rectum After Brutal Assault FriendMaharashtra
मरीज का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पूर्णिया जिले से एक ऐसी सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र में काम करने वाले एक बिहारी युवक के साथ उसके ही दोस्तों ने होली के जश्न के दौरान ऐसी क्रूरता की, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। आपसी विवाद के बाद नशे में धुत दोस्तों ने युवक के गुदा मार्ग में स्टील का एक बड़ा ग्लास डाल दिया।

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सात दिनों तक असहनीय पीड़ा और मौत से जूझने के बाद, पूर्णिया के डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई है। घटना 4 मार्च की है, जब पीड़ित युवक महाराष्ट्र में अपने दोस्तों के साथ होली मना रहा था। शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक मारपीट में बदल गई। नशे के जुनून में दोस्तों ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं और युवक को बुरी तरह पीटने के बाद उसके शरीर के संवेदनशील हिस्से  में स्टील का ग्लास जबरन घुसा दिया।
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लोक-लाज और आरोपियों के डर के मारे युवक ने महाराष्ट्र में किसी को कुछ नहीं बताया। वह अपनी जान बचाने और इलाज की उम्मीद में उसी हालत में ट्रेन पकड़कर पूर्णिया के लिए रवाना हो गया। तीन दिनों की लंबी और कष्टकारी ट्रेन यात्रा के दौरान वह असहनीय दर्द से तड़पता रहा। पूर्णिया पहुंचने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के सर्जन डॉ. तारकेश्वर कुमार और एनेस्थेटिस्ट डॉ. विकास कुमार ने जब युवक की जांच की, तो वे भी दंग रह गए। सिग्मॉइडोस्कोपी में पाया गया कि स्टील का ग्लास मलाशय की काफी गहराई में फंसा हुआ था, जिससे अंदरूनी अंगों के फटने और सेप्सिस फैलने का गंभीर खतरा था।

चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉक्टरों की टीम ने स्पाइनल एनेस्थीसिया के जरिए बिना किसी बड़ी चीर-फाड़ के, बड़ी कुशलता से ग्लास को शरीर से बाहर निकाल दिया। डॉक्टरों के अनुसार, अगर थोड़ी भी और देरी होती, तो संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता था, जो जानलेवा साबित होता। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन आंतरिक चोटों की गंभीरता को देखते हुए उसे अभी मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। 

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